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वन विभाग के अफसरों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 1990 बैच के अधिकारियों से जुड़ा है मामला

अदालत ने एचएएस और वन सेवा अधिकारियों के बीच वेतनमान को लेकर किए गए भेदभाव को अनुचित ठहराया.

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : September 1, 2026 at 8:08 AM IST

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शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के वन सेवा अधिकारियों (हिमाचल वन सेवा अधिकारियों) को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने अफसरों को बड़ी राहत प्रदान की है. हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज ने मीरा शर्मा एवं अन्य की तरफ से दाखिल की गई याचिका को मंजूर करते हुए राज्य सरकार के एक आदेश को रद्द कर दिया है.

राज्य सरकार के उस आदेश में वन विभाग के अफसरों को पूर्व की तिथि से वित्तीय लाभ देने से इनकार किया गया था. अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं को 27 अगस्त 2009 से नोशनल आधार पर और 1 सितंबर 2013 से वास्तविक आधार पर 4-टियर वेतनमान का लाभ दिया जाए. मामले के अनुसार याचिकाकर्ता वर्ष 1990 बैच के हिमाचल प्रदेश वन सेवा के अधिकारी हैं। राज्य सरकार ने 2012 में हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा सहित आठ श्रेणियों के लिए 27 अगस्त 2009 से नेशनल आधार पर 4-टियर पे-स्ट्रक्चर बहाल किया था. इसमें राज्य सरकार ने वन सेवा को छोड़ दिया था.

बाद में अगस्त 2013 में वन सेवा के लिए भी यह वेतनमान लागू किया गया, लेकिन इसे 1 सितंबर 2013 से प्रभावी बनाया गया. हाईकोर्ट ने पाया कि दोनों सेवाओं के अधिकारियों के बीच ऐसा भेदभाव उचित नहीं है. वहीं, राज्य सरकार ने दलील दी थी कि दोनों सेवाओं के विभाग, जिम्मेदारियां और काम करने के क्षेत्र पूरी तरह अलग हैं, इसलिए समानता का दावा नहीं किया जा सकता. हालांकि, हाईकोर्ट ने सरकार के ही पुराने रिकॉर्ड और अधिसूचनाओं को देखते हुए इस दलील को खारिज कर दिया, जिनमें वन सेवा के अधिकारियों को उन पदों पर तैनात किया गया था जहां आमतौर पर एचएएस अधिकारी तैनात होते हैं. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश जारी होने के तीन महीनों के भीतर वेतन विसंगति के कारण बनने वाले सभी बकाया लाभ जारी करने के निर्देश दिए हैं. यदि सरकार तय समय में इस राशि का भुगतान नहीं करती है, तो उसे इस पर छह प्रतिशत सालाना दर से ब्याज भी देना होगा.

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