फोरलेन निर्माण में बिना अधिगृहीत संपत्ति के नुकसान पर हाईकोर्ट की बड़ी व्यवस्था, कहा-वास्तविक नुकसान पर मिले मुआवजा
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने NHAI की याचिका का निपटारा करते हुए फोरलेन निर्माण में बिना अधिगृहीत संपत्ति के नुकसान पर बड़ी व्यवस्था दी.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 25, 2025 at 7:29 AM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फोरलेन निर्माण के कारण बिना अधिगृहीत संपत्ति को पेश आने वाले नुकसान के मुआवजे पर बड़ी व्यवस्था दी है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये मुआवजा वास्तविक नुकसान के मूल्यांकन के आधार पर होना चाहिए न कि केवल अनुमान के आधार पर. अदालत ने कहा कि जब भी किसी व्यक्ति की संपत्ति किसी परियोजना प्रस्तावक, चाहे वह एनएचएआई ही क्यों न हो, की वजह से क्षतिग्रस्त होती है तो ऐसे पक्ष को स्पष्ट रूप से मुआवजा दिया जाना चाहिए. मुआवजा वास्तविक नुकसान के आधार पर होना चाहिए और ये अनुमानों पर आधारित नहीं हो सकता. हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल ने एनएचएआई की याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि अधिग्रहण की गई संपति और अधिग्रहण से बाहर की संपति को पहुंचने वाले नुकसान के मूल्यांकन में डिफरेंस है.
अदालत ने कहा कि किसी काल्पनिक सूत्र का प्रयोग करते हुए नुकसान का मुआवजा देना कानून रूप से मान्य नहीं है. किसी परियोजना के लिए जिस जमीन मालिक की भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, उसे मुआवजा देने के मकसद से मापदंड पूरी तरह से अलग होते हैं. सक्षम न्यायालय या सक्षम प्राधिकारी द्वारा मुआवजा देते समय एक से अधिक घटकों पर विचार किया जाता है. परियोजना निर्माणकर्ता के कुछ कृत्यों और चूक के कारण संपत्ति को हुए नुकसान के लिए किसी व्यक्ति को मिलने वाले हर्जाने का निर्धारण करते समय समान सूत्र नहीं अपनाया जा सकता. ऐसे मामलों में, प्रभावित पक्ष को दिया जाने वाला मुआवजा यथार्थवादी होना चाहिए और सक्षम निकाय द्वारा नुकसान के वास्तविक आकलन पर आधारित होना चाहिए. यह समझना आवश्यक है कि बिना अधिगृहित संपत्ति जिसे नुकसान पहुंचा हो, उसका मालिक इस संपति का निरंतर स्वामी और कब्जेदार बना रहता है. भूमि मालिक इस जमीन का उपयोग अपनी इच्छानुसार किसी भी उद्देश्य के लिए कर सकता है.
मामले पर सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया था कि 08.06.2020 की अधिसूचना के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने निजी भूमि, इमारतों और ढांचों को हुए नुकसान के आकलन सहित मुद्दों को सुलझाने और उनका समाधान करने के लिए समितियों का गठन किया है. इसमें एनएचएआई की फोरलेन परियोजनाओं के निर्माण के कारण अधिगृहित सड़क सीमा से बाहर स्थित निजी भूमि और संरचनाओं को हुए नुकसान का आकलन करना भी शामिल है. एनएचएआई ने कोर्ट को बताया कि सोलन जिले के लिए गठित ऐसी ही एक समिति ने निजी प्रतिवादियों की संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन किया. यह संपत्ति सड़क सीमा से बाहर स्थित थी. विवादित सिफारिशों के अनुसार, 1,03,81,160/- रुपये की राशि मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया गया है.
एनएचएआई ने डीसी सोलन की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा दिए गए इस मुआवजे से असंतुष्ट होने पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. कोर्ट ने इस समिति की सिफारिशों को रद्द करते हुए निर्देश दिया था कि वह मामले की पुन: सुनवाई करे और निजी प्रतिवादियों को मिलने वाले मुआवजे पर नए सिरे से फैसला ले. निजी प्रतिवादियों की संपत्ति को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन करने के लिए, विशेषज्ञों के जरिए विशेष रूप से जांच की जाए. साथ ही कार्यवाही विवरण में यह दर्ज किया जाए कि क्या कुछ सुधारात्मक उपाय करने के बाद संपत्ति का उपयोग किया जा सकता है या नहीं? साथ ही कहा गया कि क्या संपत्ति वास्तव में हमेशा के लिए अनुपयोगी हो गई है. समिति द्वारा उचित समझे जाने वाले विशेषज्ञों की सहायता से मुआवजे का आकलन किया जाए. समिति को आवश्यक कार्रवाई शीघ्रता से करने और 28.02.2026 को या उससे पहले नए कार्यवाही विवरण तैयार करने के निर्देश दिए गए.

