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अब एक क्लिक से ऑनलाइन ऑर्डर करें प्राकृतिक खेती के उत्पाद, क्यूआर कोड पर मिलेगी प्रोडक्ट की हर जानकारी

हिमाचल में प्राकृतिक खेती के उत्पादों को बड़ा बाजार देने की तैयारी में है. क्यूआर कोड व सितारा प्रमाणपत्र से होगी पहचान.

अब मोबाइल से ऑर्डर कर सकेंगे प्राकृितिक खेती से तैयार उत्पाद
अब मोबाइल से ऑर्डर कर सकेंगे प्राकृितिक खेती से तैयार उत्पाद (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 15, 2026 at 3:00 PM IST

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Updated : August 15, 2026 at 3:47 PM IST

6 Min Read
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शिमला: हिमाचल के खेतों में तैयार हो रहा प्राकृतिक स्वाद अब गांव और स्थानीय बाजार की सीमाओं में कैद नहीं रहेगा. किसान खेत में प्राकृतिक तरीके से फसल तैयार करेंगे और देश-दुनिया में बैठे उपभोक्ता मोबाइल की एक क्लिक पर हिमाचल के इन उत्पादों को अपने घर तक मंगवा सकेंगे. प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती के उत्पादों को बड़ा बाजार उपलब्ध करवाने के लिए ऑनलाइन बिक्री व्यवस्था शुरू करने की तैयारी में जुटी है.

हिमाचल प्रदेश मार्केटिंग बोर्ड के माध्यम से प्रस्तावित इस डिजिटल मंच को अंतिम रूप दिया जा रहा है. व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों को जहां खरीदार तलाशने और बाजार तक उत्पाद पहुंचाने की चुनौती से राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं हिमाचल के प्राकृतिक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिल सकती है. खास बात ये है कि सरकार प्राकृतिक खेती को केवल खेतों तक सीमित रखने के बजाय अब उत्पादन से लेकर प्रमाणन, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक पूरी श्रृंखला तैयार करने पर जोर दे रही है.

प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की बढ़ी संख्या
प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की बढ़ी संख्या (ETV Bharat)

2.56 लाख किसानों का कारवां

प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों की संख्या वर्ष 2024 में करीब 1.98 लाख से बढ़कर 2025 में 2,22,893 और वर्ष 2026 में 2.56 लाख से अधिक पहुंच चुकी है, यानी दो वर्षों में प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की संख्या में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है. वहीं, प्रदेश में प्राकृतिक खेती की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी. उस समय प्रदेश में महज 628 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा रही थी. वर्ष 2025 में इसका क्षेत्रफल बढ़कर 38,437 हेक्टेयर हो गया, जबकि वर्ष 2026 में यह और बढ़कर 44,785 हेक्टेयर पहुंच गया है. सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश को रसायन मुक्त खेती की दिशा में ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है. प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए प्रदेश की साढ़े तीन हजार से अधिक पंचायतों में किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. अब तक 3.06 लाख से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीक का प्रशिक्षण मिला है. इनमें से 2.56 लाख से अधिक किसान रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं. ऐसे में आने वाले समय में प्राकृतिक उत्पादों की मात्रा बढ़ने के साथ उनके लिए बड़े बाजार की जरूरत भी बढ़ेगी.

2018 में हुई थी प्राकृतिक खेती की शुरुआत
2018 में हुई थी प्राकृतिक खेती की शुरुआत (ETV Bharat)

