कुल्लू में चल रही 50 से ज्यादा जिप लाइन, सिर्फ 7 रजिस्टर, पर्यटकों की सेफ्टी से खिलवाड़
कुल्लू में अवैध जिप लाइन चलाने वाले संचालकों पर पर्यटन विभाग की कार्रवाई शुरू.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 23, 2025 at 1:53 PM IST
कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में हर साल हजारों-लाखों सैलानी घूमने आते हैं. इनमें कई सैलानी एडवेंचर के शौकीन होते हैं. जो कि प्रदेश की खूबसूरत वादियों में घूमने के साथ-साथ रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और जिप लाइन जैसी एडवेंचर एक्टिविटी में भी हिस्सा लेते हैं. वहीं, कई बार सैलानी दुर्घटनाओं का शिकार भी हो जाते हैं. ऐसे में सैलानियों के साथ किसी तरह की कोई दुर्घटना न हो और उनकी सुरक्षा के मध्यनजर पर्यटन विभाग अलर्ट मोड में आ गया है. पर्यटन विभाग द्वारा इसके लिए अब आवश्यक कार्रवाई की जा रही है.
जिप लाइन संचालन पर पर्यटन विभाग की कार्रवाई
बात करें कुल्लू जिले की तो यहां विभिन्न पर्यटन स्थलों पर सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ती है. यहां पर सैलानी रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग के साथ-साथ जिप लाइन जैसी साहसिक गतिविधियों का भी मजा लेते हैं, लेकिन कई बार थोड़ी सी लापरवाही सैलानियों की जान पर भी भारी पड़ जाती है. ऐसे में पर्यटन विभाग की टीम द्वारा कुल्लू जिले में चल रहे जिप लाइनों का निरीक्षण किया जा रहा है. साथ ही सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करने के भी सलाह दी जा रही है. कुल्लू जिले में जो जिप लाइन चलाई जा रही हैं, उन्हें पंजीकृत करने का भी काम किया जा रहा है, ताकि सैलानी पंजीकृत और सुरक्षित जिप लाइन में ही साहसिक गतिविधियों का मजा ले सकें.
कुल्लू में सिर्फ 7 जिप लाइन रजिस्टर
जिला कुल्लू में सबसे ज्यादा जिप लाइन कुल्लू और मनाली में चलाई जाती हैं. इसके अलावा बंजार क्षेत्र में भी दो जिप लाइन चल रही हैं. पर्यटन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक कुल्लू जिले में 50 से ज्यादा जीप लाइन अवैध तरीके से चलाई जा रही हैं. जिन्हें रजिस्ट्रेशन के लिए विभाग ने नोटिस भी जारी किए हैं. दरअसल बीते दिनों पर्यटन विभाग की टीम द्वारा इन सभी जिप लाइनों की जांच की गई थी. तब ये पाया गया था कि यहां पर सिर्फ 7 जिप लाइन ही पर्यटन विभाग के पास रजिस्टर हैं. जिसके बाद विभाग ने सभी जिप लाइन संचालकों से अपनी साइट को रजिस्टर करने के निर्देश जारी किए हैं. ऐसे में अब तक 17 जिप लाइन संचालकों ने अपने आवेदन पर्यटन विभाग में जमा करवा दिए हैं, ताकि ये सभी जिप लाइन यहां पर कानूनी रूप से संचालित हो सके.
"अवैध रूप से जिप लाइन संचालन के बारे में पर्यटन विभाग को शिकायत मिली थी. जिसके चलते एक टीम का गठन किया गया था और जगह-जगह पर टीम द्वारा दबिश दी गई थी. जिप लाइन संचालक भी अपनी-अपनी साइट को पर्यटन विभाग के पास पंजीकृत करवा रहे हैं, ताकि वह कानूनी तौर पर इसका संचालन कर सके. जिला कुल्लू में 7 जिप लाइन पहले से पंजीकृत है और 17 जिप लाइन संचालकों द्वारा पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया है, लेकिन उसमें कुछ कमियां पाई गई है. उन सब कमियों को दूर करने के बारे में उन्हें निर्देश दिए गए हैं और उसके बाद सभी जिप लाइन को पंजीकृत किया जाएगा." - रोहित शर्मा, पर्यटन विकास अधिकारी, कुल्लू
जिप लाइन के लिए NOC लेना जरूरी
पर्यटन विभाग के मुताबिक कुल्लू जिले के सभी जिप लाइन नदी-नालों के किनारे पर बने हुए हैं. ऐसे में जिप लाइन संचालक को अगर उसे रजिस्टर करना है तो उसके लिए वन विभाग या फिर एनएचएआई या बीआरओ से एनओसी लेनी पड़ती है. वन विभाग द्वारा भी इको टूरिज्म समिति की मदद से जिप लाइन संचालकों को एनओसी दी जा रही है. जिसके चलते जिप लाइन संचालकों को दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा. इसके अलावा जिप लाइन खंभे की उचित ऊंचाई, उसमें प्रयोग होने वाले उपकरणों और रस्सी की गुणवत्ता की भी जांच की जाती है.

कैसे रजिस्टर करें जिप लाइन साइट ?
पर्यटन विभाग के मुताबिक जिप लाइन चलाने के लिए संचालक को पहले पर्यटन विभाग को एक आवेदन प्रस्तुत करना होता है. उसके बाद वन विभाग, पंचायत से भी एनओसी लेनी होती है, ताकि इस बात का पता चल सके कि जिप लाइन कहीं वन भूमि पर तो नहीं की जा रही है. आवेदन करने के बाद पर्यटन विभाग, खेल विभाग और अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण संस्थान द्वारा मिलकर एक कमेटी का गठन किया जाता है. कमेटी की ओर से सभी दस्तावेजों की जांच की जाती है और उसके बाद साइट का निरीक्षण किया जाता है. अगर साइट सही पाई जाए तो कमेटी की ओर से पर्यटन विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंपी जाती है. इसके बाद पर्यटन विभाग जिप लाइन चलाने के लिए संचालक को प्रमाण पत्र जारी करता है.

जिप लाइन में इन चीजों का रखें ध्यान सैलानी
एडवेंचर एक्टिविटी से जुड़े कारोबारी हरीश शर्मा, कबीर सिंह ने बताया कि जब भी सैलानी किसी साइट पर जिप लाइन करना चाहते हैं तो उन्हें कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए. सबसे पहले तो सैलानी जिप लाइन से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच करें. जिप लाइन संचालक के पास पर्यटन विभाग से मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र जरूर होना चाहिए, ताकि पता चल सके कि अवैध रूप से जिप लाइन तो नहीं करवाई जा रही है. जिप लाइन में यूज होने वाले उपकरण किस कंपनी के हैं और उनकी क्वालिटी क्या है? इसकी सैलानी खुद से जांच कर सकते हैं. जिप लाइन के उपकरणों से संबंधित डॉक्यूमेंट्स को भी सैलानी खुद से देख सकते हैं. इसके अलावा कितनी दूरी तक जिप लाइन को मान्यता प्राप्त है और जमीन पर कितनी ऊंचाई पर जिप लाइन करवाई जा रही है, इसके बारे में भी सैलानी संचालक से जानकारी ले सकते हैं. जिप लाइन करने से पहले सैलानी मेन वायर, सीट बेल्ट और हुक की अच्छे से जांच करें और अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता न करें.

