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हिमाचल में डाक विभाग कर्मी चढ़ रहे पहाड़! बच्चों का अपडेट हो रहा आधार, छात्रों के बनेंगे 'APAAR'

हिमाचल में डाक विभाग द्वारा दुर्गम इलाकों के स्कूलों में जाकर बच्चों का आधाक अपडेट किया जा रहा है.

Himachal postal department
शिमला डाक विभाग (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : December 30, 2025 at 1:16 PM IST

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शिमला: आज के दौर में अगर आधार कार्ड अपडेट न हो, तो सरकारी योजनाओं से लेकर स्कूल के दाखिले तक सब रुक जाते हैं. हिमाचल प्रदेश के दुर्गम इलाकों में रहने वाले बच्चों और उनके माता-पिता के लिए यह काम किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन भारतीय डाक विभाग ने एक शानदार पहल करते हुए इस मुश्किल को आसान बना दिया है. विभाग ने राज्य के 1200 स्कूलों में विशेष कैंप लगाकर अब तक 50 हजार से ज्यादा बच्चों के आधार कार्ड अपडेट किए हैं. इस मुहिम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब इन बच्चों की 'अपार आईडी' (APAAR ID) बनने का रास्ता भी साफ हो गया है, जो उनके पूरे स्कूल और कॉलेज के रिकॉर्ड को ऑनलाइन सुरक्षित रखेगी.

"स्कूलों तक मशीनें पहुंचाना एक मिशन जैसा था"

शिमला डाक विभाग के कार्यकर्ता संदीप शर्मा बताते हैं कि यह काम सिर्फ ऑफिस में बैठकर नहीं किया जा सकता था. "हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियां कठिन हैं. कई गांव ऐसे हैं जहां से मुख्य शहर आने में ही पूरा दिन निकल जाता है. हमने तय किया कि हम खुद बच्चों के पास जाएंगे. जब हम स्कूल में मशीन लेकर पहुंचते थे, तो बच्चों और शिक्षकों के चेहरे पर एक अलग ही खुशी होती थी. हमें खुशी है कि हम 250 मशीनों के जरिए रोजाना करीब 2000 बच्चों की मदद कर पा रहे हैं." संदीप के मुताबिक, 5 से 15 साल की उम्र में बायोमेट्रिक अपडेट करना बहुत जरूरी होता है, ताकि भविष्य में छात्रवृत्ति (Scholarship) मिलने में कोई दिक्कत न आए.

हिमाचल प्रदेश डाक परिमंडल के मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल संजय सिंह ने बताया, "अक्टूबर में शुरू हुई इस मुहिम ने अब रफ्तार पकड़ ली है. डाक विभाग ने प्रदेश भर में 960 कैंप लगाए हैं. हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश का एक भी बच्चा ऐसा न रहे जिसका आधार अपडेट न हो."

"बच्चों के भविष्य की डिजिटल नींव है आधार"

शिमला डाकघर में आधार काउंटर की जिम्मेदारी संभाल रहीं उर्मिला बताती हैं कि ग्रामीण इलाकों में लोगों को समझाना सबसे बड़ा काम था. बच्चों के आधार अपडेट के साथ उन्हें आपार आईडी के बारे में भी बताया जा रहा है. उर्मिला आगे बताती हैं कि अब मार्कशीट और सर्टिफिकेट खोने का डर खत्म हो जाएगा, क्योंकि अपार आईडी में सब कुछ डिजिटल तौर पर सुरक्षित रहेगा. डाक विभाग द्वारा यह सेवा स्कूलों में निशुल्क दी जा रही है, जिससे गरीब परिवारों का पैसा और समय दोनों बच रहा है.

शिमला डाकघर में आधार काउंटर संभाल रही उर्मिला कहती हैं "मेरे काउंटर पर जब बच्चे आते हैं, तो हम सिर्फ उनका फिंगरप्रिंट या फोटो अपडेट नहीं करते, बल्कि हम उन्हें और उनके माता-पिता को 'अपार आईडी' के फायदों के बारे में भी बताते हैं. कई बार छोटे बच्चों के फिंगरप्रिंट लेने में समय लगता है, लेकिन हम जानते हैं कि यह एक बार का अपडेट बच्चे के कॉलेज तक काम आएगा."

क्या है 'अपार आईडी' ?

  • हिमाचल सरकार ने स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के लिए 'अपार आईडी' को अनिवार्य कर दिया है. इसे आप बच्चों का 'डिजिटल लॉकर' समझ सकते हैं.
  • इसमें बच्चे की मार्कशीट, खेल-कूद के सर्टिफिकेट और अन्य शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही जगह रहेंगे.
  • एक स्कूल से दूसरे स्कूल में जाने पर अब कागजों का ढेर लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी.
  • इसके लिए आधार कार्ड का सही और अपडेट होना पहली शर्त है, जिसे डाक विभाग बखूबी पूरा कर रहा है.

कितने आधार हुए अपडेट ?

हिमाचल में डाक विभाग द्वारा स्कूलों में बच्चों को आधार अपडेट किए जा रहे हैं और उन्हें 'अपार आईडी' को लेकर सारी जानकारी दी जा रही है.

अपडेट हुए आधार50,000 से ज्यादा
स्कूलों की संख्या1200
कितने कैंप लगे 960
काम कर रही मशीनें250
सबसे बड़ा फायदा अपार आईडी (APAAR ID) बनाने में आसानी
फीस स्कूलों में पूरी तरह निशुल्क
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