हिमाचल प्रदेश पंचायत चुनाव मामला: हिमाचल हाई कोर्ट में बुधवार लगातार दूसरे दिन फिर होगी सुनवाई
हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर की अगुवाई वाली खंडपीठ मामले में 7 जनवरी को भी सुनवाई करेगी.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : January 6, 2026 at 10:15 AM IST
|Updated : January 6, 2026 at 5:23 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के मामले में आज हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. अदालत में आज इस मामले पर बहस की गई है. अब मामले पर बुधवार, 7 जनवरी को लगातार दूसरे दिन फिर सुनवाई होगी. न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की अदालत अब इस मामले की सुनवाई कर रही है. इससे पहले मामला CJ न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ के सामने था. CJ कोर्ट ने मामले को डिवीजन बेंच एक यानी न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की अदालत के सामने रखने के आदेश दिए थे.
मामले में बुधवार को फिर सुनवाई, स्टेट देगा बहस का जवाब
अधिवक्ता डिक्कन ठाकुर और अन्य की याचिका पर आज न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई की. आज सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अदालत में आर्गुमेंट किए गए हैं. वादी पक्ष की बहस का जवाब अब राज्य की ओर से दिया जाना है. मामला न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ में बुधवार को दोबारा लिस्ट किया गया है. हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाते हुए हिमाचल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है.
मामले पर मुख्य न्यायाधीश की अदालत में भी हो चुकी है बहस
हिमाचल हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान देवेंद्र नेगी बनाम स्टेट मामले का हवाला दिया गया था. इस पर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने डिवीजन बेंच एक के फैसले पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि देवेंद्र नेगी बनाम स्टेट मामले में डिवीजन बेंच एक ने इलेक्शन रूल 9(2) को सेट असाइड करते हुए आगे चुनाव की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के आदेश दिए थे. मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली डबल बेंच ने पाया कि इस केस की सुनवाई के दौरान किशन सिंह तोमर बनाम स्टेट ऑफ़ गुजरात मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में नहीं लाया गया. इस लिए मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ ने मामले को डिवीजन बेंच एक के सामने रखने के आदेश दिए थे.

