प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर HC सख्त, ट्रिब्यूनल के आदेश को 'आम प्रतिवेदन' मानकर खारिज नहीं कर सकता विभाग
अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रिब्यूनल के आदेश को विभाग अपनी सुविधा के अनुसार दोबारा जांच या निर्णय का विषय नहीं बना सकता.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : September 1, 2026 at 9:00 AM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि जब कोई सक्षम ट्रिब्यूनल या अदालत किसी कर्मचारी के पक्ष में स्पष्ट आदेश जारी करती है, तो विभाग उसे केवल एक 'आम प्रतिवेदन' समझकर दोबारा खारिज नहीं कर सकता. अधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वो आदेश को उसकी मूल भावना के साथ लागू करें.
न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने दिवंगत दैनिक वेतनभोगी बेलदार साहिब सिंह के कानूनी वारिसों की याचिका को स्वीकार करते हुए विभाग को आदेश दिया है कि साहिब सिंह को पिछली देय तिथि से वर्क-चार्ज्ड स्टेटस और सभी परिणामी वित्तीय लाभ प्रदान किए जाएं. दरअसल साहिब सिंह ने वर्ष 1994 से विभाग में दैनिक भोगी बेलदार के रूप में काम करना शुरू किया था. वर्क-चार्ज्ड स्टेटस हासिल करने के लिए उन्होंने पूर्व प्रशासनिक ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया था. ट्रिब्यूनल ने 6 जुलाई 2017 को उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए विभाग को आदेश दिया था कि वर्ष 1995 से 2005 के बीच उनके कार्यदिवसों में जो कुछ दिनों की कमी रह गई थी, उसे माफ करने और उन्हें वर्क-चार्ज्ड स्टेटस देने के आदेश दिए जाएं.
ट्रिब्यूनल के स्पष्ट आदेश के बावजूद विभाग के सक्षम प्राधिकारी ने जून 2018 में एक नया आदेश जारी कर साहिब सिंह के दावे को यह कहते हुए फिर खारिज कर दिया कि उन्होंने वर्ष 1995 से 2005 के बीच हर साल न्यूनतम 240 दिन पूरे नहीं किए थे. विभाग ने इस मामले को नए सिरे से फैसला लेने का एक सामान्य अवसर मान लिया. इस कानूनी लड़ाई के लंबित रहने के दौरान ही मूल याचिकाकर्ता साहिब सिंह का निधन हो गया, जिसके बाद उनकी पत्नी गायत्री देवी और अन्य कानूनी वारिसों ने इस लड़ाई को जारी रखा.
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने विभाग को इस मामले पर नए सिरे से विचार करने या कोई नया फैसला लेने को नहीं कहा था. ट्रिब्यूनल ने साफ तौर पर माना था कि साहिब सिंह के कार्यदिवसों में बहुत मामूली कमी थी, जिसे माफ किया जाना चाहिए था. इसके बावजूद विभाग ने ट्रिब्यूनल के आदेश की मूल भावना के अनुरूप कार्रवाई करने के बजाय उनके दावे को फिर से खारिज कर दिया.
हाईकोर्ट ने विभाग के जून 2018 के वर्क-चार्ज्ड स्टेटस खारिज करने वाले आदेश को रद्द कर दिया है. अदालत ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वो साहिब सिंह के सेवाकाल के दौरान वर्ष 1995 से 2005 के बीच के कम दिनों को माफ करें और उन्हें नियत देय तिथि से वर्क-चार्ज्ड बेलदार का दर्जा दें. इसके साथ ही, उस तिथि से बनने वाले सभी एरियर और वित्तीय लाभ उनकी पत्नी व अन्य कानूनी वारिसों को तुरंत जारी किए जाएं. अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सक्षम न्यायिक या ट्रिब्यूनल के आदेश को विभाग अपनी सुविधा के अनुसार दोबारा जांच या निर्णय का विषय नहीं बना सकता. अधिकारियों को ऐसे आदेशों का पालन उनकी मूल भावना के अनुरूप करना अनिवार्य है.

