योग्य अभ्यर्थी को केवल FIR दर्ज होने पर नियुक्ति देने से नहीं किया जा सकता इनकार- हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरी में नियुक्ति मामले में अहम फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को दिया आदेश.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : July 8, 2026 at 12:30 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरी में नियुक्ति से जुड़े एक मामले पर अहम फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि योग्य अभ्यर्थी को केवल एफआईआर दर्ज होने पर उसे हमेशा के लिए नियुक्ति देने से रोका नहीं जा सकता. हिमाचल हाईकोर्ट में जस्टिस जियालाल भारद्वाज की बेंच ने पुलिस कांस्टेबल (ड्राइवर) भर्ती से जुड़े मामले में ये महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने अमित जरयाल की याचिका स्वीकार करते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया.
हाईकोर्ट के राज्य सरकार को आदेश
हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता को नियुक्ति की उसी तिथि से पुलिस कांस्टेबल के पद पर नियुक्ति दी जाए जब से उनके बैच के अन्य चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिली. अदालत ने निर्देश दिए की याचिकाकर्ता को वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभ भी दिए जाएंगे, हालांकि जिस अवधि में उन्होंने सेवा नहीं की, उस अवधि का वेतन नहीं मिलेगा. अदालत ने कहा अगर तीन महीने के अंदर नियुक्ति नहीं दी जाती है तो राज्य सरकार को उस दिन से वेतन का भुगतान करना होगा.
भर्ती प्रक्रिया के नियम 15.2 का दिया हवाला
जस्टिस जियालाल भारद्वाज की अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार के 23 जून 2018 और 18 मार्च 2019 के आदेशों को निरस्त कर दिया. इसमें राज्य सरकार ने याचिकाकर्ता की नियुक्ति रद्द करने संबंधी आदेश जारी किए थे. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भर्ती प्रक्रिया के नियम 15.2 के अनुसार अगर किसी अभ्यर्थी के विरुद्ध जांच या मुकदमा लंबित हो तो उसकी नियुक्ति केवल जांच या ट्रायल पूरा होने तक स्थगित रखी जा सकती है, उसे स्थायी रूप से अस्वीकार नहीं किया जा सकता.
हाईकोर्ट ने कही ये बात
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के बरी होने के बाद उसे तुरंत नियुक्ति दी जानी चाहिए थी. हाईकोर्ट ने माना कि केवल एफआईआर दर्ज होने के आधार पर नियुक्ति से वंचित करना, जबकि बाद में अभ्यर्थी बरी हो गया हो, कानूनन उचित नहीं है. अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार स्वयं एफआईआर वापस लेने का प्रयास कर चुकी थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार भी मामले में अन्याय होने की आशंका मान रही थी. ऐसे में नियुक्ति से इनकार करना मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है.
क्या है पूरा मामला ?
मामला साल 2017 की पुलिस कांस्टेबल (ड्राइवर) भर्ती से जुड़ा है. याचिकाकर्ता अमित जरयाल लिखित और शारीरिक परीक्षा पास कर चयनित हो गए थे, लेकिन चरित्र सत्यापन के दौरान अमित के खिलाफ थाना चुवाड़ी में चुनावी रंजिश को लेकर एक मामला दर्ज होने की बात सामने आई. याचिकाकर्ता पर दर्ज FIR के चलते पुलिस विभाग ने भर्ती नियमों के नियमों का हवाला देते हुए उनकी नियुक्ति रोक दी. इसके बाद मार्च 2019 में उसका दावा पूरी तरह खारिज कर दिया. याचिकाकर्ता ने इस फैसले को पहले प्रशासनिक अधिकरण में चुनौती दी और बाद में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुनवाई के दौरान यह भी रिकॉर्ड पर आया कि साल 2023 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें उक्त आपराधिक मामले में बरी कर दिया था, जिसके बाद हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में अंतिम फैसला सुनाया.