भरोसे का सितारा

प्राकृतिक उत्पादों की पहचान और गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ताओं का भरोसा कायम रखने के लिए सरकार ने स्व-प्रमाणन व्यवस्था के तहत प्राकृतिक खेती की प्रमाणित मूल्यांकन प्रणाली शुरू की है. इसके तहत अब तक 1,96,892 किसानों को सितारा प्रमाणपत्र प्रदान किए जा चुके हैं. पैकिंग में बेचे जाने वाले प्राकृतिक उत्पादों पर क्यूआर कोड की व्यवस्था भी की गई है. उपभोक्ता मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर यह जानकारी हासिल कर सकता है कि उत्पाद प्राकृतिक खेती से तैयार हुआ है और इसे किस किसान ने तैयार किया है. इससे उत्पाद की ट्रेसबिलिटी बढ़ने के साथ किसान और उपभोक्ता के बीच पारदर्शिता भी कायम होगी. प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसान को तुरंत सितारा प्रमाणपत्र नहीं मिलता. इसके लिए करीब डेढ़ वर्ष की प्रक्रिया निर्धारित है. प्रमाणपत्र जारी करने से लगभग छह महीने पहले किसान का पंजीकरण किया जाता है. इसके बाद कृषि विभाग के अधिकारी खेतों का निरीक्षण करते हैं और निर्धारित मानकों की जांच की जाती है. मानकों को पूरा करने वाले किसानों को सितारा प्रमाणपत्र दिया जाता है. इस व्यवस्था का उद्देश्य बाजार में प्राकृतिक उत्पाद के नाम पर होने वाली गलत बिक्री पर अंकुश लगाने के साथ उपभोक्ताओं को प्रमाणित उत्पाद उपलब्ध करवाना है.

1 लाख से अधिक किसानों को मिले सितारा प्रमाण पत्र
1 लाख से अधिक किसानों को मिले सितारा प्रमाण पत्र (ETV Bharat)

अब बाजार किसान के खेत तक नहीं, मोबाइल तक पहुंचेगा

प्राकृतिक खेती के विस्तार के साथ सबसे बड़ी चुनौती उत्पादों की मार्केटिंग की रही है. किसान फसल तैयार करने के बाद स्थानीय बाजार, मंडी या खरीदार की तलाश करता है. कई बार उचित बाजार नहीं मिलने के कारण उसे उत्पाद अपेक्षाकृत कम कीमत पर बेचने पड़ते हैं. प्रस्तावित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इस समस्या को काफी हद तक दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है. मार्केटिंग बोर्ड के माध्यम से तैयार की जा रही व्यवस्था में प्राकृतिक उत्पादों को डिजिटल बाजार उपलब्ध करवाने की योजना है. इससे सब्जियां, दालें, अनाज और अन्य प्राकृतिक उत्पाद हिमाचल से सीधे देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच सकेंगे. भविष्य में विदेशों में प्राकृतिक उत्पादों की मांग रखने वाले उपभोक्ताओं तक भी हिमाचली उत्पाद पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है.

प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की बढ़ी संख्या
2026 में 44,785 हेक्टेयर पहुंचा प्राकृतिक खेती का दायरा (ETV Bharat)

किसानों को बाजार, उपभोक्ता को मिलेगा भरोसा

ऑनलाइन बिक्री व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि किसान को केवल उत्पादन पर ध्यान देना पड़े और मार्केटिंग के लिए डिजिटल मंच उपलब्ध हो. वहीं, उपभोक्ता प्रमाणपत्र और क्यूआर कोड के माध्यम से उत्पाद की पहचान और उसके स्रोत की जानकारी हासिल कर सकेगा. इससे हिमाचल के प्राकृतिक उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है. स्थानीय स्तर पर बिकने वाले उत्पाद यदि एक व्यवस्थित डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पैकिंग, प्रमाणन और पहचान के साथ देश-विदेश तक पहुंचते हैं तो किसानों के लिए बाजार का दायरा कई गुना बढ़ सकता है.

ऑनलाइन बाजार में बिकेंगे प्राकृतिक खेती के उत्पाद
ऑनलाइन बाजार में बिकेंगे प्राकृतिक खेती के उत्पाद (ETV Bharat)

कृषि सचिव सी पालरासू का कहना है कि किसानों को उनके उत्पादों के लिए बेहतर मंच उपलब्ध करवाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश मार्केटिंग बोर्ड के तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार करने की व्यवस्था की जा रही है. इसके जरिए ग्राहक सीधे प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों को खरीद सकेंगे और किसानों को बाजार तक पहुंच के लिए बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी. सरकार का मकसद प्राकृतिक उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाकर किसानों को फसल का उचित दाम दिलाना है. ऑनलाइन बाजार के विस्तार से हिमाचल के प्राकृतिक उत्पादों की पहचान बढ़ने के साथ किसानों की आर्थिकी को भी मजबूती मिलेगी.

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Last Updated : August 15, 2026 at 3:47 PM IST