कार हिमाचल में खड़ी, चालान जयपुर में कटा, जुर्माना भी जीरो, गाड़ी और नंबर का भी नहीं मेल
कार मालिक ने आग्रह किया है कि वाहन नंबर, वाहन के मॉडल और चालान के साथ उपलब्ध फोटो का मिलान करवाया जाए.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 20, 2026 at 7:13 PM IST
मंडी: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में एक कार मालिक उस समय हैरान रह गया, जब उसके मोबाइल पर राजस्थान के जयपुर में चालान कटने का संदेश पहुंचा. मामला सिर्फ चालान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संदेश में यह भी बताया गया कि चालान कोर्ट भेज दिया गया है. हैरानी की बात यह है कि कार मालिक के अनुसार उसकी गाड़ी पिछले करीब दो महीने से घर के पास खड़ी है और हिमाचल से बाहर गई ही नहीं. जब चालान की डिटेल निकलवाई गई तो गाड़ी की तस्वीर और नंबर में भी अंतर सामने आया.
मंडी जिले के झोर निवासी कमलजीत के मोबाइल फोन पर उनकी गाड़ी के चालान का संदेश आया. संदेश में चालान जयपुर में होने की जानकारी दी गई थी. साथ ही मामला कोर्ट भेजे जाने की बात भी सामने आई. कमलजीत के लिए यह समझना मुश्किल था कि उनकी गाड़ी जयपुर कैसे पहुंच गई, जबकि उनका दावा है कि वाहन लंबे समय से उनके घर के समीप खड़ा है.
चालान की डिटेल निकलवाने पर हुआ मामले का खुलासा
चालान की जानकारी मिलने के बाद कमलजीत ने मामले की पुष्टि करने के लिए लोक मित्र केंद्र का रुख किया. वहां जब चालान की पूरी डिटेल निकलवाई गई, तो मामला और भी हैरान करने वाला निकला. चालान की रसीद पर जो तस्वीर लगी थी, उसमें 'स्कोडा' कार साफ नजर आ रही थी, जबकि कमलजीत के पास 'मारुति सुजुकी इग्निस' गाड़ी है. यानी, चालान वाली गाड़ी और उनकी खुद की कार का मॉडल पूरी तरह अलग था. इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल वाहन नंबर को लेकर खड़ा हुआ है. चालान पर वाहन नंबर HP-82-8227 दर्ज है, जबकि कमलजीत की गाड़ी का वास्तविक नंबर HP-82-8287 है. दोनों नंबरों में सिर्फ एक अंक का अंतर है. कमलजीत का कहना है कि यह ट्रैफिक पुलिस या सिस्टम की मानवीय भूल हो सकती है, जिसके कारण किसी दूसरे वाहन का चालान गलती से उनके वाहन नंबर पर जारी हो गया.
दो महीने से घर के पास खड़ी है कार
कमलजीत ने बताया कि बरसात के कारण उनके घर की ओर जाने वाला रास्ता खराब हो गया है. इसी वजह से उनकी गाड़ी पिछले करीब दो महीने से घर के समीप ही खड़ी है. उनका कहना है कि ऐसे में जयपुर में उनकी गाड़ी का चालान होना उनके लिए बेहद चौंकाने वाला है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनकी गाड़ी हिमाचल से बाहर गई ही नहीं तो राजस्थान में उसका चालान कैसे हो गया.
कमलजीत ने बताया कि वह एक गरीब परिवार से संबंध रखते हैं और काफी मुश्किलों के बाद उन्होंने यह गाड़ी खरीदी है. ऐसे में बिना किसी गलती के चालान कटना और मामला कोर्ट तक पहुंच जाना उनके लिए मानसिक और आर्थिक परेशानी का कारण बन गया है. उनका कहना है कि यदि चालान में दिखाई गई गाड़ी का मॉडल अलग है और वाहन नंबर भी अलग है तो पूरे मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए.
कमलजीत ने उठाई जांच की मांग
कमलजीत ने केंद्र सरकार, पुलिस प्रशासन और संबंधित परिवहन विभाग से मामले की जांच करने की मांग की है. उन्होंने आग्रह किया कि वाहन नंबर, वाहन के मॉडल और चालान के साथ उपलब्ध फोटो का मिलान करवाया जाए. यदि जांच में चालान गलत पाया जाता है तो उसे तत्काल निरस्त किया जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया का सामना न करना पड़े. उन्होंने कहा कि आम आदमी के लिए किसी दूसरे राज्य में जाकर चालान या कोर्ट से जुड़े मामले को निपटाना आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि तकनीकी व्यवस्था में हुई छोटी-सी गलती का खामियाजा वाहन मालिक को भुगतना पड़ता है. इसलिए चालान काटते समय वाहन नंबर के साथ वाहन के मॉडल, फोटो और अन्य विवरणों का भी सही तरीके से सत्यापन किया जाना चाहिए.
कमलजीत ने उम्मीद जताई कि पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे और चालान में दिखाई गई गाड़ी की वास्तविक पहचान सामने आएगी. उनका कहना है कि यदि यह गलत चालान है तो उसे जल्द निरस्त किया जाना चाहिए. साथ ही ऐसी तकनीकी गलतियों को रोकने के लिए चालान प्रक्रिया में वाहन की फोटो और अन्य विवरणों का मिलान भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
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