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दो बूंद जिंदगी की! बुलडोजर पर नाला पार कर ग्रामीण इलाकों में पहुंची टीम, उफनते नाले भी नहीं रोक पाए पल्स पोलियो अभियान

हिमाचल के लाहौल घाटी में स्वास्थ्य कार्यकर्ता बुलडोजर पर नाला पार कर ग्रामीण इलाकों में पहुंचीं और बच्चों को पल्स पोलियो ड्रॉप्स पिलाई गई.

Lahaul Spiti Pulse Polio Campaign
बुलडोजर पर नाला पर कर ग्रामीण इलाकों में पहुंचीं स्वास्थ्य कार्यकर्ता (@JaswantThakur)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : June 29, 2026 at 12:45 PM IST

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लाहौल स्पीति: देश भर में जहां बीते दिनों पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान चलाया गया. वहीं, हिमाचल प्रदेश के लाखों बच्चों को भी पल्स पोलियो की दो बूंद पिलाई गई. जब सवाल दे बूंद जिंदगी की आई तो जनजातीय जिला लाहौल स्पीति में उफनते नाले भी इस अभियान को नहीं रोक पाए. लाहौल घाटी में इन दिनों नदी नाले उफान पर हैं तो वहीं स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी बुलडोजर पर नाला पार कर ग्रामीण इलाकों में पहुंचीं और बच्चों को पल्स पोलियो ड्रॉप्स पिलाई गई.

बुलडोजर पर नाला पर कर ग्रामीण इलाकों में पहुंचीं स्वास्थ्य कार्यकर्ता

राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान के तहत लाहौल घाटी के टिंगराट बूथ पर तैनात स्वास्थ्य कार्यकर्ता पलजोम बुट्टी ने विषम परिस्थितियों में भी कर्तव्यनिष्ठा और साहस का परिचय दिया. उन्होंने उफनते मयाड़ नाले को बुलडोजर की सहायता से पार कर बच्चों तक पोलियो की खुराक पहुंचाई. उनके इस समर्पण की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है. रविवार को मयाड़ नाले का जलस्तर बढ़ जाने से आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई थी. ऐसे में नाला पार करने का कोई सुरक्षित साधन उपलब्ध नहीं था. इसके बावजूद पलजोम बुट्टी ने बुलडोजर की मदद से नाला पार कर निर्धारित क्षेत्र तक पहुंचने का निर्णय लिया. ताकि राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान प्रभावित न हो.

Lahaul Spiti Pulse Polio Campaign
बुलडोजर पर नाला पर कर ग्रामीण इलाकों में पहुंचीं स्वास्थ्य कार्यकर्ता (@JaswantThakur)

कठिन परिस्थितियों में बच्चों को पिलाई गई पोलियो की दवा

कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने समय पर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाकर अभियान को सफल बनाया. वही, स्थानीय लोगों ने उनके जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि दुर्गम और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मियों का ऐसा समर्पण प्रेरणादायी है.

वहीं, लाहौल स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने कहा कि, "ऐसे कर्मठ और समर्पित स्वास्थ्य कार्यकर्ता समाज के लिए प्रेरणा हैं, जो प्राकृतिक चुनौतियों के बीच भी पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं."

पोलियो क्या है और क्यों है खतरनाक?

पीडियाट्रिशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) डॉ. अंकुर धीमान के अनुसार, पोलियो एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से दूषित पानी और भोजन के जरिए फैलती है. यह वायरस सीधे शरीर के तंत्रिका तंत्र/नर्वस सिस्टम पर हमला करता है. गंभीर मामलों में यह बच्चे को हमेशा के लिए अपंग/लकवाग्रस्त बना सकता है. सबसे बड़ी बात यह है कि पोलियो का कोई इलाज नहीं है, टीकाकरण ही इससे बचने का एकमात्र रास्ता है. जन्म से लेकर 5 वर्ष तक की आयु के बच्चों को, चाहे उन्हें पहले भी दवा क्यों न पिलाई गई हो, उन्हें पोलियो की दवा जरूर पिलाएं.

पोलियो के लक्षण

  • तेज बुखार और सिरदर्द.
  • उल्टी, दस्त और गले में खराश आना.
  • गर्दन और पीठ में असामान्य अकड़न महसूस होना.
  • हाथ और पैरों में कमजोरी महसूस होना.
  • गंभीर स्थिति में शरीर के किसी हिस्से का अचानक सुन्न होना या लकवा मारना.
  • कई बार बच्चों में कोई बाहरी लक्षण नहीं दिखते, लेकिन वे वायरस संक्रमित हो सकते हैं, जो अन्य बच्चों के लिए भी खतरा पैदा कर सकते हैं.

पोलियो ड्रॉप ही पोलियो से बचाव के एकमात्र रास्ता

डीडीयू अस्पताल के पीडियाट्रिशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) डॉ. अंकुर धीमान का कहना है कि, "पोलियो से बचाव का एकमात्र जरिया प्रिवेंशन (रोकथाम) ही है. अभिभावक बिल्कुल भी यह न सोचें कि बच्चा पहले ड्रॉप्स ले चुका है तो अब जरूरत नहीं है. हर राउंड में दवा पिलाने बच्चे की इम्यूनिटी और मजबूत होती है. अगर बच्चे को मामूली सर्दी, खांसी या दस्त है, तब भी पोलियो की दवा पूरी तरह सुरक्षित है. इसलिए बच्चों को पोलियों की दवा पिलाई जानी चाहिए."

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