पोंग डैम सैंक्चुअरी में शिकार और अवैध खेती मामले में हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को भेजे नोटिस
पोंग डैम सैंक्चुअरी और वेटलैंड से जुड़े मामले पर हिमाचल हाईकोर्ट ने सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : January 9, 2026 at 10:46 AM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पोंग डैम सैंक्चुअरी और वेटलैंड से जुड़े एक मामले में राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं. हाईकोर्ट में पोंग डैम सैंक्चुअरी और वेटलैंड में अवैध अतिक्रमण करने वालों और शिकारियों के खिलाफ याचिका दायर की गई थी. इस याचिका पर हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और जस्टिस जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने सुनवाई की. अदालत ने इस मामले में डीसी कांगड़ा और संबंधित फॉरेस्ट कंजरवेटर को उपयुक्त कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं.
वेटलैंड से तुरंत बाड़ हटाने के आदेश
मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने इस मामले में डीसी कांगड़ा और संबंधित फॉरेस्ट कंजरवेटर को वेटलैंड क्षेत्र पर लगाई गई सभी बाड़ को तुरंत प्रभाव से हटाने के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने सैंक्चुअरी और वेटलैंड क्षेत्र में किसी तरह की खेती करने पर भी रोक लगाने को कहा है. अदालत ने कहा कि फसलें उगाने के लिए किया जा रहा कीटनाशक और वीड किलर दवाइयों का उपयोग वन्यजीवों के लिए घातक है. अदालत ने वेटलैंड क्षेत्र में फसलें उगाने वालों को अतिक्रमणकारी मानते हुए कहा कि इन व्यक्तियों को वेटलैंड का उपयोग करने का कोई अधिकार नहीं है. कोर्ट ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों को कानून के अनुसार कदम उठाने के भी आदेश दिए हैं. इसके अलावा अदालत ने वन विभाग को वेटलैंड्स की खेती सीमा दिखाने के लिए ड्रोन से तस्वीरें लेने को भी कहा है. हाईकोर्ट ने सिविल अदालतों को भी कब्जाधारियों के खिलाफ कोई निषेधाज्ञा जारी न करने के आदेश दिए हैं.
'वेटलैंड पर हो रही अवैध खेती, प्रवासी पक्षियों का हो रहा शिकार'
पोंग डैम सैंक्चुअरी और वेटलैंड से जुड़े मसलों पर हिमाचल हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. याचिका में कहा गया है कि पोंग डैम सेंचुरी में वन्यजीवों और पक्षियों का शिकार किया जा रहा है. शिकार के लिए कुछ खाने योग्य सामग्री से लेपित विस्फोटक पदार्थों का उपयोग किया गया है. याचिका में ऐसी सामग्री खाने से गायों को भी नुकसान होने की बात कही है. साथ ही इससे जुड़ी तस्वीरें भी कोर्ट के समक्ष रखी गई हैं. याचिका में आरोप है कि पानी का स्तर घटने से निचले वेटलैंड क्षेत्रों में खेती की जाती है. पूरे इलाके के वन्य जीव अभ्यारण के अंदर आने के बावजूद ऐसी खेती पर कोई रोक नहीं है. याचिका कर्ता का आरोप है कि खेती की आड़ में वेटलैंड का स्थानीय निवासी और अन्य लोग उपयोग कर रहे हैं. खासतौर पर उत्तरी गोलार्ध जैसे रूस से आने वाले प्रवासी पक्षियों का बिना रोक-टोक शिकार किया जा रहा है. याचिका में इन सभी मामलों पर उचित कार्रवाई की मांग की गई है.

