हिमाचल आबकारी विभाग के प्लास्टिक होलोग्राम टेंडर के खिलाफ PIL, हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को भेजे नोटिस
याचिका में कहा गया है कि यह प्रक्रिया प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2016 और प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान की भावना के विपरीत है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : June 25, 2026 at 6:29 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आबकारी विभाग द्वारा करीब 75 करोड़ रुपये के प्लास्टिक एक्साइज होलोग्राम लेबल की खरीद को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार समेत संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए हैं. अदालत ने सभी पक्षों से अगली सुनवाई से पहले अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति विपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई की. अदालत ने केंद्र सरकार, हिमाचल प्रदेश सरकार, आबकारी विभाग, हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए हैं. हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को मामले में अपना पक्ष रखने के लिए कहा है. इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को होगी।
पर्यावरण को लेकर दायर की गई है याचिका
यह जनहित याचिका देहरादून के अधिवक्ता और पर्यावरणविद् अभिनव थापर की ओर से दायर की गई है. याचिका में आबकारी विभाग की ओर से शराब की बोतलों पर इस्तेमाल होने वाले एक्साइज होलोग्राम लेबल की खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं. याचिका में दावा किया गया है कि करीब 75 करोड़ प्लास्टिक होलोग्राम लेबल की खरीद प्रस्तावित है, जो 36 माइक्रोन प्लास्टिक से बने हैं. याचिकाकर्ता ने इसे पर्यावरण के लिए नुकसानदायक बताते हुए नियमों के खिलाफ बताया है.
प्लास्टिक वेस्ट नियमों का हवाला
याचिका में कहा गया है कि यह प्रक्रिया प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2016, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान की भावना के विपरीत है. याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी इस टेंडर को संशोधित या रद्द करने की सलाह दी थी, लेकिन इसके बावजूद प्रक्रिया जारी रखी गई.
पेपर आधारित लेबल अपनाने की मांग
याचिका में यह भी कहा गया है कि कई राज्य अब पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पेपर आधारित और अन्य सुरक्षित सुरक्षा लेबल की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दे उठाते हुए इस प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की है. अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद संबंधित विभागों के जवाब आने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी.
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