सरकारी कर्मचारी ने प्रधान चुनाव के लिए भरा था नामांकन, अब जाकर खुली पोल, FIR की तैयारी
सरकारी कर्मचारी के प्रधान चुनाव के लिए नामांकन और प्रचार मामले के बाद गरमाया चुनावी माहौल, व्यक्ति का नामांकन हुआ रद्द.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : May 18, 2026 at 7:00 PM IST
ज्वालामुखी: हिमाचल प्रदेश में 26, 28 और 30 मई को पंचायत चुनाव होने हैं. इसके लिए 7 मई से 11 मई तक नामांकन दर्ज करवाया गया. वहीं, 12 मई को जांच और 15 मई को नामांकन वापसी के बाद उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट तैयार कर दी गई. इसी बीच अब कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी में एक हैरतअंगेज मामला सामने आया है, जहां चुनावी बबाल ने खलबली मचा दी है. यहां एक सरकारी कर्मचारी ने पंचायत चुनाव लड़ने लगा, मामला सामने आते ही चुनावी माहौल पूरी तरह से गरमा गया है.
कैसे हुआ पूरे मामले का खुलासा ?
दरअसल ज्वालामुखी में विकासखंड सुरानी की ग्राम पंचायत कोपड़ा में जल शक्ति विभाग में तैनात एक सरकारी कर्मचारी ने नियमों को ताक पर रखकर पंचायत प्रधान पद के लिए नामांकन भर दिया. हैरानी की बात यह रही कि उसका नामांकन स्वीकार भी हो गया और उसे चुनाव चिह्न तक आवंटित कर दिया गया. वहीं, चुनाव प्रचार करते हुए ये खुलासा हुआ कि प्रधान पद का उम्मीदवार सरकारी कर्मचारी है, क्योंकि किसी व्यक्ति द्वारा प्रशासन में इस बात की जानकारी दी गई और सरकारी मामला सामने आते ही प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है. वहीं, संबंधित व्यक्ति जल शक्ति विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत है, ऐसे में उसके नामांकन भरने के बाद अब पूरी पूरी चुनावी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है.
"मामला हमारे ध्यान में आने के बाद संबंधित व्यक्ति का नामांकन रद्द कर दिया गया है. इसके साथ ही पूरे मामले का शिकायत पत्र बनाकर डीसी कांगड़ा को भेज दिया गया है. आगे की कार्रवाई व्यक्ति के खिलाफ प्रशासन द्वारा की जाएगी." - अंशु चंदेल, बीडीओ सुरानी
BDO सुरानी ने नामांकन किया रद्द
यह सारा मामला अब बड़े उच्च अधिकारियों के पास पहुंच गया है, ऐसे में अब व्यक्ति के दस्तावेजों की दोबारा जांच शुरू होगी. वहीं, मामला बीडीओ सुरानी अंशु चंदेल के पास आने के बाद बीते रोज 17 मई को पत्रों की स्क्रूटनी करने के बाद संबंधित कर्मचारी का नामांकन रद्द कर दिया गया है. बीडीओ अंशु चंदेल ने बताया कि निर्वाचन अधिकारियों ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर मानते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. उन्होंने सीधे पर इसे चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करना बताया. बीडीओ अंशु चंदेल ने बताया कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप में पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाने की तैयारी की जा रही है. मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासन भी सख्त नजर आ रहा है. वहीं, मामले को लेकर संबंधित क्षेत्र की सेक्रेटरी तृप्ता से पूछा गया तो उन्होंने मामले पर किसी भी तरह की टिप्पणी न करते हुए तुरंत प्रभाव से फोन काट दिया.
क्या कहते हैं पंचायती राज के चुनावी नियम ?
गौरतलब है कि पंचायती राज चुनाव नियमों के अनुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी चुनाव नहीं लड़ सकता है, जब तक कि वो विधिवत सेवा से अपना इस्तीफा न दे. ऐसे में ये सवाल उठना लाजमी है कि आखिरी नामांकन की जांच प्रक्रिया के दौरान ही ये मामला सामने क्यों नहीं आया और कैसे उक्त व्यक्ति को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया गया. इसके अलावा नामांकन के समय किसी ने भी आपत्ति नहीं जताई, जिसके चलते उसका नामांकन स्वीकार कर लिया. इस मामले ने पंचायत चुनाव की पारदर्शिता और निर्वाचन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

