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सरकार को हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति की चेतावनी, इस फैसले का जता रहे विरोध

हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया है.

Himachal Pensioners Demand Condemn Govt Decisions
हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति की चेतावनी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : January 5, 2026 at 5:35 PM IST

3 Min Read
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शिमला: हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार के फैसलों को लेकर विरोध जताया है. प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के चेयरमैन एवं सदस्यों की पेंशन में अभूतपूर्व वृद्धि किए जाने संबंधी अधिसूचना जारी करने पर, राजस्व विभाग में सेवानिवृत पटवारियों, कानूनगो, नायब तहसीलदार और तहसीलदारों को फिर से विभाग में नियुक्त करने के फैसले और मंत्रियों को तीन नई महंगी गाड़ियां खरीदने के फैसले का विरोध किया है.

हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने बोला सरकार का खिलाफ हल्ला

हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के चेयरमैन सुरेश ठाकुर ने कहा कि, "सरकार द्वारा आयोग के चेयरमैन एवं सदस्यों की मासिक पेंशन को 800 व 7,500 से बढ़ाकर 48,000 और 45,000 करने और मूल पेंशन में 6 फीसदी वार्षिक वृद्धि का निर्णय लिया गया है, जो दुर्भाग्यपूर्ण और पक्षपातपूर्ण है. एक ओर सरकार वित्तीय संकट का बहाना बनाकर प्रदेश के लाखों पेंशनरों की वैधानिक वित्तीय देनदारियों के भुगतान से बच रही है. वहीं, दूसरी ओर अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए मनमाने फैसले लिए जा रहे हैं. प्रदेश में तथाकथित वित्तीय 'डिजास्टर/लॉकडाउन' की स्थिति के बावजूद ऐसे निर्णय लेना आमजन और जरूरतमंद पेंशनरों के अधिकारों का खुला उल्लंघन है."

'सरकार जनता के साथ कर रही मजाक'

सुरेश ठाकुर ने कहा कि, इससे पूर्व भी सरकार ने विभिन्न विभागों, निगमों और बोर्डों में बड़ी संख्या में चेयरमैन, वाइस चेयरमैन एवं सदस्यों की नियुक्ति कर, उनमें से अनेक को कैबिनेट रैंक प्रदान कर, प्रदेश के खजाने पर भारी वित्तीय बोझ डाला है. इसके अलावा विधायकों, मंत्रियों, अध्यक्षों, उपाध्यक्षों एवं मुख्यमंत्री के वेतन-भत्तों में लगभग 40 फीसदी मासिक वृद्धि की अधिसूचना भी जारी की गई है, जो प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर और अधिक दबाव डालेगी. हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने कड़े शब्दों में सरकार की निंदा की है.

पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति की ये मुख्य मांगें

  • 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट, कम्यूटेशन एवं संशोधित पेंशन की अदायगी.
  • 13 फीसदी महंगाई भत्ता और 46 माह के महंगाई भत्ते के एरियर का भुगतान.
  • हिमाचल पथ परिवहन निगम के पेंशनरों को दिसंबर माह की पेंशन का तत्काल भुगतान एवं पेंशन का स्थायी समाधान.
  • शहरी निकायों के पेंशनरों को 1 जनवरी 2006 के स्थान पर 1 जनवरी 2016 वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर पेंशन.
  • कॉरपोरेट सेक्टर एवं फॉरेस्ट कॉरपोरेशन कर्मचारियों को 1999 की अधिसूचना के अनुसार 2004 से पेंशन तथा उक्त अधिसूचना का पुनः क्रियान्वयन.
  • बिजली बोर्ड कर्मचारियों को ओपीएस का लाभ एवं पेंशन बकाया का भुगतान.
  • चिकित्सा बिलों के भुगतान के लिए तत्काल ₹15 करोड़ की राशि जारी करना.
  • पुलिस पेंशनरों के बच्चों हेतु पुलिस विभाग में नौकरी का कोटा तथा पूर्व सैनिकों की भांति कैंटीन सुविधा.
  • हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड को प्रिंटिंग आदि मदों के 70 करोड़ का भुगतान.
  • हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पेंशनरों को प्रत्येक माह की पहली तारीख को पेंशन का भुगतान हाे.

सरकार को चेतावनी

सरकार ने सलाहकारों और मुख्य सलाहकारों की नियुक्तियां कर भी अपनी मित्र-मंडली को लाभ पहुंचाने का कार्य किया है. उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए चेतावनी दी कि सरकार सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ डालकर चहेतों को खुश करने की नीति जल्द बंद करे और पेंशनरों एवं कर्मचारियों की करोड़ों रुपए लंबित देनदारियों के भुगतान के लिए तत्काल अधिसूचनाएं जारी करे.

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