दो साल से खाली पद न भी भरे जाएं तो भी वेतन को चाहिए 1.21 लाख करोड़, पांच साल में कैसे होगा इंतजाम
आरडीजी खत्म होने से हिमाचल आर्थिक संकट से जूझ रहा है. पांच सालों में हिमाचल को पेंशन-सैलरी पर भारी खर्चा करना है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 11, 2026 at 6:14 PM IST
|Updated : February 11, 2026 at 7:21 PM IST
शिमला: छोटे पहाड़ी राज्य हिमाचल में इस समय रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) खत्म होने के कारण पेश आने वाले आर्थिक संकट की चर्चा है. हाल ही के रविवार को वित्त विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार ने सरकार के समक्ष राज्य की गंभीर आर्थिक स्थिति पर केंद्रित प्रेजेंटेशन दी.
इस प्रजेंटेशन में प्रधान वित्त सचिव ने सरकार से आग्रह किया है कि आने वाले समय में नई भर्तियों में यूनिफाइड पेंशन स्कीम पर विचार किया जाए. साथ ही कहा कि दो साल से खाली पड़े पद अबोलिश यानी खत्म किए जाएं. महंगाई भत्ते को फ्रिज करने और एरियर को भूल जाने जैसे बिंदु डिस्कशन के लिए रखे. ऐसे में ये जानना दिलचस्प है कि आने वाले पांच साल में वेतन और पेंशन का क्या गणित होगा, क्योंकि वित्त आयोग की सिफारिशें पांच साल के लिए होती हैं, लिहाजा यहां पांच साल का ही गणित दर्ज़ किया जाएगा. उस से पहले आर्थिक मोर्चे पर हिमाचल की दशा की पृष्ठभूमि देखते हैं.
हिमाचल के बजट का अधिकतम हिस्सा सरकारी कर्मियों के वेतन, पेंशनर्स की पेंशन, लिए गए कर्ज का ब्याज चुकाने में खर्च हो जाता है. पूर्व में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट से इस खर्च का अधिकांश भार वहन हो जाता था. अब स्थितियां थ्री सिक्सटी डिग्री घूम गई हैं. आरडीजी खत्म होने के बाद वित्त विभाग ने सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू, डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री सहित एमएलए व सरकारी अफसरों के सामने राज्य की आर्थिक स्थिति का ब्यौरा पेश किया. उस प्रेजेंटेशन से एक भयावह संकट के संकेत मिले हैं.
ऐसा ही एक संकेत सोलहवें वित्त आयोग के हिमाचल दौरे के समय मिला था. उस समय हिमाचल सरकार ने वित्त आयोग के समक्ष राज्य की आर्थिक परिस्थितियों को विस्तार से रखते हुए RDG की मद में उदार सहायता की सिफारिश का आग्रह किया था. वित्त आयोग की रिपोर्ट आई और उसमें RDG को खत्म ही कर दिया गया.
क्या है पांच साल के वेतन का गणित
वित्त आयोग के समक्ष राज्य के वित्त विभाग ने जो रिपोर्ट रखी थी, उसमें बताया गया था कि हिमाचल में आने वाले पांच साल में वेतन का खर्च 1.21 लाख करोड़ रुपए से अधिक होगा. मौजूदा वित्त वर्ष यानी 2026-27 में सरकारी कर्मियों के वेतन पर ही सालाना 20639 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे. वित्त वर्ष 2027-28 में वेतन का ये खर्च बढ़कर 22502 करोड़ सालाना हो जाएगा. फिर उस से अगले वित्त वर्ष 2028-29 में वेतन का सालाना खर्च 24145 करोड़ रुपए होगा. उसके बाद वित्त वर्ष 2029-30 में सरकारी कर्मचारियों के वेतन पर साल भर में 26261 करोड़ रुपए का खर्च करना होगा. पांचवें साल यानी वित्त वर्ष 2030-31 में सरकारी कर्मियों के वेतन का खर्च सालाना 28354 करोड़ रुपए हो जाएगा. पांच साल में ये सारा आंकड़ा कुल मिलाकर 121901 करोड़ रुपए बनता है, जिस तरह से आर्थिक हालत हैं, उस में ये खर्च उठाना टेढ़ी खीर है.
पेंशनर्स का खर्च भी बढ़ रहा
हिमाचल में लाइफ एक्सपेक्टेंसी यानी जीवन प्रत्याशा बढ़ने से पेंशनर्स का खर्च बढ़ता जाएगा. नई भर्तियां न भी हों तो आने वाले समय में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों की जगह पेंशनर्स की संख्या अधिक हो जाएगी. वित्त विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वित्त वर्ष यानी 2025-26 में पेंशनर्स की संख्या बढक़र 1 लाख 99 हजार 931 हो जाएगी. इसी प्रकार वर्ष 2026-27 में ये संख्या 2 लाख 08 हजार 896 होगी. फिर वित्त वर्ष 2027-28 में पेंशनर्स की संख्या 2 लाख 17 हजार 115 होगी. इसके बाद ये संख्या वित्त वर्ष 2028-29 में बढ़कर 2 लाख, 24 हजार 513 हो जाएगी और फिर 2029-30 में पेंशनर्स 2 लाख, 38 हजार 827 होगी. इस प्रकार आने वाले पांच साल में पेंशन पर ही सरकार को 90 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च करने होंगे. ओल्ड पेंशन स्कीम लागू होने के बाद से पेंशन पर खर्च बढ़ रहा है. ये एक वित्त वर्ष में 13 प्रतिशत से बढक़र 17 प्रतिशत हो गया है. ये बात अलग है कि सरकारी कर्मचारी अब कम हो रहे हैं.
कारण ये है कि नियमित भर्ती निरंतर नहीं हो रही है और कई फंक्शनल पद भरे नहीं जा रहे हैं. इसी स्थिति की तरफ प्रधान वित्त सचिव देवेश कुमार ने संकेत किया है. सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कर्मचारियों वो पेंशनर्स को आश्वस्त किया है कि उनके हित सुरक्षित रखे जाएंगे, लेकिन ये भी सत्य है कि DA और एरियर का भुगतान इन स्थितियों में तो संभव नहीं दिख रहा.
हिमाचल के वरिष्ठ पत्रकार बलदेव शर्मा लिखते हैं कि कैग की रिपोर्ट्स में लगातार गंभीर होते आर्थिक संकट की बात कई बार आई. किसी भी सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. वहीं, चार दशक की पत्रकारिता का अनुभव रखने वाले कृष्ण भानु, जो बेहतरीन लेखक भी हैं ने लिखा है कि इस आपदा को अवसर की तरह लेकर आर्थिक प्रबंधन की शुरुवात खुद से करनी होगी. उन्होंने अन्न संकट के दौरान देश के सपूत और महान नेता लाल बहादुर शास्त्री की उपवास वाली युक्ति का जिक्र किया और कहा कि लीक से हटकर कुछ क्रांतिकारी फैसलों की जरूरत है.
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