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हिमाचल में स्कूली बच्चे जांच रहे पानी, 2,662 विद्यालयों में समग्र शिक्षा ने उपलब्ध करवाईं वाटर टेस्टिंग किट

पानी की गुणवत्ता, जल संरक्षण और जलवायु संरक्षण के प्रति जागरूक हो रहे स्कूली बच्चे. वाटर टेस्टिंग की पहल सेविज्ञान की पढ़ाई बनी ‘हैंड्स-ऑन लर्निंग'.

हिमाचल में स्कूली बच्चे कर रहे पानी गुणवत्ता की जांच
हिमाचल में स्कूली बच्चे कर रहे पानी गुणवत्ता की जांच (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 24, 2026 at 9:19 PM IST

4 Min Read
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शिमला: हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में छात्रों की पढ़ाई अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रह गई है, यह सामाजिक सरोकारों, जलवायु एवं जल संरक्षण जैसी गतिविधियों से भी जुड़ रही है. इसी दिशा में हिमाचल के स्कूलों में स्थानीय जल स्रोतों के पानी की गुणवत्ता जांचने की एक बड़ी पहल शुरू की गई है. प्रदेश के 2,662 स्कूलों में बच्चे साल में तीन बार स्थानीय जल स्रोतों के पानी की जांच कर रहे हैं. जांच के परिणाम जल शक्ति विभाग और संबंधित उपमंडल दंडाधिकारी के साथ साझा किए जा रहे हैं और जहां आवश्यकता हो, वहां उचित कदम भी उठाए जा रहे हैं.

यह पहल समग्र शिक्षा द्वारा शुरू किए गए ‘जल एवं जलवायु संरक्षण अभियान’ के तहत चलाई जा रही है. इस अभियान का मकसद विद्यार्थियों में पानी की गुणवत्ता, जल संरक्षण और जलवायु संरक्षण के प्रति जागरूकता के साथ-साथ जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है. समग्र शिक्षा, हिमाचल प्रदेश ने 2,662 स्कूलों को फील्ड टेस्ट किट (FTK) उपलब्ध करवाई हैं और प्रत्येक स्कूल से एक शिक्षक को पेयजल की गुणवत्ता तथा फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल परीक्षण का प्रशिक्षण भी दिया गया है.

समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा के नेतृत्व में शुरू हुए इस अभियान के प्रशिक्षण और किट वितरण कार्यक्रम के लिए समग्र शिक्षा, एचपीएसईएस (HPSES) और स्टेट वाटर एंड सैनिटेशन मिशन, जल शक्ति विभाग के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) किया गया. यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अनुभव आधारित और व्यावहारिक शिक्षा की भावना के अनुरूप है. ये विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा, "जल एवं जलवायु संरक्षण अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल जल की गुणवत्ता जांचने की तकनीक से ही नहीं जोड़ा जा रहा, बल्कि उनमें जल संरक्षण, पर्यावरण और जलवायु के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित की जा रही है. फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से बच्चे स्वयं पानी की गुणवत्ता की जांच कर विज्ञान को वास्तविक जीवन से जोड़कर समझ रहे हैं".

पहल से विज्ञान की पढ़ाई बनी ‘हैंड्स-ऑन’ लर्निंग

स्कूली बच्चों द्वारा जल परीक्षण की यह गतिविधि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की अनुभव आधारित और कौशल-केंद्रित शिक्षा की भावना के अनुरूप है. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय हैंड्स-ऑन लर्निंग, व्यावहारिक कौशल, व्यावसायिक शिक्षा और समुदाय से जुड़ी विज्ञान शिक्षा पर जोर दिया गया है. इस पहल के माध्यम से बच्चे जल की गुणवत्ता की जांच करते हुए वैज्ञानिक अवधारणाओं को वास्तविक जीवन से जोड़कर समझ रहे हैं. वे केवल पानी की गुणवत्ता के बारे में पढ़ ही नहीं रहे, बल्कि स्वयं परीक्षण कर वैज्ञानिक तरीके से परिणामों को समझने और पर्यावरण से जुड़ी वास्तविक समस्याओं पर विचार करने का व्यावहारिक अनुभव भी हासिल कर रहे हैं.

जल स्रोतों के संरक्षण में विद्यार्थियों की भागीदारी

यही नहीं, स्कूली बच्चों और शिक्षकों के स्वयंसेवी समूह स्थानीय जल स्रोतों के अध्ययन, संरक्षण और उनके संवर्धन के लिए भी कार्य कर रहे हैं. पर्यावरण से जुड़े संगठनों के सहयोग से इन गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा रहा है. इसके साथ ही स्कूलों में वर्ष में दो बार ‘जल उत्सव’ आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें पंचायती राज संस्थाओं, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों की भी सक्रिय भागीदारी हो रही है.

जल संरक्षण पर पोस्टर मेकिंग, निबंध लेखन और वाद-विवाद जैसी गतिविधियों के माध्यम से भी विद्यार्थियों को अभियान से जोड़ा जा रहा है. इस तरह ‘जल एवं जलवायु संरक्षण अभियान’ विद्यार्थियों को वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक सीख से जोड़ने के साथ-साथ जल, पर्यावरण और जलवायु संरक्षण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित कर रहा है.

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