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हिमाचल HC का बड़ा फैसला, किसी कर्मी को निलंबित करने से पहले कारण बताओ नोटिस देना जरूरी नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि निलंबन कोई दंड नहीं है. ऐसे में याचिका मान्य नहीं है और इसे खारिज किया जाता है.

Himachal High Court
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट (FILE@ETVBHARAT)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : May 12, 2026 at 10:20 PM IST

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शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों से जुड़ा एक बड़ा फैसला दिया है. अदालत का ये फैसला निलंबन से पहले कारण बताओ नोटिस देने से संबंधित है. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान ये स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी को निलंबित करने से पहले कारण बताओ नोटिस जारी करना अनिवार्य नहीं है. इस टिप्पणी के साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता रवि की तरफ से दाखिल याचिका को खारिज कर दिया.

हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि निलंबन कोई दंड नहीं है. मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता ने एक प्राधिकारी (Authority) की तरफ से पारित निलंबन आदेश को इस आधार पर चुनौती दी थी कि उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही विचाराधीन है. इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से निलंबन आदेश के विरुद्ध याचिका की गुणवत्ता पर सवाल किया.

हाईकोर्ट ने कहा था कि जब यह स्थापित कानून है कि निलंबन कोई दंड नहीं है तो यह याचिका कैसे मान्य है. वहीं, याचिकाकर्ता का कहना था कि उसे निलंबित करने के कारण पूरी तरह से निराधार हैं, क्योंकि याचिकाकर्ता आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं था. यह भी तर्क दिया गया था कि याचिकाकर्ता को निलंबित करने से पहले कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया था.

हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह मामले की सुनवाई का वह चरण नहीं है जब न्यायालय याचिकाकर्ता की उन आधारों के संबंध में दोषसिद्धि के मुद्दे पर विचार करे, जिन पर अनुशासनात्मक प्राधिकारी की इच्छा होने पर याचिकाकर्ता के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की जा सकती है. अदालत ने कहा कि निलंबन कोई सजा नहीं है और इसके लिए कारण बताओ नोटिस जारी करना अनिवार्य नहीं कहा जा सकता.

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