हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों की सीनियरिटी और वित्तीय लाभ का मामला, हाईकोर्ट में सुनवाई आज
हिमाचल में कर्मचारियों ने सरकार के हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती और सेवा शर्तें विधेयक-2024 को हाईकोर्ट में चुनौती दी है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : January 2, 2026 at 10:35 AM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की सीनियरिटी और वित्तीय लाभ के मामले में आज हिमाचल हाईकोर्ट में सुनवाई होगी. हाईकोर्ट में हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती व सेवा शर्तें विधेयक 2024 को चुनौती दी गई है. इस मामले पर न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है. आज इस मामले में AG अपनी बहस पूरी करेंगे. इसके बाद अदालत की ओर से वादी पक्ष का रिबटल सुना जाना है.
मामले में अभी राज्य की ओर से बहस जारी
इस मामले में अब तक याचिकाकर्ता अपनी ओर से बहस पूरी कर चुका है. अब इस मामले में स्टेट की ओर से बहस की जा रही है. आज हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में फिर सुनवाई होनी है, जिसमें AG अपनी बहस पूरी कर सकते हैं. इसके बाद मामले में याचिकाकर्ता की ओर से रिबटल में स्टेट की ओर से की गई बहस का जवाब देना है. लिहाजा अदालत में आज फिर मामले पर लंबी बहस होने की संभावना है. मामले में राज्य की सुप्रीम कोर्ट और पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया भी अपीयर हो चुके हैं. वहीं, अब AG अनूप रतन की ओर से बहस पूरी की जा रही है.
राज्य में सरकारी कर्मचारियों की भर्ती और सेवा शर्तों वाले विधेयक को मिली है चुनौती
साल 2024 के दिसंबर महीने में शीतकालीन सत्र के दौरान सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती और सेवा शर्तें विधेयक-2024 पारित किया था. इस विधेयक के पारित होने से 2003 के बाद नियमित होने से पहले अनुबंध अवधि काटने वाले व्यक्तियों को बैक डेट से वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा. ऐसे में प्रदेश सरकार के हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती और सेवा शर्तें विधेयक-2024 को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है. इससे पहले प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के अनुबंध की समय अवधि अलग-अलग होने के बाद वरिष्ठता और वित्तीय लाभ को लेकर सरकारी कर्मचारी अदालत पहुंचे थे. जिसमें हिमाचल हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नियुक्ति की तारीख से भी वित्तीय लाभ देने का फैसला सुनाया था.

