हिमाचल के इन नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के कामकाज पर HC की रोक, जानिए क्या है मामला?
हिमाचल की दो पंचायतों में पुराने प्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा नहीं होने पर हाईकोर्ट ने नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के कामकाज पर लगाई रोक.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : June 30, 2026 at 4:54 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज के चुनाव संपन्न होने के बाद नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों ने अपना कामकाज भी शुरू कर दिया है. लेकिन इसी बीच हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम मामले में सुनवाई करते हुए प्रदेश के जिला चंबा के पांगी और लाहौल स्पीति के केलांग सब डिवीजन में नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के कामकाज पर रोक लगा दी है.
हाल ही में पूरे प्रदेश के साथ-साथ इन दोनों सब डिवीजन में भी पंचायती राज के चुनाव संपन्न हुए थे. लेकिन, पुराने प्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ था. ऐसे में मामला हिमाचल हाईकोर्ट पहुंचा जहां मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की डबल बेंच ने मामले पर सुनवाई की.
मामले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विनय शर्मा ने बताया कि हाल ही में हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज के चुनाव संपन्न हुए. हिमाचल प्रदेश के जिला लाहौल स्पीति के सब डिवीजन केलांग और जिला चंबा के सोल्यूशन पांगी में भी चुनाव संपन्न होने के बाद पंचायत प्रतिनिधियों ने पद की शपथ ली. लेकिन दोनों सब डिवीजन केलांग और पांगी में पिछले चुनाव अक्टूबर 2021 में हुए थे. ऐसे में पुराने निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल 17 अक्टूबर 2026 को पूरा होना था. चुनाव के दौरान राज्य सरकार ने 6 जून को एक अधिसूचना जारी की. इस अधिसूचना में दोनों सब डिवीजन के पंचायत प्रधानों, उप-प्रधानों के साथ-साथ पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों का कार्यकाल 17 अक्टूबर 2026 तक जारी रखने के आदेश दिए गए थे.
अधिवक्ता विनय शर्मा ने आरोप लगाया कि पिछली अधिसूचना के 18 दिन बाद राज्य सरकार ने दबाव में आकर एक नई अधिसूचना जारी की. 24 जून 2026 को जारी की गई इस अधिसूचना में कहा गया कि 2021 में निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 27 जून को पूरा हो जाएगा और नए प्रतिनिधि कार्यभार संभालेंगे. जिस पर मामला हिमाचल हाईकोर्ट पहुंचा.
राज्य सरकार की 24 जून 2026 की अधिसूचना के खिलाफ पांगी के पंचायत प्रधानों की ओर से हिमाचल हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई. अधिवक्ता विनय शर्मा ने बताया कि अदालत के सामने उन्होंने दिल्ली के संविधान के अनुसार पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 5 वर्ष का हो सकता है. इसके अलावा कानून में किया गया किसी भी तरह का संशोधन भी अगले कार्यकाल से ही लागू किया जा सकता है.
याचिकाकर्ता पक्ष ने तर्क दिया कि पांगी और केलांग में पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 17 अक्टूबर को पूरा हो रहा है. ऐसे में राज्य सरकार की अधिसूचना असंवैधानिक है. जिस पर न्यायालय ने उनकी याचिका को स्वीकार करते हुए नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के कामकाज पर रोक लगा दी है.
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