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हिमाचल की इन पंचायतों में निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार, मिलेंगे 25-25 लाख रुपए, यहां देखें पूरी लिस्ट

निर्विरोध चुनाव केवल राजनीतिक सहमति नहीं, बल्कि सामाजिक परिपक्वता और आपसी विश्वास का भी प्रतीक होते हैं.

UNOPPOSED PANCHAYATS IN HIMACHAL
हिमाचल की इन पंचायतों में निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : May 16, 2026 at 7:22 PM IST

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सिरमौर/कांगड़/किन्नौर: हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों के बीच कई पंचायतों ने लोकतंत्र की एक अलग और सकारात्मक तस्वीर पेश की है. प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि निर्विरोध चुने गए हैं. सरकार की ओर से ऐसी पंचायतों को 25-25 लाख रुपए की विशेष प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा के बाद इन पंचायतों की चर्चा और बढ़ गई है. खास बात यह है कि कई पंचायतों में चुनावी मुकाबले के बजाय आपसी सहमति, सामाजिक सौहार्द और भाईचारे के आधार पर प्रतिनिधियों का चयन किया गया. सिरमौर, कांगड़ा और किन्नौर जिलों से सामने आए आंकड़े लोकतंत्र की इसी नई तस्वीर को दिखा रहे हैं.

सिरमौर की पंचायतों ने पेश की मिसाल

जिला सिरमौर की 273 ग्राम पंचायतों में से 28 पंचायतें निर्विरोध चुनी गई हैं. इन पंचायतों में लोगों ने बिना किसी चुनावी टकराव के आपसी सहमति से प्रतिनिधियों का चयन किया. अब ये सभी पंचायतें सरकार की 25-25 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि की हकदार बन गई हैं. राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सिरमौर की पंचायतों को सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक समझदारी की मिसाल माना जा रहा है. जानकारों का कहना है कि निर्विरोध पंचायतों में विकास कार्यों को लेकर बेहतर तालमेल देखने को मिलता है, जिससे गांवों में योजनाओं को तेजी से लागू किया जा सकता है.

शिलाई विकास खंड में सबसे अधिक 10 पंचायतें निर्विरोध चुनी गई हैं. वहीं कमरऊ में 5, संगड़ाह और राजगढ़ में 4-4, पच्छाद और पांवटा साहिब में 2-2 तथा ददाहू में 1 पंचायत निर्विरोध रही। हालांकि नाहन विकास खंड में इस बार एक भी पंचायत निर्विरोध नहीं चुनी गई. सिरमौर की प्रमुख निर्विरोध पंचायतों में शाड़िया, दाड़ो देवरिया, सेंज, रणफुआ जबड़ोग, माटल बखोग, हाब्बन, टटियाना, शावगा, बकरास, धारवा, कांडो भटनोल, शखोली और चाड़ना पंचायतें शामिल हैं.

कांगड़ा में 1680 पदाधिकारी चुने गए निर्विरोध

जिला कांगड़ा में भी पंचायती राज चुनावों के दौरान बड़ी संख्या में उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं. जिला प्रशासन के अनुसार कुल 1680 पदाधिकारी बिना मुकाबले निर्वाचित हुए हैं. इनमें 10 प्रधान, 8 उपप्रधान, 1657 ग्राम पंचायत वार्ड सदस्य और 5 पंचायत समिति सदस्य शामिल हैं. हालांकि जिला परिषद सदस्य पद पर कोई भी उम्मीदवार निर्विरोध नहीं चुना गया. सबसे अधिक निर्विरोध वार्ड सदस्य इंदौरा विकास खंड में 153 चुने गए हैं. इसके अलावा लंबागांव में 127 और रैत में 121 वार्ड सदस्य बिना मुकाबले निर्वाचित हुए.

विकास खंडवार आंकड़ों की बात करें तो परागपुर, पंचरुखी, सुरानी, इंदौरा, नगरोटा सूरियां, धर्मशाला, भवारना, रैत, नूरपुर और फतेहपुर समेत कई ब्लॉकों में निर्विरोध चुनाव देखने को मिले. जिला प्रशासन ने इसे लोकतांत्रिक सहमति और शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया का सकारात्मक संकेत बताया है.

किन्नौर में 22 पंचायतों के प्रधान निर्विरोध

जनजातीय जिला किन्नौर में भी कई पंचायतों और वार्डों में निर्विरोध चुनाव हुए हैं. जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्माके अनुसार जिले की 80 पंचायतों में से 22 पंचायतों में प्रधान पद निर्विरोध तय हुआ है. पूह ब्लॉक की 27 पंचायतों में से 12 पंचायतों में निर्विरोध प्रधान चुने गए हैं, जिसे जिला प्रशासन बड़ी उपलब्धि मान रहा है. वहीं कल्पा ब्लॉक की युवारिंगी, बारंग, मेबर, किल्बा और दुनी पंचायतों में भी प्रधान निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं. निचार ब्लॉक में नाथपा पंचायत बिना मुकाबले चुनी गई है.

इसके अलावा पंचायत समिति के 6 वार्ड भी निर्विरोध चुने गए हैं. इनमें कामरू, किल्बा, चांगो, ज्ञाबुंग, लियो और स्किबा वार्ड शामिल हैं. जिला प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए चुनाव अवधि में हथियारों के प्रदर्शन और सार्वजनिक स्थलों पर हथियार लेकर चलने पर प्रतिबंध भी लगाया है.

लोकतंत्र में सहमति और विकास का संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निर्विरोध चुनाव केवल राजनीतिक सहमति नहीं, बल्कि सामाजिक परिपक्वता और आपसी विश्वास का भी प्रतीक होते हैं. हिमाचल की इन पंचायतों ने यह संदेश दिया है कि लोकतंत्र केवल चुनावी मुकाबले तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास, सहयोग और सामूहिक सोच से भी मजबूत होता है. अब इन पंचायतों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि से गांवों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है.

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