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शिमला की ऐतिहासिक टाउन हॉल इमारत में फिर से चल रहा हाई एंड कैफे, हाईकोर्ट का सरकार व एमसी को नोटिस

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने टाउन हॉल इमारत में संचालित हाई एंड कैफे को लेकर राज्य सरकार और नगर निगम को नोटिस भेजा.

Shimla Town Hall building
शिमला टाउन हॉल भवन (File ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : January 8, 2026 at 7:43 AM IST

3 Min Read
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शिमला: ब्रिटिशकालीन दौर की शिमला की ऐतिहासिक इमारत टाउन हॉल में हाई एंड कैफे के संचालन का मामला फिर से सुर्खियों में है. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने टाउन हॉल में हाई एंड कैफे खोल कर इसके ऐतिहासिक स्वरूप में बदलाव करने और इमारत के रखरखाव से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के बाद राज्य सरकार व नगर निगम शिमला को नोटिस जारी किया है. मामले में हाईकोर्ट को बताया गया था कि पहले भी अदालत ने टाउन हॉल शिमला में फूड कोर्ट चलाए जाने पर एक आदेश पारित किया था.

हिमाचल हाईकोर्ट ने 10 जनवरी 2024 को पारित किए गए एक फैसले में नगर निगम शिमला की टाउन हॉल इमारत में इसके संचालन पर रोक लगाई थी. उस समय इमारत में फूड कोर्ट संचालक कंपनी देवयानी इंटरनेशनल को आदेश दिए गए थे कि इस ऐतिहासिक बिल्डिंग में खाने-पीने का ये केंद्र न चलाएं. अदालत के इस आदेश के बाद मामले के याचिकाकर्ता ने सशर्त अपनी याचिका वापिस ले ली थी. याचिका वापस लेने के कारण हाईकोर्ट का उक्त अंतरिम आदेश भी रद्द हो गया था. अब नई परिस्थितियों में फिर से टाउन हॉल में हाई एंड कैफे का संचालन शुरू हो गया. ऐसे में एक बार फिर से इस इमारत के ऐतिहासिक स्वरूप से छेड़छाड़ को लेकर जनहित याचिका दाखिल की गई है.

उल्लेखनीय है कि टाउन हॉल शिमला शहर का बहुत प्रतिष्ठित व चर्चित ऐतिहासिक स्थल है. इस इमारत को हाल ही के वर्षों में एशियन विकास बैंक के सहयोग से भारी खर्च कर रिस्टोर किया गया है. हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे विरासत स्थल हमेशा अनमोल होते हैं. प्राचीन युग की साक्षी रही यह हेरिटेज बिल्डिंग शिमला का एक खजाना है. ऐसे में इस इमारत को सार्वजनिक ट्रस्ट में माना जा सकता है. अदालत ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि इस विरासत को विरासत के लिए संरक्षित करना होगा.

मामले में दाखिल की गई याचिका में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम शिमला ने प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम 1958, व टीसीपी अधिनियम का उल्लंघन करते हुए इस विरासत संपत्ति को हाई-एंड कैफे में बदलने की अनुमति दी है. इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व नगर निगम को नोटिस जारी किया है. इसके अलावा शिमला से जुड़े एक अन्य पहलू में हाईकोर्ट ने शहर में पैदल चलने वाले रास्तों की संख्या बढ़ाने की बजाए इन्हें घटाने पर भी चिंता जाहिर की. हाईकोर्ट ने शिमला डेवलपमेंट प्लान-2041 में शिमला शहर के ऐतिहासिक स्वरूप को बरकरार रखने को लेकर बनाए प्रावधानों के कार्यान्वयन पर भी राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है. मामले पर सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की गई है.

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