डेली वेजर्स को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, राज्य सरकार को देने होंगे सभी परिणामी लाभ, देरी पर भरना होगा ब्याज
न्यायालय ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता 1998 में नियुक्त हुए थे, इसलिए वे वर्ष 2008 में ही डेली वेजर का दर्जा पाने के हकदार थे.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 27, 2026 at 10:31 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पार्ट-टाइम वाटर कैरियर्स को डेली वेजर (दैनिक वेतनभोगी)का दर्जा प्रदान करने के मामले में राज्य सरकार के फैसले को गैर-कानूनी ठहराते हुए याचिकाकर्ताओं को बड़ी राहत दी है. हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने इस मामले में दाखिल की गई याचिका का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वो याचिकाकर्ताओं को 10 वर्ष की पार्ट-टाइम सेवा पूरी करने की तिथि से ही होल टाइम कंटीजेंट वर्कर (डेली वेजर) का दर्जा प्रदान करे. साथ ही उन्हें इससे उपजे सभी वित्तीय लाभ भी दिए जाएं.
मामले के अनुसार भूपिंदर कुमार व अन्य ने वर्ष 2012 में एक रिट याचिका दाखिल की थी. याचिकाकर्ताओं को 1998 में पार्ट-टाइम वाटर कैरियर के रूप में नियुक्त किया गया था. शिक्षा विभाग ने 4 अक्टूबर 2012 को उन्हें डेली वेजर का दर्जा दिया. फिर उसके बाद विभाग ने वर्ष 2016 में उनकी सेवाएं नियमित कर दी. मामले की सुनवाई में अदालत ने पाया कि लीला देवी बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य केस में खंडपीठ की तरफ से तय दिशा निर्देश के तहत पार्ट-टाइम वाटर कैरियर्स को 10 वर्ष की सेवा पूरी होने पर डेली वेजर का दर्जा मिलना अनिवार्य है. फिर डेली वेजर के रूप में 8 वर्ष की सेवा (प्रतिवर्ष न्यूनतम 240 कार्य दिवस) पूरी करने के बाद उसका चतुर्थ श्रेणी पदों पर नियमितीकरण का प्रावधान है.
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चूंकि याचिकाकर्ता 1998 में नियुक्त हुए थे, इसलिए वे वर्ष 2008 में ही डेली वेजर का दर्जा पाने के हकदार थे. राज्य सरकार द्वारा उन्हें वर्ष 2012 में ये दर्जा देना कानून की नजर में सही नहीं है. अदालत ने कहा कि 2008 से 8 साल की डेली वेज सेवा पूरी होने के बाद 2016 में किया गया नियमितीकरण नियमों के अनुसार सही है, इसलिए इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. याचिकाकर्ताओं को देय सभी बकायों और सीनियोरिटी के लाभ जारी किए जाएं. सभी वित्तीय बकाया राशि का भुगतान आदेश की तारीख से तीन महीने के भीतर किया जाना आवश्यक है. यदि तीन महीने के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो देय राशि पर निर्णय की तारीख से वास्तविक भुगतान की तारीख तक 6 प्रतिशत सालाना दर से ब्याज लगेगा.

