सुक्खू सरकार ने किया 100 करोड़ रुपए तक की कमाई का इंतजाम, हिमाचल में ढाई दशक बाद शुरू होगी लॉटरी, CM की हरी झंडी के बाद टेंडर आमंत्रित
राज्यपाल की मंजूरी के बाद अब लॉटरी निदेशालय ने इसके लिए ई-टेंडर के जरिए निविदाएं आमंत्रित की हैं. शिमला से रजनीश शर्मा की रिपोर्ट

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 20, 2026 at 8:57 PM IST
शिमला: आर्थिक संकट से घिरी हिमाचल सरकार राजस्व बढ़ाने के उपायों पर काम कर रही है. इसी कड़ी में कुछ समय पहले सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने हिमाचल में लॉटरी को फिर से आरंभ करने का फैसला लिया था. नियम अधिसूचित होने और राज्यपाल की मंजूरी के बाद अब वित्त विभाग के तहत आने वाले लॉटरी निदेशालय ने इसके लिए ई-टेंडर के जरिए निविदाएं आमंत्रित की हैं. राष्ट्रीय स्तर पर ई-टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब राज्य में इसी साल लॉटरी के आरंभ होने की उम्मीद है. हिमाचल सरकार ने लॉटरी के माध्यम से सालाना अधिकतम सौ करोड़ रुपए की आय जुटाने का अनुमान लगाया है. पड़ौसी राज्य पंजाब में लॉटरी से आम आदमी पार्टी की सरकार साल में 225 करोड़ रुपए राजस्व अर्जित करती है. वहीं, केरल में लॉटरी का कारोबार सबसे अधिक है. अब हिमाचल में भी ये आरंभ होने वाली है.
साल में 12 ड्रॉ और तीन बंपर ड्रॉ
लॉटरी सिस्टम आरंभ करने के लिए राज्य सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं. उन नियमों की झलक ई-टेंडर की शर्तों में दिख रही है. लॉटरी ऑनलाइन भी होगी और पारंपरिक रूप से पेपर टिकट वाली भी. प्रदेश में हर रोज अधिकतम लॉटरी के 12 ड्रा आयोजित किए जाएंगे. इसके अलावा साल भर में सिर्फ तीन बंपर ड्रॉ होंगे. जिस दिन नेशनल होलीडे होंगे, उस दिन कोई ड्रॉ नहीं होगा. राज्य सरकार के निदेशक लॉटरी की तरफ से हर बार लॉटरी का ड्रॉ आयोजित करने का समय, इनाम आदि का ढांचा, टिकट की अधिकतम बिक्री निर्धारित की जाएगी. लॉटरी के टिकट सरकारी अधिनियम व नियमों के अनुसार छापे जाएंगे. उनमें हिमाचल सरकार का लोगो, निदेशक लॉटरीज के डिजिटल साइन, ड्रॉ की डेट व समय, टिकट का एमआरपी आदि अंकित होगा.
बोली में शामिल होने वाले को टेंडर के शुल्क के तौर पर पांच लाख रुपए की रकम ऑनलाइन जमा करवानी होगी. ये रिफंडेबल नहीं होगी. टेंडर में चयन प्रक्रिया ऑनलाइन मोड में तकनीकी बोली व वित्तीय बोली दो भागों में होगी. हर बोली के साथ दो करोड़ रुपए की बयाना राशि देने होगी. इसके अलावा पांच करोड़ रुपए का टेंडर शुल्क ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के माध्यम से जमा करना होगा. जो भी बिक्री एजेंट बोली में सफल होगा, उसे लाइसेंस के बदले में दस करोड़ रुपए सालाना लाइसेंस फीस देनी होगी. इस फीस में हर साल पांच फीसदी बढ़ोतरी होगी. सालाना लाइसेंस शुल्क के अलावा बिक्री एजेंट को न्यूनतम गारंटी राशि छह करोड़ रुपए के अधीन रहते हुए सरकार की तरफ से मंजूर रेवेन्यू शेयर प्रतिशतता का भुगतान भी करना होगा. यदि राजस्व शेयर छह करोड़ रुपए से अधिक बनता हो तो शेष अतिरिक्त राशि देय होगी. जो भी बोलीदाता सिलेक्ट होगा, उसे एक एसपीवी यानी स्पेशल पर्पज व्हीकल स्थापित करना होगा. लॉटरीसे जुड़े सभी खर्च, रेवेन्यू आदि का हिसाब इसी एसपीवी से होगा.

