हिमाचल में सजा पंचायत का चुनावी रण, नामांकन वापसी के बाद मैदान में इतने प्रत्याशी
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर नामांकन वापसी प्रक्रिया के बाद फाइनल सूची तैयार हो गई है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : May 17, 2026 at 1:04 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव अब पूरी तरह चुनावी मुकाबले में बदल चुके हैं. नामांकन प्रक्रिया, जांच और नाम वापसी की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद प्रदेशभर में कुल 70,224 उम्मीदवार चुनावी मैदान में डटे हुए हैं. इसके साथ ही रिश्तों और सामाजिक प्रभाव का आकलन करने के साथ उम्मीदवारों ने जनसमर्थन जुटाने के लिए चुनावी रण में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.
इतने उम्मीदवारों ने लिए नाम वापस
हिमाचल प्रदेश में पंचायत सदस्य से लेकर जिला परिषद तक 31,182 पदों के लिए कुल 86,725 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे, जिससे शुरुआती दौर में ही चुनाव को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. हालांकि जांच प्रक्रिया के दौरान 793 नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए. आयोग की जांच में इन नामांकन पत्रों के दस्तावेज सही नहीं पाए गए, जिसके चलते उन्हें निरस्त करना पड़ा. इसके बाद नाम वापसी के अंतिम दिन तक 15,708 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए. इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद अब अंतिम रूप से 70,224 प्रत्याशी चुनावी मुकाबले में रह गए हैं.
किस जिले में कितने उम्मीदवार
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों की तस्वीर अब पूरी तरह साफ हो चुकी है. नामांकन वापसी की प्रक्रिया समाप्त होते ही चुनावी मैदान में बचे प्रत्याशियों की अंतिम तस्वीर सामने आ गई है. सबसे ज्यादा चुनावी मुकाबला कांगड़ा जिले में देखने को मिलेगा, जहां प्रत्याशियों की संख्या पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा है. वहीं, जनजातीय क्षेत्र लाहौल-स्पीति में सबसे कम उम्मीदवार मैदान में हैं. आंकड़ों पर नजर डालें तो कांगड़ा जिले में 19,698 नामांकन दाखिल हुए थे, इनमें 250 नामांकन रद्द हुए और 1,805 उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिए, अब यहां 17,643 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा हैं. मंडी जिले में 2,837 उम्मीदवारों ने नाम वापस लिए, जिसके बाद यहां 11,728 उम्मीदवार मैदान में रह गए हैं. चंबा में 1,128 उम्मीदवारों ने नामांकन वापस लिए और अब 7,315 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं.
| हिमाचल पंचायत चुनाव 2026 के लिए उम्मीदवार | ||
| जिला | नाम वापस लिए | चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार |
| कांगड़ा | 1,805 | 17,643 |
| मंडी | 2,837 | 11,728 |
| चंबा | 1,128 | 7,315 |
| शिमला | 2,495 | 6,118 |
| कुल्लू | 1,693 | 4,098 |
| किन्नौर | 369 | 1,034 |
| लाहौल-स्पीति | 65 | 425 |
| सिरमौर | 2,017 | 3,919 |
| बिलासपुर | 558 | 4,145 |
| सोलन | 1,398 | 4,195 |
| हमीरपुर | 484 | 4,849 |
| ऊना | 859 | 4,755 |
| कुल्लू | 15,708 | 70,224 |
शिमला जिले में 2,495 उम्मीदवारों ने नाम वापस लिए हैं, जिसके बाद यहां 6,118 प्रत्याशी चुनावी मैदान में डटे हैं. कुल्लू में 1,693 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस लिए, जिसके बाद यहां 4,098 प्रत्याशी मैदान में रह गए हैं. वहीं, किन्नौर जिले में 369 उम्मीदवारों ने नाम वापस लिए और अब यहां 1,034 प्रत्याशी चुनावी मुकाबले में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. लाहौल-स्पीति जिले में सबसे कम 425 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, यहां 65 उम्मीदवारों ने नाम वापस लिए हैं. सिरमौर जिले में 2,017 उम्मीदवारों ने नामांकन वापस लिए और अब 3,919 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. बिलासपुर में 558 नामांकन वापसी के बाद 4,145 उम्मीदवार मैदान में हैं. सोलन जिले में 1,398 नामांकन वापसी के बाद 4,195 प्रत्याशी मैदान में रह गए हैं. हमीरपुर में 484 उम्मीदवारों ने नाम वापस लिए, अब यहां 4,849 प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे. ऊना जिले में 859 उम्मीदवारों ने नामांकन वापस लिए और अब 4,755 उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे.
पार्टी चिन्ह पर नहीं लड़े जाते चुनाव
हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के लिए चुनावी तस्वीर साफ होने के साथ ही अब पंचायत स्तर पर मुकाबले दिलचस्प होते नजर आ रहे हैं. कई पंचायतों में सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा. वहीं, कुछ जगहों पर बहुकोणीय संघर्ष चुनाव को और रोमांचक बना रहा है. राजनीतिक दल भले ही पंचायत चुनाव प्रत्यक्ष रूप से पार्टी चिन्ह पर नहीं लड़ते, लेकिन गांवों में राजनीतिक प्रभाव और गुटबाजी साफ दिखाई देने लगी है. स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों, जातीय समीकरणों और व्यक्तिगत पकड़ के आधार पर प्रत्याशी वोटरों को अपने पक्ष में करने में जुट गए हैं. वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से भी चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं. प्रशासनिक स्तर पर मतदान केंद्रों की व्यवस्थाओं के साथ सुरक्षा इंतजामों की भी समीक्षा शुरू हो चुकी है. अब नामांकन और वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव प्रचार पूरी रफ्तार पकड़ने वाला है, जिससे आने वाले दिनों में हिमाचल के गांवों में चुनावी माहौल और गर्माने की संभावना है.

