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लंबी व कठिन पढ़ाई के बाद डॉक्टर्स को क्यों दिया गया ट्रेनी नाम? जवाब देने के लिए सरकार ने HC से मांगा और समय

हिमाचल हाईकोर्ट ने नए नियुक्त हुए डॉक्टरों को ट्रेनी डॉक्टर का नाम देने पर गंभीर आपत्ति जताई थी.

Himachal High Court
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट (FILE@ETVBHARAT)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : January 8, 2026 at 10:11 PM IST

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शिमला: हिमाचल सरकार ने नवनियुक्त डॉक्टर्स को ट्रेनी नाम दिया था. इसे लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो अदालत ने सरकार से ट्रेनी नाम देने का कारण पूछा था. मामला पिछले साल 10 दिसंबर का है, जब हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए सरकार से पूछा था कि ये कैसा नाम है और अदालत को उनका पे स्केल बताया जाए. अब नए साल में मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने इस सवाल का जवाब देने के लिए हाईकोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग की है.

डॉक्टरों को ट्रेनी कहने पर कोर्ट ने जताई आपत्ति

एक महीने पहले ही हाईकोर्ट ने नए नियुक्त हुए डॉक्टरों को ट्रेनी डॉक्टर का नाम देने पर गंभीर आपत्ति जताई थी. अदालत ने राज्य सरकार से पूछा था कि लंबी व कठिन पढ़ाई करने के बाद डॉक्टरों को ट्रेनी ठहराने के पीछे क्या कारण है? क्या सरकार को नहीं पता कि एक युवा डॉक्टर कैसे बनता है? हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा था कि अगर सरकार की राज्य के निवासियों को उचित स्वास्थ्य सेवा देने की इच्छा है तो डॉक्टरों को सेवा सुरक्षा दी जानी जरूरी है. ऐसे में किसी डॉक्टर के लिए ट्रेनी नाम सही नहीं बैठता. एक ट्रेनी डॉक्टर से कौन सा मरीज भारी भरकम खर्च कर अपना इलाज करवाना चाहेगा.

जवाब नहीं दे पाई सरकार, अब मांगा समय

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के स्वास्थ्य सचिव को आदेश दिए थे कि कोर्ट को ट्रेनी मेडिकल अधिकारियों का पे-स्केल दिखाया जाए. एक माह बीत जाने पर भी सरकार अदालत के सवालों का जवाब नहीं दे पाई. अब सरकार ने नए साल में अदालत से जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है. हालांकि अदालत ने इस मांग की स्वीकार तो कर लिया है, लेकिन अदालत की सख्ती बरकरार है. अब कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई शीतकालीन अवकाश के कारण 6 अप्रैल को निर्धारित की है.

पिछली सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया था कि मेडिकल ऑफिसर को ट्रेनी नाम दिया गया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को इस बात पर नोटिस जारी कर पूछा था कि यह नाम क्या है? क्या ये डॉक्टर नियमित पे-स्केल पा रहे हैं और नियमित कैडर में हैं या नहीं? कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को नियमित कैडर में खाली पदों की संख्या की जानकारी पेश करने के लिए भी कहा है.

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