हिमाचल के स्कूलों में मिड डे मील के अलावा परोसा जा रहा स्पेशल भोज, जानें क्या है 'अतिथि भोज' मुहिम
हिमाचल के सरकारी स्कूलों में भोजन पूरी तरह स्वैच्छिक होगा और निर्धारित गुणवत्ता एवं स्वच्छता मानकों के अनुरूप ही परोसा जाएगा.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : June 29, 2026 at 7:29 AM IST
|Updated : June 29, 2026 at 10:37 AM IST
शिमला: हिमाचल में अब जन्मदिन, शादी की सालगिरह, विवाह, सेवानिवृत्ति या जीवन की किसी भी खुशी को केवल परिवार और मित्रों तक सीमित रखने की बजाय सरकारी स्कूलों के बच्चों के साथ साझा करने की नई और प्रेरणादायक परंपरा से आकार ले रही है. प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने और छात्रों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 'अतिथि भोज' जैसी अनूठी पहल को प्रोत्साहित कर रहा है.
सामान्य मिड डे मील की जगह स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन
इस पहल के तहत कोई भी इच्छुक व्यक्ति अपने विशेष अवसर पर सरकारी स्कूल में पहुंचकर बच्चों के लिए सामान्य मिड डे मील की जगह स्वादिष्ट, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन की व्यवस्था कर सकता है. इससे छात्रों को एक दिन विशेष भोजन का आनंद मिलने के साथ ही समाज और सरकारी स्कूलों के बीच आत्मीयता, विश्वास और सहयोग का रिश्ता भी और अधिक मजबूत हो रहा है.
शिक्षा विभाग ने इस व्यवस्था को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं. विभाग ने कहा है कि, किसी भी परिस्थिति में बच्चों को भोजन कराने के लिए स्कूल परिसर से बाहर नहीं ले जाया जाएगा. अतिथि भोज का आयोजन केवल संबंधित स्कूल परिसर में ही किया जाएगा, ताकि छात्रों की सुरक्षा, अनुशासन और पारदर्शिता पूरी तरह सुनिश्चित रहे.
14,384 हजार सरकारी स्कूलों में 372 भोज आयोजित
शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि, स्कूल प्रशासन ऐसे आयोजनों के लिए किसी प्रकार का आर्थिक सहयोग या अतिरिक्त खर्च की मांग नहीं करेगा. भोजन पूरी तरह स्वैच्छिक होगा और निर्धारित गुणवत्ता एवं स्वच्छता मानकों के अनुरूप ही परोसा जाएगा. प्रदेश के 14,384 हजार सरकारी स्कूलों में अब तक 372 अतिथि भोज आयोजित किए जा चुके हैं. समय के साथ इस पहल को समाज का व्यापक समर्थन मिल रहा है. कई अभिभावक, पूर्व विद्यार्थी, समाजसेवी और विभिन्न सामाजिक संगठन बच्चों को केवल पौष्टिक भोजन ही नहीं करा रहे, बल्कि कॉपियां, किताबें, पेंसिल, स्कूल बैग और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी भेंट कर रहे हैं. इससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को अतिरिक्त सहायता मिल रही है और शिक्षा के प्रति उनका उत्साह भी बढ़ रहा है.
मिड डे मील की बचत
अतिथि भोज वाले दिन मिड डे मील के लिए निर्धारित खाद्य सामग्री और खर्च की भी बचत होती है, जिसका उपयोग नियमानुसार आगे की व्यवस्थाओं में किया जा सकता है. शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक बीआर शर्मा का कहना है कि यह पहल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, ये सरकारी स्कूलों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने, स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और विद्यार्थियों में अपनापन, सम्मान और उत्साह का वातावरण तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है. उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में यह पहल शिक्षा और समाज के बीच साझेदारी का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभर रही है, जहां खुशियों का असली अर्थ दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने से जुड़ रहा है.
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