वर्क ऑर्डर कर्मियों पर 'दोहरा खेल' नहीं चलेगा! बिजली बोर्ड को हाईकोर्ट की दो टूक, समान सेवा वालों को समान हक
हाईकोर्ट का यह फैसला लंबे समय से वर्क ऑर्डर पर सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 15, 2026 at 12:52 PM IST
शिमला: बिजली बोर्ड में सालों तक वर्क ऑर्डर पर सेवाएं देने के बाद नियमितीकरण की आस लगाए बैठे कर्मचारियों के लिए हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला बड़ी राहत लेकर आया है. अदालत ने साफ कर दिया है कि एक जैसी योग्यता और परिस्थितियों में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए नियमों का पैमाना अलग-अलग नहीं हो सकता. बोर्ड किसी कर्मचारी के नियमितीकरण से इसलिए इनकार नहीं कर सकता कि उसकी पुरानी नीति बाद में वापस ले ली गई, जबकि उसी दौरान समान स्थिति वाले दूसरे कर्मचारियों को नियमितीकरण का लाभ दे दिया गया हो. कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 के समानता के अधिकार की कसौटी पर परखा है. मुख्य न्यायमूर्ति जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड की दो अपीलों को खारिज करते हुए पूर्व राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के नियमितीकरण संबंधी आदेश को बरकरार रखा. मामला कपूर कुमार शर्मा और लायक राम शर्मा का है, जिन्होंने वर्ष 1996 से 2013-14 तक बिजली बोर्ड के ज्योरी डिवीजन में ट्रेंड इलेक्ट्रिशियन के रूप में वर्क ऑर्डर के आधार पर लगातार सेवाएं दी थीं.
पुरानी नीति का हवाला देकर रोका रास्ता
पूर्व राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने 3 अप्रैल 2018 को बोर्ड को दोनों कर्मचारियों की सेवाएं सभी परिणामी लाभों सहित नियमित करने के निर्देश दिए थे. बोर्ड ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए दलील दी कि वर्क ऑर्डर कर्मचारियों को नियमित करने की उसकी पुरानी 20 वर्ष की सेवा वाली नीति अक्टूबर 2014 में वापस ली जा चुकी थी. इसलिए दोनों कर्मचारी नियमितीकरण के हकदार नहीं हैं. लेकिन सुनवाई के दौरान मामला उस मोड़ पर पहुंच गया, जहां बोर्ड के अपने ही फैसले पर सवाल खड़े हो गए.
नियमितीकरण का दूसरा पैमाना
अदालत के समक्ष सामने आया कि जब इन दोनों कर्मचारियों का मामला न्यायिक विचाराधीन था, उसी दौरान जुलाई में बोर्ड ने वर्क ऑर्डर पर कार्यरत छह अन्य क्लर्कों को नियमित कर दिया. इन कर्मचारियों के लिए बोर्ड ने 17 वर्ष की सेवा का नया पैमाना अपनाया था.
हाईकोर्ट ने इस पर बोर्ड से जवाब मांगा. इसके बाद बोर्ड के अंडर सेक्रेटरी की ओर से दाखिल हलफनामे में छह क्लर्कों के नियमितीकरण की बात स्वीकार की गई. अदालत ने इसी तथ्य को अहम मानते हुए स्पष्ट किया कि जब बोर्ड ने जुलाई 2019 में 17 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले छह वर्क ऑर्डर कर्मचारियों को नियमित किया है, तो समान योग्यता और परिस्थितियों वाले इन इलेक्ट्रिशियनों को नियमितीकरण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता. हाईकोर्ट ने माना कि समान परिस्थितियों में काम कर रहे कर्मचारियों के साथ अलग-अलग मापदंड अपनाना कानून की नजर में उचित नहीं है. बोर्ड अपनी सुविधा के मुताबिक एक कर्मचारी के लिए एक नियम और दूसरे के लिए दूसरा नियम नहीं बना सकता.
दो अपीलें खारिज, नियमितीकरण का आदेश बरकरार
खंडपीठ ने बिजली बोर्ड की दोनों अपीलों को खारिज करते हुए ट्रिब्यूनल के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कपूर कुमार शर्मा और लायक राम शर्मा की सेवाओं को परिणामी लाभों के साथ नियमित करने के निर्देश दिए गए थे. फैसला लंबे समय से वर्क ऑर्डर पर सेवाएं दे रहे ऐसे कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके नियमितीकरण के मामलों में समानता और एकरूपता को लेकर विवाद बना हुआ है.
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