प्रोबेशनर कर्मचारी को सिर्फ FIR के आधार पर नहीं निकाला जा सकता, हाईकोर्ट ने SBI का बर्खास्तगी आदेश किया रद्द
हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह का आदेश कर्मचारी के करियर पर कलंक लगाता है और उसके भविष्य को प्रभावित कर सकता है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : September 2, 2026 at 5:43 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रोबेशन यानी परिवीक्षा अवधि पर कार्यरत कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने याचिकाकर्ता गगनदीप सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए भारतीय स्टेट बैंक की ओर से जारी उनके बर्खास्तगी आदेशों को खारिज कर दिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि सेवा में रहते हुए दर्ज हुई किसी एफआईआर को आधार बनाकर प्रोबेशनर कर्मचारी को बिना विभागीय जांच के सीधे नौकरी से बर्खास्त नहीं किया जा सकता.
मामले के अनुसार गगनदीप सिंह को 23 जुलाई 2025 को हमीरपुर में भारतीय स्टेट बैंक के लिपिक संवर्ग में जूनियर एसोसिएट के पद पर नियुक्त किया गया था. उनकी नियुक्ति छह महीने की प्रोबेशन अवधि पर हुई थी. नौकरी ज्वाइन करने के बाद दिसंबर 2025 में उनके खिलाफ हमीरपुर सदर थाने में नशा तस्करी के तहत दो एफआईआर दर्ज हुईं. पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और जनवरी 2026 में उन्हें जमानत मिल गई.
इसके बाद एसबीआई ने पुलिस रिपोर्ट का हवाला देते हुए 22 जनवरी 2026 को गगनदीप सिंह की सेवाएं समाप्त कर दीं. बैंक ने कहा कि उनका चरित्र सत्यापन संतोषजनक नहीं था और बैंक का उन पर से विश्वास उठ चुका था. बैंक की ओर से अदालत में दलील दी गई कि प्रोबेशन अवधि के दौरान कर्मचारी को बिना कारण बताए सेवा से हटाने का अधिकार बैंक के पास है.
हाईकोर्ट ने इस दलील पर विचार करते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने नौकरी हासिल करते समय अपने पुराने आपराधिक मामलों को छिपाया होता, तो स्थिति अलग हो सकती थी और ऐसी परिस्थितियों में कार्रवाई की जा सकती थी. लेकिन गगनदीप सिंह के मामले में एफआईआर उनकी नियुक्ति और नौकरी ज्वाइन करने के बाद दर्ज हुई थी. अदालत ने पाया कि बैंक ने उन्हें असंतोषजनक कार्यप्रदर्शन के आधार पर नहीं, बल्कि एफआईआर दर्ज होने और बैंक का विश्वास खोने के आधार पर हटाया था.
हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह का आदेश कर्मचारी के करियर पर कलंक लगाता है और उसके भविष्य को प्रभावित कर सकता है. अदालत ने स्पष्ट किया कि जब किसी प्रोबेशनर कर्मचारी को कदाचार या आपराधिक मामले के आधार पर सेवा से हटाया जाता है, तो उसे अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना जरूरी है. ऐसी स्थिति में नियमित विभागीय जांच की आवश्यकता भी हो सकती है. अदालत ने इसी आधार पर एसबीआई के बर्खास्तगी आदेशों को रद्द कर दिया और गगनदीप सिंह की याचिका स्वीकार कर ली. इस फैसले में हाईकोर्ट ने प्रोबेशन अवधि में कार्यरत कर्मचारियों को भी प्राकृतिक न्याय और उचित प्रक्रिया के अधिकार के महत्व को रेखांकित किया है.
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