दिल्ली पुलिस को रोकने पर भड़की भाजपा, दोषियों पर कार्रवाई और CM कार्यालय की स्वतंत्र जांच की उठाई मांग
दिल्ली पुलिस को रोकने से नाराज भाजपा ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन. साथ ही दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 26, 2026 at 7:04 PM IST
शिमला: AI समिट मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर ले जाने पर दिल्ली पुलिस को हिमाचल पुलिस द्वारा रोकने पर भाजपा भड़क गई है. इसको लेकर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा का लोकभवन पहुंच गई और राज्यपाल को ज्ञापन सौंप कर दोषियों पर कार्यवाई करने की मांग की. साथ ही सीएम के कार्यालय की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई. ज्ञापन में कहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय का राजनीतिक इस्तेमाल हुआ है.
सीएम कार्यालय और हिमाचल सदन को अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण देने के रूप में प्रयोग किया गया. भाजपा ने राज्यपाल को बताया कि हिमाचल प्रदेश पुलिस का राजनीतिक हित साधने के लिए इस्तेमाल किया गया है. ज्ञापन में केंद्र सरकार के माध्यम से इस पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग उठायी गई है. इसके अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की भी जांच करने की मांग की गई है.
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा, 'एआई इंपैक्ट समिट में दुनिया भर के 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष पहुंचे थे. अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सुनियोजित रूप से नग्न होकर प्रदर्शन किया. कांग्रेस की सोच देश के खिलाफ तक पहुंच गई है. मामले की जांच दिल्ली पुलिस कर रही थी और आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए अरेस्ट वारंट के साथ हिमाचल आई. रोहड़ू में कांग्रेस नेता के नाम पर कमरा बुक किया गया था और वहीं से आरोपियों को हिरासत में लिया गया'.
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि अरेस्ट वारंट लेकर कार्रवाई करने पहुंची दिल्ली पुलिस को राज्य पुलिस ने डिटेन कर दिया और आरोपियों को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश न कर पाने की कोशिश की गई. उन्होंने कहा कि कुछ पुलिस अधिकारी सरकार के आदेशों का पालन करते हुए कानून के विरुद्ध काम कर रहे हैं. एसीजेएम से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद भी दिल्ली पुलिस को फिर रोका गया.
उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर इतिहास में पहली बार सारे नियमों को तार-तार कर दिया गया. पूरी रात प्रदेश पुलिस केवल दिल्ली पुलिस को रोकने में लगी रही. नैतिकता और नियमों के अनुसार इंटर-स्टेट मामलों में राज्य सरकारों को सहयोग करना पड़ता है. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था और पूरे अमले पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिए है.
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