शिमला में ब्रिटिश काल की इस 137 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत की दयनीय हालत पर केंद्र सरकार को नोटिस, HC ने पूछा ये सवाल
कभी वायसरीगल लॉज और राष्ट्रपति भवन रही ये इमारत आज इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी के नाम से जानी जाती है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : January 7, 2026 at 10:13 PM IST
|Updated : January 7, 2026 at 10:56 PM IST
शिमला: ब्रिटिश काल में 137 साल पहले बनी ऐतिहासिक इमारत वायसरीगल लॉज की दयनीय हालत पर हिमाचल हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. आजादी के बाद वायसरीगल लॉज को राष्ट्रपति भवन बनाया गया था. वर्ष 1965 में तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने इसे उच्च अध्ययन को समर्पित किया और वर्तमान में ये इमारत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी के तौर पर पहचानी जाती है. इस इमारत का बेहतर रखरखाव न होने पर हाईकोर्ट ने चिंता जताई है.
हाईकोर्ट ने शिमला के ऐतिहासिक वैभव से जुड़ी विरासतों के रखरखाव में हो रही लापरवाही पर कड़ा संज्ञान लिया है. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया व न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने इन इमारतों के रखरखाव को लेकर केंद्र सरकार के साथ-साथ हिमाचल सरकार व नगर निगम शिमला को नोटिस जारी किया है.
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछे अहम सवाल
मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ ने नोटिस में केंद्र सरकार से पूछा है कि इस ऐतिहासिक इमारत के रखरखाव में उसे क्या अड़चन आ रही हैं? अदालत ने कहा कि यह इमारत शिमला की एक सांस्कृतिक धरोहर है. स्कॉटिश शैली की यह इमारत लॉर्ड डफरिन के शासनकाल में वर्ष 1884 से 1888 के बीच बनाई गई थी. भारत की आजादी तक यह इमारत वायसरीगल लॉज के रूप में उपयोग में लाई जाती थी. आजादी के बाद इसे राष्ट्रपति भवन बनाया गया.
आजादी से पहले सत्ता का केंद्र रहा वायसरीगल लॉज
वर्ष 1965 में इसे देश के शिक्षा मंत्रालय ने अपने अधीन ले लिया. फिर यहां सर्वपल्ली राधाकृष्णन के सपने के रूप में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी की स्थापना की गई. यह इमारत 1888 से 1947 तक ब्रिटिश सरकार की केंद्र रही. भारत के विभाजन से पहले स्वतंत्रता को लेकर यहां कई महत्वपूर्ण सम्मेलन हुए. कई बैठकों का आयोजन किया गया? वर्ष 1945 में शिमला सम्मेलन और 1946 में शिमला कैबिनेट मिशन इस भवन में आयोजित ऐतिहासिक घटनाक्रम थे. अब इमारत के कुछ हिस्से आम जनता और सैलानियों के लिए खुले हैं. वहीं, इमारत के कुछ हिस्से बंद भी पड़े हैं.
मामले की सुनवाई में हाईकोर्ट को बताया गया था कि इमारत की तीन भूमिगत मंजिलों का रखरखाव भी नहीं किया गया है. इसके अलावा यहां नेपाल नरेश की तरफ से भेंट किया गया ऐतिहासिक अष्टधातु का घंटा चोरी हो चुका है। सीबीआई भी उस चोरी का केस सुलझा नहीं सकी है.
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