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हिमाचल में आखिर क्यों हो रहे पैराग्लाइडिंग के हादसे ?

हिमाचल में बीते समय से लगातार पैराग्लाइडिंग के दौरान हादसे हो रहे हैं. ताजा मामले में एक ऑस्ट्रिया पैराग्लाइडर पहाड़ियों पर क्रैश हो गया.

Himachal Paragliding Accident
हिमाचल में पैराग्लाइडिंग हादसा (File Photo)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : November 9, 2025 at 3:05 PM IST

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Updated : November 9, 2025 at 7:18 PM IST

5 Min Read
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कुल्लू: जिला कुल्लू की पर्यटन नगरी मनाली में एक बार फिर पैराग्लाइडिंग हादसा सामने आया है. दरअसल बीती शाम को मनाली की पहाड़ियों में पैराग्लाइडिंग करते हुए एक ऑस्ट्रिया पैराग्लाइडर पायलट एक पहाड़ी पर फंस गया. जिसके बाद रविवार सुबह हेलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया और रेस्क्यू टीम द्वारा सुरक्षित तरीके से ऑस्ट्रिया के पैराग्लाइडर पायलट को रेस्क्यू किया गया. पैराग्लाइडर को अब इलाज के लिए चंडीगढ़ अस्पताल ले जाया गया है.

मनाली से बीड़ बिलिंग जा रहा था पैराग्लाइडर

डीएसपी मनाली केडी शर्मा ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया का रहने वाला फिलिप मनाली की रानीसुई पहाड़ी में शनिवार शाम को पैराग्लाइडर के साथ क्रैश हो गया था. शुक्रवार को कांगड़ा के बीड़ बिलिंग से उड़ान भरने के बाद विदेशी पायलट फिलिप और अन्य पायलट सुरक्षित मनाली पहुंचे थे. बीते कल सुबह मनाली से वापिस कांगड़ा के बीड़ बिलिंग के लिए उड़ान भरी, लेकिन टेक ऑफ के कुछ देर बाद ही ये ऑस्ट्रिया पैराग्लाइडर पायलट हवा के बदलाव के चलते मनाली की समुद्र तल से 3700 मीटर की ऊंची चोटी रानीसुई में क्रैश हो गया और रात भर यहां पर फंसा रहा.

"मनाली की रानीसुई पहाड़ी पर एक ऑस्ट्रिया पैराग्लाइडर की क्रैश हो गया. आज रेस्क्यू टीम के द्वारा पायलट को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है. पैराग्लाइडर को इलाज के लिए चंडीगढ़ ले जाया गया है." - केडी शर्मा, डीएसपी मनाली

एयरलिफ्ट कर चंडीगढ़ पहुंचाया पैराग्लाइडर

ऐसे में बीड़ पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन और मनाली पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन द्वारा रविवार को हेलिकॉप्टर की मदद से 3700 मीटर की ऊंचाई से घायल पायलट को सुरक्षित निकाल लिया गया. वहीं, अब पायलट को एयरलिफ्ट कर चंडीगढ़ ले जाया गया है. इस दुर्घटना में ऑस्ट्रेलिया के रहने वाले फिलिप की पीठ में गंभीर चोटें आई हैं.

Paragliding rules
पैराग्लाइडिंग के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान (ETV Bharat GFX)

बीते माह से अब तक 4 पैराग्लाइडिंग हादसे

बता दें कि अक्टूबर और नवंबर महीने में ये अब तक हिमाचल में पैराग्लाइडिंग का चौथा हादसा है. इससे पहले कांगड़ा जिले में कनाडा की रहने वाली एक पैराग्लाइडर पायलट महिला की पैराग्लाइडिंग हादसे में मौत हो गई थी. कैनेडियन महिला ने सोलो पैराग्लाइडिंग की उड़ान भरी थी कि अचानक पैराग्लाइडर क्रैश हो गया और हादसे में उसकी मौत हो गई. दूसरा मामला जिला कुल्लू की पर्यटन नगरी मनाली के सोलंगनाला का है. मामले में एक रूसी महिला बीड़ बिलिंग से अपने दोस्तों संग उड़ान भर मनाली पहुंची थी. जब महिला ने मनाली से फिर से पैराग्लाइडिंग की उड़ान भरी तो सोलंग गांव के पास महिला का पैराग्लाइडर क्रैश हो गया. स्थानीय लोगों की मदद से जिसे रेस्क्यू किया गया. तीसरा पैराग्लाइडिंग हादसा भी मनाली की पहाड़ियों में ही पेश आया था. मनाली की सेवन सिस्टर पीक रेंज में 13500 फीट ऊंचाई पर एक ऑस्ट्रेलियन पैराग्लाइडर पायलट फंस गया था, जिसने कि मनाली से बीड़ बिलिंग के लिए उड़ान भरी थी. कड़ी मशक्कत के बाद रेस्क्यू टीम ने ऑस्ट्रेलियन पैराग्लाइडर को रेस्क्यू किया था. वहीं, शनिवार शाम को फिर से एक पैराग्लाइडिंग हादसा सामने आया है.

Paragliding rules
पैराग्लाइडिंग के नियम (ETV Bharat GFX)

क्यों हो रहे पैराग्लाइडिंग हादसे?

पैराग्लाइडर पायलट रोशन ठाकुर ने कहा कि सोलो पैराग्लाइडिंग उड़ान सिर्फ प्रशिक्षित पायलट को ही भरनी चाहिए, क्योंकि उन्हें सही जगह पर उतरने का ज्ञान रहता है. हिमाचल प्रदेश में विदेशियों के साथ जो दुर्घटना पेश आती है. उसमें अधिकतर कारण तकनीकी खराबी या फिर मौसम खराब होना ही रहता है. ऐसे में सोलो पैराग्लाइडिंग उड़ान भरने से पहले पायलट को चाहिए कि वह मौसम विभाग के द्वारा जारी की गई सूचना का भी अनुपालन करें.

"सोलो फ्लाइट उड़ान के दौरान भी सैलानियों को काफी सावधानी बरतने की आवश्यकता है. क्योंकि जब पायलट के द्वारा उड़ान भरी जाती है तो कई बार आसमान में मौसम भी खराब हो जाता है. ऐसे में तेज हवा के चलते पैराग्लाइडर पायलट अपनी दिशा भटक सकता है." - रोशन ठाकुर, पैराग्लाइडर पायलट

क्या हैं पैराग्लाइडिंग के नियम ?

पैराग्लाइडिंग के निर्धारित नियमों के मुताबिक 12 साल की उम्र से कम या 30 किलोग्राम से कम वजन वाले बच्चों को पैराग्लाइडिंग करवाने की परमिशन नहीं है. पैराग्लाइडर पायलट पार्टिसिपेंट्स के साथ कोई भी हवाई कलाबाजी नहीं कर सकता है. पैराग्लाइडिंग उपकरणों पर ज्यादा भार या कम भार नहीं डाला जाएगा. प्रत्येक उड़ान से पहले पार्टिसिपेंट्स को पूरी सुरक्षा जानकारी देना जरूरी है. इसके अलावा हृदय रोग, मिर्गी, फेफड़े के रोग, अस्थमा से पीड़ित लोगों और गर्भवती महिलाओं को भी पैराग्लाइडिंग की परमिशन नहीं है. पैराग्लाइडिंग के दौरान इन सभी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है, ताकि पैराग्लाइडिंग के दौरान होने वाले हादसों पर अंकुश लगाया जा सके.

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Last Updated : November 9, 2025 at 7:18 PM IST