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विमल नेगी मौत मामले में IAS अधिकारी हरिकेश मीणा को हाईकोर्ट से मिली सशर्त जमानत

विमल नेगी मौत मामले में हिमाचल हाईकोर्ट ने हरिकेश मीणा को सशर्त जमानत दी है.

Himachal High Court
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : December 24, 2025 at 12:35 PM IST

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Updated : December 24, 2025 at 12:45 PM IST

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शिमला: हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड चीफ इंजीनियर विमल नेगी की संदिग्ध मौत मामले में बड़ा अपडेट आया है. मामले में आरोपी आईएएस अधिकारी हरिकेश मीणा को हिमाचल हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है. हरिकेश मीणा की ओर से अग्रिम जमानत के लिए हिमाचल हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. इस पर हिमाचल उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह की कोर्ट ने फैसला सुनाया है. हरिकेश मीना को 50 हजार रुपए निजी मुचलके के तौर पर जमा करने होंगे.

इन शर्तों के साथ मिली नियमित जमानत

जस्टिस वीरेंद्र सिंह की अदालत ने मामले फैसला सुनाते हुए हरिकेश मीणा को कुछ शर्तों का पालन करने के आदेश दिए हैं. उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को जांच के लिए उपलब्ध रहना होगा. जांच अधिकारी की ओर से बुलाए जाने पर अधिकारी को जांच में शामिल होना होगा. इसके अलावा हरिकेश मीणा अदालत की पूर्व अनुमति के बिना भारत छोड़कर नहीं जाएगा. इसके अलावा अदालत ने कहा है कि याचिकाकर्ता इस मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दबाव न डाले. अदालत ने आदेश दिए हैं कि याचिकाकर्ता को ट्रायल कोर्ट में हर तारीख पर उपस्थित रहना होगा. अगर किन्हीं कारणों से उपस्थित न हो सके तो उचित आवेदन देना होगा.

हिमाचल उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में एक मूल्यवान जीवन की हानि हुई है, लेकिन सिर्फ इस आधार पर याचिका खारिज करके ट्रायल से पहले याचिकाकर्ता को दंडित नहीं किया जा सकता. जस्टिस वीरेंद्र सिंह ने अपने आदेश में इसी मामले में एक अन्य आरोपी देशराज को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत का हवाला दिया. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इसी तरह के मामले में एक सह-आरोपी को भी सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल चुकी है. याचिकाकर्ता की अपराध में क्या भूमिका रही, यह ट्रायल के बाद साबित होगा. कोर्ट ने कहा कि स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार जांच अभी जारी है और याचिकाकर्ता की प्रार्थना खारिज करने से कोई लाभ नहीं होगा.

हाईकोर्ट ने 3 दिसंबर को मामले में सुरक्षित रखा था फैसला

उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 3 दिसंबर को मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था. सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी सीबीआई ने अदालत के समक्ष आईएएस हरिकेश मीणा की जमानत का विरोध किया था. दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.

हाईकोर्ट के आदेशों के पर CBI को सौंपी गई जांच

उल्लेखनीय है कि पावर कारपोरेशन के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की रहस्यमयी स्थितियों में मौत हो गई थी. उनका शव बिलासपुर की गोविंद सागर झील के किनारे मिला था. विमल नेगी की पत्नी किरण नेगी ने कारपोरेशन के उच्च अधिकारियों पर उनके पति को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था. किरण नेगी ने मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाई थी. हाईकोर्ट के आदेश पर विमल नेगी की संदिग्ध मौत की जांच का जिम्मा सीबीआई को दिया गया है. इस मामले में अब तक कई मोड़ आ चुके हैं. इससे पहले सीबीआई ने राज्य सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा था कि सरकार जांच को प्रभावित कर रही है. उस समय राज्य सरकार ने कहा था कि सीबीआई जांच में उसका कोई दखल नहीं है. तब सीबीआई के आवेदन पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था और हरिकेश मीणा की अग्रिम जमानत याचिका की अवधि बढ़ा दी थी. उससे पहले अप्रैल माह से लेकर अब तक कई बार ये अंतरिम राहत के रूप में अवधि बढ़ती रही. इस मामले में पूर्व में राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया था. बाद में जांच सीबीआई के पास गई थी.

क्या है मामला?

पावर कारपोरेशन के चीफ इंजीनियर विमल नेगी 10 मार्च को लापता हो गए थे. बाद में 18 मार्च को उनका शव बिलासपुर की गोविंद सागर झील के किनारे मिला था. उनकी पत्नी किरण नेगी ने कारपोरेशन के एमडी हरिकेश मीणा व निदेशक देस राज के खिलाफ विमल नेगी को प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं.

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Last Updated : December 24, 2025 at 12:45 PM IST