मुश्किल घड़ी में हम सरकार के साथ, ...लेकिन कर्मचारियों के ड्यूज नहीं रुकने देंगे: राजेंद्र सिंह मियां
हिमाचल प्रदेश सचिवालय सेवा कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा वित्तीय संकट की घड़ी में कर्मचारी सरकार के साथ खड़े हैं.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 10, 2026 at 8:55 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में राज्य फाइनेंस कमिशन की ओर से आरडीजी (RDG) को बंद करने की सिफारिश के बाद सरकारी कर्मचारियों और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. राज्य की डगमगाती आर्थिक स्थिति के बीच इस सिफारिश ने कर्मचारियों के भविष्य, वेतन और अन्य ड्यूज को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं. इसी बीच हिमाचल प्रदेश सचिवालय सेवा कर्मचारी संघ ने शिमला के सचिवालय परिसर में जरनल हाउस कर स्पष्ट किया है कि मौजूदा वित्तीय संकट की घड़ी में कर्मचारी सरकार के साथ खड़े हैं, लेकिन साथ ही यह भी दो टूक कहा है कि कर्मचारियों के ड्यूज को रोका जाना स्वीकार्य नहीं होगा.
सरकार को देंगे कुछ समय
हिमाचल प्रदेश सचिवालय सेवाएं कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह मियां ने शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि, "हमलोग इस मुश्किल की घड़ी में सरकार के साथ है. लेकिन, अगर कटौती की बात की जा रही है तो यह उच्च स्तर से शुरू किया जाना चाहिए. कर्मचारी बहुत ही मेहनतकश होते हैं. ऐसे में कर्मचारियों के जो ड्यूज हैं, उनको हम बिल्कुल नहीं रुकने देंगे. इसके लिए हम कि सरकार को कुछ समय देंगे. सरकार हमारी है और हम सरकार के कर्मचारी हैं. इसलिए तालमेल के साथ हम आगे बढ़ेंगे."
मुख्यमंत्री से बात करने की तैयारी में कर्मचारी संघ
कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह मियां ने कहा कि, कर्मचारियों के बहुत से मुद्दे हैं. नया पे कमीशन आया है. पुराने ड्यूज की देनदारी अभी सरकार के ऊपर है, लेकिन आर्थिक स्थिति सरकार की ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि, अगर रात है तो सवेरा जरूर होगा. अगर रात है तो दिन भी जरूर होगा. अगर दुख है तो सुख भी जरूर आएगा. इसी उम्मीद के साथ हम कर्मचारी आगे बढ़ेंगे. उन्होंने कहा कि, जो कर्मचारियों के मुद्दे और ड्यूज हैं. उसे आने वाले समय में मुख्यमंत्री से बात होगी. इसको लेकर हम एक पॉजिटिव वे में आगे बढ़ेंगे.

क्यों खत्म की आरडीजी?
हिमाचल की राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले हिमाचल उत्थान मंच के कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण कुमार शर्मा कहते हैं, "राजस्व घाटा अनुदान केंद्र सरकार की संवैधानिक प्रतिबद्धता नहीं है और न ही ये प्रदेश सरकार का हक है. ये क्रमिक रूप से कम होने वाला अनुदान है. राज्य सरकारें खुद राजस्व घाटे को कम नहीं कर पा रही हैं. यही कारण है कि RDG खत्म करनी पड़ी है. देश के कुछ ही राज्यों को ये अनुदान मिल रहा था."
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