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चमियाणा अस्पताल में निशुल्क लंगर लगा रहे सर्बजीत बॉबी को दी जाए जगह, इस पर बर्दाश्त नहीं होगी देरी: हाईकोर्ट

हिमाचल हाईकोर्ट ने चमियाणा अस्पताल में निशुल्क लंगर के लिए जगह उपलब्ध कराने का आदेश दिया है.

HIMACHAL HIGH COURT ON FREE LANGAR
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट (FILE@ETVBHARAT)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : January 7, 2026 at 9:31 PM IST

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Updated : January 7, 2026 at 9:51 PM IST

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शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश पारित किया है. हाईकोर्ट ने राजधानी से करीब 15 किलोमीटर दूर अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशिएलिटी (एआईएमएसएस) चमियाणा में एक संस्था की तरफ से संचालित किए जा रहे लंगर के लिए उपयुक्त जगह प्रदान करने के आदेश जारी किए हैं. हाईकोर्ट ने अस्पताल प्रशासन को सख्त आदेश जारी करते हुए कहा कि मामले की अगली सुनवाई से पहले ऑलमाइटी ब्लेसिंग्स नामक संस्था को मरीजों व तीमारदारों के लिए लंगर का आसानी से संचालन करने के लिए उपयुक्त जगह दी जाए. यदि ऐसा न हुआ और अदालत के आदेश के अनुसार जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो अस्पताल प्रशासन के संबंधित अधिकारियों को निजी तौर पर कोर्ट में उपस्थित होकर देरी का कारण बताना होगा.

दरअसल, चमियाणा सुपर स्पेशिएलिटी संस्थान में सुविधाएं मुहैया करवाने को लेकर हाईकोर्ट एक मामले की सुनवाई कर रहा है. इसी दौरान हाईकोर्ट के संज्ञान में लाया गया कि सर्बजीत बॉबी नामक व्यक्ति की संस्था ऑलमाइटी ब्लेसिंग्स चमियाणा में मरीजों व उनके तीमारदारों के लिए निशुल्क लंगर लगा रही है. चूंकि लंगर के लिए कोई उपयुक्त स्थान नहीं है, लिहाजा जरूरतमंद लोग खुले आसमान के नीचे कड़ाके की सर्दी में लंगर ग्रहण करने को मजबूर हैं. इस पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया व न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने अस्पताल प्रशासन को सख्त आदेश जारी किए. खंडपीठ ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई तक संस्था को अस्थाई तौर पर उपयुक्त स्थान दिया जाए, ताकि लंगर का संचालन आसानी से हो सके.

उल्लेखनीय है कि वेहले बॉबी के नाम से चर्चित सर्बजीत सिंह बॉबी कई साल से रीजनल कैंसर सेंटर शिमला व अन्य अस्पतालों में निशुल्क लंगर लगाते आ रहे हैं. चमियाणा में भी उन्होंने ये सेवा शुरू की है. चमियाणा में बेशक शानदार मेडिकल सुपर स्पेशिएलिटी सेंटर बन गया है, लेकिन यहां सुविधाओं का अभाव है. ऐसे में मरीजों व तीमारदारों को साफ-सुथरा व ताजा खाना उपलब्ध करवाने के लिए संस्था आगे आई है. मरीजों व तीमारदारों को साफ-सुथरे व ताजा भोजन के लिए कोई पैसा खर्च नहीं करना पड़ता, लेकिन कोई उपयुक्त स्थान न होने के कारण ये लंगर खुले में लगता है. कड़ाके की सर्दी में आजकल परेशानी हो रही है.

खंडपीठ को बताया गया था कि मरीजों और उनके साथ आए लोगों को संस्था निशुल्क भोजन दे रही है. उपयुक्त स्थान उपलब्ध न होने के बावजूद संस्था इस नेक कार्य को जारी रखे हुए है. इस पर मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ ने अस्पताल प्रशासन को आदेश दिए कि संस्था को अस्थायी रूप से कुछ जगह दी जाए, ताकि मरीज और उनके साथ आए लोग सड़क किनारे खड़े होकर परेशानी में भोजन करने की बजाय एक जगह आराम से खाना खा सकें. खंडपीठ ने ये स्पष्ट किया कि अगर अगली सुनवाई की तारीख तक जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो संबंधित अधिकारियों को अदालत में मौजूद होकर बताना होगा कि उनकी तरफ से जगह देने में देरी क्यों हो रही है. हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च निर्धारित की है.

एमिकस क्यूरी ने रिकॉर्ड पर रखे सुझाव

मामली की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी यानी कोर्ट मित्र और सीनियर एडवोकेट बिमल गुप्ता कुछ सुझाव रिकॉर्ड पर रखे. इसके अलावा एडवोकेट देवेने खन्ना और हाई पावर्ड कमेटी के सदस्य ने भी कुछ लिखित सुझाव दिए. इनमें पहला सुझाव था कि शिमला में तीन एंट्री सड़कों पर चमियाणा सुपर स्पेशिएलिटी संस्थान की दिशा दिखाने वाले होर्डिंग/साइन बोर्ड हों. ये साइन बोर्ड एक तरह से गायब हैं. यानी तारा देवी की तरफ से घणाहट्टी-टुटू की ओर से व कुफरी-नालदेहरा की तरफ से होर्डिंग लगे होने चाहिए.

इसी तरह, आईएसबीटी से भट्टाकुफर, विक्ट्री टनल से आईजीएमसी होते हुए संजौली, सर्कुलर रोड मेन शिमला से संजौली और ढली से भट्टाकुफर तक कोई साइन बोर्ड नहीं हैं. इसके अलावा भट्टाकुफर से चमियाणा अस्पताल तक कुल 2.4 किलोमीटर के मार्ग का 900 मीटर का पैच सिंगल लेन सडक़ है. इसे चौड़ा करने के लिए काम आरंभ नहीं हुआ है, जबकि पहले भी कई बार जमीन अधिग्रहण के बारे में निर्देश जारी किए गए हैं. इस पर अदालत ने सड़क चौड़ी करने की प्रशासनिक मंजूरी का काम अगली सुनवाई की तारीख तक पूरा करने के आदेश दिए.

हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिए कि अधिग्रहण प्रक्रिया के अलावा स्ट्रीट लाइटों के लिए राशि के साथ-साथ बिजली के खंभे और हाई ट्रांसमिशन लाइनों को हटाने के लिए बिजली बोर्ड को दी जाने वाली राशि 30 जनवरी तक जारी की जाए. अदालत ने कहा कि यहां कम से कम 1000 वाहनों की पार्किंग का मुद्दा गंभीर विचार की मांग करता है. परिसर में जाहिर तौर पर केवल 60 वाहनों की पार्किंग व्यवस्था है. यह एक मेडिकल सुपर स्पेशिएलिटी संस्थान की जरूरत से बहुत कम है.

अदालत ने लोक निर्माण विभाग से पूछा है वो पार्किंग के इस मुद्दे से कैसे निपटेंगे? कोर्ट ने कहा कि आईएसबीटी और आईजीएमसी अस्पताल, इन दोनों स्थानों से चमियाणा तक यात्रा सुविधाओं की कमी है. इस पर विचार करने की आवश्यकता है. हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख से पहले एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक को इस संबंध में एक हलफनामा दाखिल करने के आदेश भी दिए.

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Last Updated : January 7, 2026 at 9:51 PM IST