बोलीदाता को निदेशक लॉटरीज हिमाचल सरकार के पक्ष में 30 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी या एफडी सिक्योरिटी डिपॉजिट के तौर पर जमा करनी होगी. लॉटरी के पहले ही साल में 10 करोड़ की लाइसेंस फीस व 30 करोड़ की सिक्योरिटी डिपॉजिट एडवांस में जमा करनी होगी. भुगतान में देरी पर बोलीदाता पर 12 फीसदी दंडात्मक ब्याज लगेगा. प्री-बिड सम्मेलन 29 अगस्त को शिमला में आयोजित होगा. ऑनलाइन बोली जमा करने की तारीख 14 सितंबर होगी. तकनीकी बोली यानी टेक्नीकल बिड खोलने का समय 15 सितंबर है. वित्तीय बोली खुलने के 30 दिन में एलओए यानी लैटर ऑफ एवार्ड जारी किया जाएगा. राज्य सरकार मानती है कि पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए कड़ी शर्तें जरूरी है. ऐसे में बोली में भाग लेने वाली इच्छुक एजेंसियों के पास अपनी नेट वर्थ यानी शुद्ध संपत्ति 50 करोड़ रुपए होनी चाहिए. इस कड़ी शर्त के कारण केवल मजबूत आर्थिक आधार वाली एजेंसी ही टेंडर प्रक्रिया में भाग ले सकेगी. इसके अलावा लॉटरी संचालन के लिए इच्छुक कंपनी के पास दो साल तक किसी भी राज्य में लॉटरी चलाने का अनुभव जरूरी किया गया है. इससे नौसिखिया खिलाड़ी टेंडर प्रक्रिया से ऑटोमेटिकली बाहर रहेगा.
राज्य सरकार ने पहले अधिसूचित किए हैं नियम
पुरस्कार राशि के भुगतान संबंधी नियम भी निर्धारित किए गए हैं. विजेता को दावा प्रपत्र, मूल विजेता टिकट, फोटो, शपथ पत्र, पहचान पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे. सभी वैध पुरस्कारों का भुगतान सरकार करेगी. यदि कोई पुरस्कार निर्धारित समय सीमा में दावा नहीं किया जाता, तो वह राशि बिना दावे वाली पुरस्कार राशि मानी जाएगी और उसका निपटारा नियमों के अनुसार किया जाएगा.
नियमों में शिकायतों और विवादों के समाधान की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है. शिकायत के साथ शपथ पत्र, पहचान दस्तावेज और पर्याप्त साक्ष्य देना अनिवार्य होगा. झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत पाए जाने पर शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई और खर्च की वसूली की जा सकेगी. किसी भी कानूनी विवाद में निदेशक सरकार की ओर से पक्ष रख सकेंगे तथा ऐसे मामलों का क्षेत्राधिकार शिमला की अदालतों को होगा. हिमाचल प्रदेश राज्य लॉटरी (विनियमन) नियम, 2026 का उद्देश्य लॉटरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है. नए नियम में लॉटरी के टिकट का मूल्य दो रुपये से कम नहीं होगा.
हिमाचल में लॉटरी का इतिहास
हिमाचल प्रदेश में वर्ष 1996 में सिंगल डिजिट लॉटरी पर हाईकोर्ट ने प्रतिबंध लगाया था. बाद में वर्ष 1999 में प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली सरकार ने इसे पूरी तरह से बंद किया था. वर्ष 2004 में वीरभद्र सिंह सरकार के समय ये फिर से शुरू हुई, लेकिन कुछ ही समय में इसे फिर से बंद कर दिया गया. अब सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार फिर से इसे शुरू कर रही है.

लॉटरी सिस्टम के पक्ष और विपक्ष में कई तर्क हैं. लेकिन ये तय है कि लॉटरी की तरफ श्रमिक वर्ग बहुत अधिक आकर्षित होता है. सामाजिक मुद्दों पर दो दशक से अधिक समय से सक्रिय जीयानंद शर्मा का कहना है कि ये एक तरह से जुआ ही कहा जाएगा. इसमें गरीब व्यक्ति अपनी दिन भर की कमाई को उड़ा देता है.
सामाजिक मुद्दों पर लेखन करने वाले डॉ. रमेश चंद का कहना है कि लॉटरी से मिले धन की कोई खास उपयोगिता नहीं हो सकती. श्रमिक वर्ग दिन भर की हाड़ तोड़ मेहनत के बाद लॉटरी में सारी कमाई लगा देगा. वहीं, युवा चिंतक पंकज कुमार का कहना है कि लॉटरी सिस्टम से श्रम के संस्कार प्रभावित होंगे. लोग बिना कुछ किए धरे महज कुछ रुपये के लॉटरी टिकट से अमीर होने के सपने देखेंगे.
भाजपा नेताओं में भी लॉटरी सिस्टम शुरू करने के खिलाफ बयान दिए हैं. नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सहित अन्य नेताओं व पार्टी प्रवक्ता राकेश जम्वाल भी लॉटरी का विरोध कर चुके हैं. सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि राज्य सरकार ने पूरी तरह से पारदर्शी व्यवस्था बनाई है. लॉटरी के नियम कड़े किए गए हैं. राज्यपाल की मंजूरी के बाद अब वित्त विभाग के तहत आने वाले लॉटरी निदेशालय ने इसके लिए ई-टेंडर के जरिए निविदाएं आमंत्रित की हैं.
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