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शिमला मेयर का कार्यकाल बढ़ाने वाले मामले में अब 5 मार्च को सुनवाई, याचिकाकर्ता की ओर से बहस पूरी

शिमला के महापौर का कार्यकाल बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार एक अध्यादेश लाई थी.

Shimla Mayor extending tenure case
शिमला नगर निगम मेयर कार्यकाल मामले में सुनवाई (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : March 2, 2026 at 6:52 PM IST

3 Min Read
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शिमला: हिमाचल प्रदेश में शिमला नगर निगम के महापौर का कार्यकाल बढ़ाने वाले मामले में आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. अदालत इस मामले में दोनों पक्षों की बहस सुन रही है. आज सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बहस पूरी हो गई है. वहीं, इस मामले में राज्य की ओर से बहस जारी है. अगली सुनवाई में राज्य अपनी ओर से बहस पूरी कर सकता है. हिमाचल हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की डिवीजन बेंच मामले में सुनवाई कर रही है. मामले में अगली सुनवाई 5 मार्च को होनी है.

शिमला मेयर का कार्यकाल बढ़ाने के मामले में HC में सुनवाई

शिमला के महापौर का कार्यकाल बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार एक अध्यादेश लाई थी. इसके बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंचा था. अदालत में आतंकवादी पक्ष की ओर से बहस पूरी हो गई है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सुधीर ठाकुर ने दलील रखी है कि, "अध्यादेश कानूनी तौर पर समाप्त हो जाता है. ये अवधि पूरी हो चुकी है और मेयर के कार्यकाल को ढाई वर्षों से अधिक करने वाला कोई कानून मौजूद नहीं है."

शिमला नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान (ETV Bharat)

अधिवक्ता सुधीर ठाकुर ने कहा है, "न्यायालय के सामने भी उन्होंने अपनी दलील रखी है और अदालत ने राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट देने को कहा है. पुराने एक्ट के तहत MC शिमला मेयर का कार्यकाल 14 नवंबर 2025 को पूरा हो चुका है. वहीं, मामले में राज्य का पक्ष रख रहे AG अनूप रतन की ओर से दलीलें में रखी जानी है. ऐसे में इस मामले पर 5 मार्च को फिर सुनवाई होगी."

MC ने राज्यपाल को भेजा जल्द बिल को मंजूरी देने का प्रस्ताव: मेयर

मामले में शिमला नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान को पार्टी बनाया गया है. शिमला में मीडिया से बातचीत करते हुए मेयर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि, "सरकार ने अध्यादेश लाकर महापौर का कार्यकाल बढ़ाया था. इसको लेकर राज्य सरकार ने विधानसभा से पारित संशोधन विधेयक भी राज्यपाल को भेजा है. अब इस विधेयक को केवल राज्यपाल से मंजूरी मिलनी है. इस संबंध में नगर निगम के 29 पार्षदों ने राज्यपाल को एक प्रस्ताव भेजा है. इसमें 24 कांग्रेस, 1 CPI(M) और नॉमिनेटेड पार्षद शामिल हैं. इस प्रस्ताव में राज्यपाल से इस बिल को मंजूरी देने का आग्रह किया गया है."

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