आपदा प्रबंधन में हिमाचल बना मिसाल, BRICS देशों के सामने रखा अत्याधुनिक GIS मॉडल
आपदा चुनौतियों से निपटने के लिए हिमाचल ने विकसित की GIS आधारित निर्णय सहायता प्रणाली, आपदा प्रबंधन के लिए तैयार किया डेटाबेस.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : June 3, 2026 at 8:08 PM IST
शिमला: हिमाचल ने पुरी, ओडिशा में आयोजित द्वितीय BRICS तकनीकी बैठक (आपदा जोखिम न्यूनीकरण) में अपने GIS आधारित शहरी आपदा प्रबंधन एवं लचीलापन (Urban Resilience) प्लेटफॉर्म का प्रस्तुतीकरण किया. इस बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात सहित BRICS देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. इस अवसर पर आपदा प्रबंधन के विशेष सचिव डॉ. पुष्पेन्द्र राणा कहा कि शहर केवल इमारतों का समूह नहीं होते, बल्कि लोग, बुनियादी ढांचा, सेवाएं और संस्थाएं मिलकर एक संपूर्ण व्यवस्था बनाते हैं. किसी भी आपदा के दौरान इन सभी पर एक साथ प्रभाव पड़ता है, इसलिए समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध होना अत्यंत महत्वपूर्ण है.
आपदा प्रबंधन के लिए डेटाबेस तैयार
डॉ. पुष्पेंद्र राणा ने बताया कि आपदा के समय प्रभावित लोगों की पहचान करना, लापता व्यक्तियों का पता लगाना, क्षतिग्रस्त सेवाओं एवं बुनियादी ढांचे का आकलन करना और राहत एवं पुनर्वास कार्यों की योजना बनाना बड़ी चुनौती होती है. इन चुनौतियों से निपटने के लिए हिमाचल ने GIS आधारित निर्णय सहायता प्रणाली (Decision Support System) विकसित की है, जिसमें ड्रोन सर्वेक्षण, फील्ड सर्वेक्षण और भू-स्थानिक (Geospatial) तकनीकों का उपयोग किया गया है. इस पहल के तहत राज्य के 16 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में 15 हजार से ज्यादा संपत्तियों का डिजिटल मैपिंग किया गया है, जिससे आपदा प्रबंधन के लिए एक व्यापक डेटाबेस तैयार हुआ है.
रियल टाइम में जानकारी उपलब्ध कराने में सहायक
यह प्लेटफॉर्म आपदा के प्रभाव का त्वरित आकलन करने, प्रभावित परिवारों और बाधित सेवाओं की पहचान करने, नुकसान का विश्लेषण करने और फैसला लेने वाले अधिकारियों को रियल टाइम में जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने में सहायता करता है. इसके साथ ही, यह भू-स्थानिक डाटाबेस भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के उपयोग को भी बढ़ावा देगा, जिससे जोखिम का पूर्वानुमान, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और बेहतर शहरी योजना तैयार करने में मदद मिलेगी. यह पहल आधुनिक तकनीक और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली के जरिए हिमाचल को अधिक सुरक्षित, आपदा-सक्षम और जलवायु अनुकूल शहरों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

