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बारिश की बेरुखी से बढ़ी किसानों की चिंता, गेहूं-जौ की बिजाई अटकी, पीली पड़ने लगी फसल

बारिश के बेरुखी के चलते किसानों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है. बारिश नहीं होने से फसलों की बिजाई प्रभावित हुई है.

KULLU NO RAIN CROP SOWING AFFECTED
बारिश की बेरुखी से बढ़ी किसानों की चिंता (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : December 30, 2025 at 3:57 PM IST

5 Min Read
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कुल्लू: हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी जिलों में आमतौर पर सर्दियों की शुरुआत के साथ ही बारिश और बर्फबारी से खेतों में रौनक लौट आती है, लेकिन इस बार मौसम की बेरुखी ने किसानों और बागवानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. जिला कुल्लू में करीब तीन महीने से बारिश न होने के कारण खेतों की नमी पूरी तरह खत्म हो चुकी है. दिसंबर का महीना भी समाप्ति की ओर है, लेकिन आसमान से एक बूंद पानी नहीं गिरा. हालात ऐसे बन गए हैं कि कई इलाकों में सूखे जैसे हालात नजर आने लगे हैं, जिसका सीधा असर रबी फसलों की बिजाई पर पड़ रहा है.

कुल्लू में सूखे जैसे हालात

जिला कुल्लू में लंबे समय से बारिश न होने के कारण खेतों की मिट्टी सूख चुकी है. जमीन में नमी न होने के चलते किसान गेहूं, जौ और अन्य रबी फसलों की बिजाई नहीं कर पा रहे हैं. आमतौर पर नवंबर-दिसंबर के बीच किसान रबी फसलों की बिजाई पूरी कर लेते हैं, लेकिन इस बार मौसम ने साथ नहीं दिया. खेत खाली पड़े हैं और किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं.

गेहूं की बिजाई प्रभावित

कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिला कुल्लू में सामान्य तौर पर लगभग 11 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बिजाई की जाती है. लेकिन इस वर्ष अब तक करीब 6 हजार हेक्टेयर भूमि पर बिजाई नहीं हो पाई है. इसका मुख्य कारण खेतों में नमी का अभाव है. यदि जल्द बारिश नहीं हुई, तो गेहूं की फसल पर सीधा असर पड़ सकता है.

जौ और अन्य फसलों की हालत भी चिंताजनक

जिले में जौ की कुल 2400 हेक्टेयर भूमि में से केवल लगभग 200 हेक्टेयर में ही बिजाई हो पाई है. शेष क्षेत्र में सूखे के कारण काम ठप पड़ा है. इसी तरह जई और आलू जैसी फसलों पर भी मौसम की मार साफ दिखाई दे रही है. खेतों में समय पर नमी न मिलने से किसान जोखिम लेने से बच रहे हैं.

बीज खरीदे, लेकिन बो नहीं पा रहे किसान

कृषि विभाग के अनुसार गेहूं के 1045 क्विंटल बीज जिले में उपलब्ध कराए गए थे, जिन्हें किसान पहले ही खरीद चुके हैं. जौ के 158 क्विंटल बीज भी किसानों ने उठा लिए हैं, लेकिन बारिश न होने के कारण बीज जमीन में नहीं जा पा रहे. जई के लिए आए 400 क्विंटल बीज में से अब भी 83 क्विंटल बिना बिके पड़े हैं.

किसान दिलीप ठाकुर ने बताया, "मैंने कृषि विक्रय केंद्र से गेहूं का बीज खरीद लिया है, लेकिन अभी तक उसे बो नहीं पाया हूं. खेतों में सिंचाई की कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं है. यदि एक सप्ताह के भीतर बारिश नहीं हुई, तो गेहूं की बिजाई करना संभव नहीं होगा."

आलू के बीज की बिक्री पर भी असर

सूखे का असर आलू के बीज पर भी पड़ा है. आनी और निरमंड खंड के लिए आए 330 क्विंटल आलू बीज में से करीब 250 क्विंटल अब तक नहीं बिक पाए हैं. किसान नमी के बिना आलू लगाने से बच रहे हैं, क्योंकि इससे बीज खराब होने का खतरा बना रहता है.

कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. ऋतू गुप्ता ने कहा, "किसानों ने गेहूं और जौ के बीज खरीद लिए हैं. जैसे ही बारिश होगी, किसान तुरंत बिजाई शुरू कर देंगे. फिलहाल सूखे से बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, यदि बारिश जल्दी नहीं हुई, तो आने वाले समय में किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है."

पीली पड़ने लगी लहसुन की फसल

घाटी के किसान हरि राम का कहना है कि उन्होंने इस वर्ष लहसुन का बीज 300 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा था. लेकिन पानी की भारी कमी के चलते खेतों में बोया गया लहसुन पीला पड़ने लगा है. उन्हें डर है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई, तो पूरी फसल खराब हो सकती है और उनकी मेहनत व लागत दोनों डूब जाएंगी.

सिंचाई संकट से जूझते किसान

भुंतर के किसान वीरेंद्र कश्यप का कहना है कि उन्होंने किसी तरह सिंचाई के जरिए गेहूं की बिजाई तो कर दी है, लेकिन अब सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है. खेतों में फसल उग आई है, लेकिन बारिश न होने के कारण पौधे पूरी तरह विकसित नहीं हो पा रहे। इससे फसल पीली पड़ने और रोग लगने का खतरा बढ़ गया है.

बर्फबारी से भी बढ़ सकती है मुश्किल

बंजार क्षेत्र के किसान किशन ठाकुर का कहना है कि यदि बारिश से पहले बर्फबारी हो गई, तो बिना अंकुरित हुए बीज जमीन के भीतर दबे रह जाएंगे. बाद में उगने वाली फसल कमजोर होगी, जिससे उत्पादन घटेगा और किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा.

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