IGMC डॉक्टर बर्खास्तगी मामले में HMA ने दी सरकार को चेतावनी, अनिश्चितकालीन हड़ताल का किया ऐलान, स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई
हिमाचल मेडिकल एसोसिएशन ने डॉ. राघव नरूला को बर्खास्त किए जाने को सरकार का एकतरफा और जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बताया.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 27, 2025 at 2:15 PM IST
|Updated : December 27, 2025 at 3:33 PM IST
ऊना: आईजीएमसी शिमला में मरीज और डॉक्टर के बीच हुई मारपीट मामले में रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. राघव नरूला को बर्खास्त किए जाने का पहले रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध किया और अनिश्चित हड़ताल पर चले गए. वहीं, अब यह मामला धीरे-धीरे आंदोलन का रूप लेता जा रहा है. रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के साथ-साथ अब हिमाचल मेडिकल एसोसिएशन (Himachal Medical Association) ने भी अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है. साथ ही सरकार की कार्रवाई को एकतरफा और जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बताया.
जिसके बाद शिमला, ऊना सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों में अस्पतालों की ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं. डॉक्टरों का कहना है, 'बिना निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों को सुने किसी डॉक्टर को बर्खास्त करना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि इससे पूरे चिकित्सा तंत्र का मनोबल भी टूटता है. इसी मांग को लेकर अब प्रदेशव्यापी विरोध तेज हो गया है'.
बता दें कि आईजीएमसी शिमला में मरीज और चिकित्सक के बीच हुई मारपीट की घटना के बाद सरकार ने रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. राघव नरूला को बर्खास्त कर दिया. सरकार के इस फैसले के विरोध में शुक्रवार को रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया. वहीं, इसके कुछ ही घंटों बाद हिमाचल मेडिकल एसोसिएशन ने भी इसी तर्ज पर हड़ताल शुरू करने की घोषणा कर दी. शनिवार को ऊना जिला मुख्यालय स्थित क्षेत्रीय अस्पताल के कॉन्फ्रेंस हॉल में हिमाचल मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले सभी डॉक्टर्स एकत्रित हुए और सरकार की कार्रवाई के खिलाफ एकजुट होकर विरोध दर्ज करवाया.
हिमाचल मेडिकल एसोसिएशन के ऊना जिला अध्यक्ष डॉ. महेश्वर राय ने कहा, 'आईजीएमसी में हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इस मामले में दोनों पक्षों की निष्पक्ष सुनवाई जरूरी थी. सरकार ने केवल एक पक्ष की बात सुनते हुए डॉक्टर को बर्खास्त कर दिया, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है. डॉ. राघव नरूला की बर्खास्तगी को तुरंत वापस लिया जाए, अन्यथा यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है. हड़ताल लंबी खिंचने की स्थिति में इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ सकता है, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी'.
गौरतलब है कि शुक्रवार को चिकित्सकों के सामूहिक अवकाश पर चले जाने से क्षेत्रीय अस्पताल सहित जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों की ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद रहीं. वहीं शनिवार को भी हड़ताल जारी रहने के कारण मरीजों को इलाज के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. दूर-दराज से आए मरीजों को बिना उपचार लौटना पड़ा, जिससे लोगों में रोष भी देखने को मिला. फिलहाल सरकार और चिकित्सक संगठनों के बीच कोई समाधान निकलता नजर नहीं आ रहा है.
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