हिमाचल में किसने बढ़ाया चेयरमैन का मानदेय? विधानसभा में मानदेय बढ़ाने पर तीखी नोंकझोंक, सीएम ने कही ये बात
हिमाचल विधानसभा बजट सत्र के दौरान चेयरमैन का मानदेय बढ़ाने के मुद्दे को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच हुई नोंकझोंक.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 17, 2026 at 9:23 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नियम 102 के तहत RDG (revenue deficit grant) के संकल्प पर चल रही चर्चा उस समय तीखी नोंकझोंक में बदल गई, जब मुद्दा विभिन्न निगमों और बोर्डों के चेयरमैन के मानदेय तक पहुंच गया. मंगलवार को दोपहर बाद सदन में RDG पर चल रही चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया और सदन का माहौल गर्मा गया.
विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश में आर्थिक संकट के बीच बोर्डों और निगमों के चेयरमैन का मानदेय बढ़ाया जाना सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है. विपक्षी सदस्यों ने इसे “वित्तीय अनुशासन के विपरीत” करार देते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा. इस पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में खड़े होकर स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि जिन निगमों और बोर्डों ने अपना मानदेय बढ़ाया है, उन्होंने यह निर्णय अपनी स्वयं की आय से लिया है. सरकार का इसमें कोई प्रत्यक्ष हस्तक्षेप या भूमिका नहीं है.
सीएम सुक्खू ने दो टूक कहा कि घाटे में चल रहे बोर्डों और निगमों के चेयरमैन का मानदेय आज भी 15 से 20 हजार रुपये के बीच ही है. मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सदन में कुछ देर तक शोर-शराबा भी हुआ. ऐसे में नियम 102 के तहत लाई गई चर्चा का फोकस जहां RDG पर था, वहीं चेयरमैन के मानदेय का मुद्दा भी राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया.
निगम और बोर्ड ऑटोनोमस बॉडी
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा विपक्ष की तरफ उठाए गए सवालों के जवाब में कहा कि निगम और बोर्ड ऑटोनोमस बॉडी है, जो चेयरमैन का मानदेय बोर्ड खुद तय करते हैं. सरकार पर इसका कोई दबाव नहीं है. बोर्ड और निगम अपना रेवेन्यू खुद पैदा करते हैं. हमारे पास तो एक अनुमोदन को भेजते हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि फूड एंड सिविल सप्लाई और फॉरेस्ट कॉरपोरेशन तो अपने कर्मचारियों को 13 फीसदी बकाया DA को देना चाहते थे. उन्होंने कहा कि जो बोर्ड घाटे में हैं, उनके चेयरमैन का मानदेय 15 से 20 हजार है. वहीं, उन्होंने RDG पर चल रही चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष की ओर से रखे गए आंकड़ों को लेकर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि आजकल पूर्व मुख्यमंत्री मैथमेटिक्स बहुत करने लगे हैं. जब वह आंकड़े नहीं लाते हैं तो परसेंटेज पर बात करने लगते हैं.
उन्होंने कहा कि प्रदेश को जब राजस्व घाटा ज्यादा हुआ तब 14 वें और 15 वें वित्त आयोग से अधिक पैसा मिला. सीएम सुक्खू ने कहा कि RDG हमारा हक है. इस लड़ाई में कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी. बता दें कि भाजपा के विधायक विcक्रम ठाकुर ने आर्थिक तंगी होने के बावजूद निगम और बोर्ड के चेयरमैन के मानदेय में 80 हजार की बढ़ोतरी किये जाने का मामला उठाया था. जिसका समर्थन करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने सदन में मानदेय बढ़ाने को लेकर 15 मार्च 2024 की नोटिफिकेशन दिखाते हुए कहा कि चेयरमैन का मानदेय 30 हजार से बढ़ाकर 1.30 लाख किया गया है.
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