जमीन खरीद मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा-बयाना राशि का ही चेक बाउंस हो जाए तो खरीदार सौदा पूरा करने में सक्षम नहीं
हिमाचल हाईकोर्ट ने जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़े एक मामले में सुनवाई की. इस दौरान हाईकोर्ट ने मामले में अहम फैसला सुनाया.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : July 6, 2026 at 9:04 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जमीन की खरीद-ओ-फरोख्त से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत को स्पष्ट किया है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई खरीदार बयाना राशि का चेक ही बाउंस करवा दे को इससे साफ पता चलता है कि वो जमीन का सौदा पूरा करने के लिए कभी तैयार या सक्षम ही नहीं था. हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में किया गया कोई भी दावा दिखावटी माना जाएगा. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा की एकल पीठ ने इस टिप्पणी के साथ ही एक आदेश पारित कर दो अलग-अलग दीवानी मुकदमों को को खारिज कर दिया.
हाईकोर्ट के समक्ष पेश किया गया यह मामला सोलन जिला के बद्दी में स्थित दो भूखंडों से जुड़ा है. मामले के अनुसार वादी पक्ष ने साल 2018 में प्रतिवादी के साथ 1 करोड़ 60 लाख रुपये में इन प्लॉटों को खरीदने का एक समझौता किया था. समझौते के तहत वादी ने बयाने के तौर पर 50 लाख रुपये का एक चेक दिया था. तय किया गया कि बाकी की रकम रजिस्ट्री के समय दे दी जाएगी. इसी बीच, जब प्रतिवादी ने वह चेक पेमेंट के लिए संबंधित बैंक में लगाया, तो वादी के खाते में अपर्याप्त राशि यानी इनसफिशिएंट बैलेंस होने के कारण वह चेक बाउंस हो गया.
इसके बावजूद, वादी ने बाद में अदालत का दरवाजा खटखटाकर मांग उठाई कि प्रतिवादी को जमीन उसके नाम ट्रांसफर करने का आदेश दिया जाए. सुनवाई के दौरान वादी ने अदालत में दलील पेश की थी कि उसने 50 लाख रुपये का चेक केवल सुरक्षा यानी सिक्योरिटी के तौर पर दिया था. साथ ही कहा कि दोनों पक्षों में आपसी सहमति थी कि इस चेक को बैंक में नहीं डाला जाएगा. अदालत ने जब लिखित समझौते की बारीकी से जांच की, तो उसमें ऐसी किसी भी शर्त या आपसी समझ का कोई जिक्र नहीं मिला.
हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कहा कि वादी ने साफ तौर पर अदालत से तथ्य छुपाए और झूठे दावों के साथ केस दायर किया. कोर्ट ने कहा कि विशिष्ट अनुतोष यानी स्पेसेफिक परफार्मेंस एक न्यायसंगत और विवेकधीन राहत है, जो भी पक्षकार अदालत में झूठे दावों के साथ आता है, वह ऐसी राहत पाने का हकदार नहीं है. बयाना राशि का चेक बाउंस होना यह साबित करता है कि खरीदार के पास समझौते के पहले दिन से ही पैसे उपलब्ध नहीं थे. एक समझदार आदमी कभी भी बयाने का चेक बाउंस नहीं होने देगा, अगर वह वाकई संपत्ति खरीदने के प्रति गंभीर है.
हाईकोर्ट ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11(ए) के तहत अदालतों का यह फर्ज है कि वे ऐसे दिखावटी मुकदमों को शुरुआती स्तर पर ही खारिज कर दें, ताकि न्यायिक समय बर्बाद न हो. हाईकोर्ट ने वादी के दोनों मुकदमों को बिना ट्रायल के ही खारिज कर दिया.
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