हिमाचल में इन परिवारों को 1500 रुपये और 300 यूनिट फ्री बिजली का रास्ता साफ, जानें कितने लाख परिवारों को मिलेगा लाभ?
सरकार इन परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के साथ-साथ जरूरत अनुसार नई कल्याणकारी योजनाओं का खाका तैयार करने में जुटी. रश्मिराज भारद्वाज की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 18, 2026 at 7:48 AM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए दो बड़े वादों महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये और 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली को अब सरकार पात्र परिवारों के जरिए सिरे चढ़ाने की तैयारी में है. इसके लिए सरकार ने प्रदेश के सबसे जरूरतमंद परिवारों की पहचान का रास्ता तैयार कर लिया है. ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के 'अपना परिवार सुखी परिवार' अभियान के तहत प्रदेशभर में आठ चरणों में किए गए सर्वेक्षण के बाद 1.78 लाख अति निर्धन परिवारों का चयन किया गया है.
1500 रुपये और 300 यूनिट फ्री बिजली
खास बात यह है कि इन परिवारों की पहचान केवल आर्थिक स्थिति के आधार पर ही नहीं, इस बात को ध्यान में रखकर की गई है कि अति निर्धन होने के बावजूद कौन से परिवार अब तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से बाहर रह गए हैं. अब सरकार द्वारा इन परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के साथ इनके लिए जरूरत के हिसाब से नई कल्याणकारी योजनाओं का खाका भी तैयार किया जा रहा है. प्रदेशभर में संवाद कार्यक्रमों के जरिए इन परिवारों से सीधे उनकी समस्याएं और जरूरतें पूछी गई हैं. सरकार का फोकस अब इस बात पर है कि चिह्नित परिवारों को ऐसी सुविधाएं मिलें, जिनसे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में वास्तविक सुधार हो.
आठ चरणों के सर्वे से सामने आए सबसे जरूरतमंद परिवार
'अपना परिवार सुखी परिवार' के तहत ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग ने आठ चरणों में सर्वेक्षण करवाकर ऐसे परिवारों को चिह्नित किया है, जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं. इन परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ-साथ उनकी मूलभूत जरूरतों को समझने के लिए संवाद कार्यक्रम भी किए गए हैं. सरकार अब इनसे मिले फीडबैक के आधार पर आगे की योजनाओं को अंतिम रूप देने की दिशा में बढ़ रही है.
चुनावी वादों को भी मिलेगा इसी कवायद से आधार
प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने सत्ता में आने पर प्रदेश की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये देने का वादा किया था. इसी तरह वर्तमान में मिल रही 125 यूनिट मुफ्त बिजली की सीमा बढ़ाकर 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का भरोसा भी दिया गया था. अब सरकार की कवायद इन चुनावी घोषणाओं को प्रदेश के सभी परिवारों की बजाय चिह्नित किए गए पात्र और अति निर्धन परिवारों तक सीमित करने की दिशा में दिखाई दे रही है. यानी अति निर्धन परिवारों में शामिल महिलाओं को 1500 रुपये मासिक सहायता और पात्र परिवारों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ देने की राह इसी सर्वेक्षण से निकल रही है.
जरूरत सुनी, अब योजना बनाने की तैयारी
सरकार ने संवाद कार्यक्रमों के जरिए यह समझने का प्रयास किया है कि इन 1.78 लाख परिवारों को वास्तव में किन सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है. इसके आधार पर भविष्य में इनके लिए अलग-अलग कल्याणकारी योजनाएं तैयार करने की बात कही जा रही है. ऐसे में 'अपना परिवार सुखी परिवार' अब केवल गरीब परिवारों की पहचान का अभियान नहीं रह गया है, इसे सरकार की आगामी कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार के तौर पर भी देखा जा रहा है.
ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के सचिव सी पालरासू का कहना है कि प्रदेश सरकार ने अपना परिवार सुखी परिवार के तहत 1.78 अति निर्धन परिवारों का चयन किया है. इसमें 85 हजार परिवार ऐसे हैं, जो बीपीएल सूची में भी शामिल नहीं थे. सरकार इन परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए काम कर रही है.
कांग्रेस की गारंटियां
- सत्ता में आने पर कांग्रेस ने अति निर्धन परिवारों में शामिल 18 से 59 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपये मासिक सहायता का वादा.
- पात्र परिवारों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ.
- 'अपना परिवार सुखी परिवार' के तहत ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग ने 8 चरणों में सर्वेक्षण करवाकर परिवारों को किया चिह्नित.
- योजना के लिए करीब 1.78 लाख अति निर्धन परिवारों का चयन.
ये था चुनावी वादा
हिमाचल प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के लिए कांग्रेस ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जनता के सामने दस गारंटियों का बड़ा खाका रखा था. इन गारंटियों में प्रदेश की आधी आबादी यानी 18 से 59 वर्ष आयु वर्ग की सभी महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये देने और घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुफ्त बिजली की मौजूदा सुविधा का दायरा बढ़ाकर 300 यूनिट प्रतिमाह करने का वादा भी प्रमुख था. चुनाव के दौरान ये दोनों घोषणाएं कांग्रेस के प्रमुख चुनावी वादों में शामिल रहीं और सरकार बनने के बाद इनके लागू होने का इंतजार लगातार बना रहा. लेकिन, सत्ता में आने के करीब 44 महीने बाद तस्वीर बदलती नजर आ रही है. जिन योजनाओं को चुनाव के समय व्यापक आबादी से जोड़कर पेश किया गया था, अब उनका लाभ प्रदेश के हर परिवार तक पहुंचाने के बजाय जरूरतमंद और अति निर्धन परिवारों तक सीमित करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया गया है.
यानी सरकार ने इसके लिए सीधे सभी महिलाओं या सभी परिवारों को आधार बनाने के बजाय आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की पहचान का रास्ता चुना है. खास बात यह है कि ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के 'अपना परिवार सुखी परिवार' अभियान के तहत प्रदेशभर में आठ चरणों में किए गए सर्वे के बाद करीब 1.78 लाख अति निर्धन परिवारों का चयन किया जा चुका है. अब यही परिवार सरकार की उन घोषणाओं के केंद्र में आते दिखाई दे रहे हैं, जिनमें महिलाओं को आर्थिक सहायता और गरीब परिवारों को बिजली राहत देने की बात है. यानी चुनाव के समय 'सभी महिलाओं' और 'सभी परिवारों' से जुड़े वादे अब फिलहाल 'जरूरतमंद परिवारों' की कसौटी से होकर आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं.
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