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अब हादसे नहीं हिमाचल की सड़कों पर 'ई-डार' का डिजिटल वार, डिजिटल डेटा से सीधे कैशलेस इलाज और बीमा भुगतान

हिमाचल पुलिस ने प्रदेश में ई-विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट यानी E-Detailed Accident Report(eDAR) प्रणाली लागू कर दी है.

Himachal Police eDAR System
हिमाचल में ई-डार प्रणावी (ETV Bharat GFX)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 6, 2026 at 4:52 PM IST

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Updated : February 6, 2026 at 5:14 PM IST

4 Min Read
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शिमला: हिमाचल प्रदेश की सड़कों पर अब मौत का खेल यूं ही नहीं चलेगा. हर हादसे का डिजिटल रिकॉर्ड, हर गलती का डेटा-आधारित विश्लेषण और हर लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी. सड़क दुर्घटनाओं में हर साल सैकड़ों जिंदगियां छीनने की त्रासदी को चुनौती देते हुए हिमाचल प्रदेश पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (ई-डार) को पूरे प्रदेश में एक डिजिटल कवच के रूप में लागू कर दिया है.

हिमाचल की सड़कों पर 'ई-डार' का डिजिटल वार

इस डिजिटल कवच का संदेश साफ है कि, अब हादसे नहीं, हिसाब होगा. राज्य में हर वर्ष औसतन 1920 सड़क दुर्घटनाएं और 800 से अधिक मौतें दर्ज की जाती हैं. इन्हीं भयावह आंकड़ों ने पुलिस को पारंपरिक पुलिसिंग से आगे बढ़कर डाटा-ड्रिवन एक्शन अपनाने के लिए मजबूर किया है.

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हिमाचल की सड़कों पर 'ई-डार' का डिजिटल वार (ETV Bharat GFX)

पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, आईपीएस ने सड़क सुरक्षा पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति की घोषणा करते हुए कहा कि, अब पुलिस सिर्फ दुर्घटना दर्ज करने वाली संस्था नहीं रहेगी. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, आधुनिक तकनीक प्रभावी पुलिसिंग की रीढ़ है. ई-डार के जरिए हम केवल हादसों की रिपोर्टिंग नहीं कर रहे, बल्कि उनके कारणों का विश्लेषण कर ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित कर रहे हैं. जवानों की तैनाती वहीं होगी जहां जान जाने का खतरा सबसे ज्यादा है.

हिमाचल प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं और ई-डार

  1. हिमाचल प्रदेश में हर वर्ष औसतन 1920 सड़क दुर्घटनाओं में 800 से अधिक लोगों की मौत.
  2. ई-डार के जरिए केवल हादसों की रिपोर्टिंग नहीं, बल्कि कारणों का विश्लेषण कर चिन्हित किए जा रहे ब्लैक स्पॉट्स.
  3. दुर्घटना स्थल से लेकर न्याय तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना देती है ई-डार प्रणाली.
  4. ई-डार के जरिए डिजिटल डेटा सीधे कैशलेस इलाज
  5. 1.5 लाख तक कैशलेस इलाज का प्रावधान.
  6. आम जनता को तीहरा सुरक्षा कवच देता है ई-डार.
  7. वैसे स्थानों पर होगी जवानों की तैनाती, जहां जान जाने का खतरा सबसे अधिक.

डिजिटल डेटा से सीधे कैशलेस इलाज

लक्ष्य साफ है कि, दुर्घटना होने से पहले ही उसे रोकना. यह पहल सर्वोच्च न्यायालय के एस. राजशेखरन बनाम भारत संघ मामले में दिए गए निर्देशों के अनुरूप है, जिसमें सड़क सुरक्षा को नागरिकों के जीवन के अधिकार से जोड़ते हुए तकनीक आधारित डेटा प्रबंधन पर जोर दिया गया था. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरवीर सिंह राठौर ने बताया कि, "ई-डार प्रणाली दुर्घटना स्थल से लेकर न्याय तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना देती है. ई-डार पारदर्शिता लाता है. डिजिटल डेटा सीधे कैशलेस इलाज, बीमा भुगतान और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ जाता है. इससे पीड़ितों को राहत में देरी खत्म होगी और वर्षों तक चलने वाले मामलों पर ब्रेक लगेगा."

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'ई-डार' प्रणाली की विशेषताएं (ETV Bharat GFX)

शाम 6 से 9 बजे, मौत का सबसे खतरनाक वक्त ट्रैफिक

टूरिस्ट एवं रेलवे विंग के डीआईजी गुरदेव शर्मा, आईपीएस ने खुलासा किया कि वैज्ञानिक विश्लेषण में शाम 6 से 9 बजे का समय सड़क दुर्घटनाओं के लिए सबसे खतरनाक पाया गया है. उन्होंने कहा कि इस अवधि को 'डेंजर विंडो' घोषित किया गया है. इस दौरान दृश्यता कम होती है, थकान बढ़ती है और ट्रैफिक दबाव चरम पर होता है. इसी कारण इस समय राष्ट्रीय राजमार्गों और संवेदनशील मार्गों पर इंटरसेप्टर वाहन, अतिरिक्त गश्ती दल और सख्त निगरानी शुरू कर दी गई है.

आम नागरिक के लिए ई-डार क्यों है जीवनरक्षक?

हिमाचल पुलिस के अनुसार, ई-डार आम जनता को तीहरा सुरक्षा कवच देता है. 1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज का प्रावधान है, जो ई-डार में दर्ज दुर्घटना पर तेज बीमा निपटान मिलेगा, क्योंकि रिकॉर्ड सीधे मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल को भेजे जाएंगे. 'राह-वीर सम्मान', जिसके तहत दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वाले नागरिकों को आर्थिक इनाम और कानूनी सुरक्षा मिलेगी.

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Last Updated : February 6, 2026 at 5:14 PM IST