क्लास वन अफसरों की बार-बार ट्रांसफर पर हाईकोर्ट की कड़ी नसीहत, न्यूनतम कार्यकाल तय करे सरकार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी अफसरों की बार-बार की जा रही ट्रांसफर पर कड़ी नाराजगी जताते हुए बड़ा फैसला सुनाया है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 19, 2026 at 8:46 AM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी अफसरों की बार-बार की जा रही ट्रांसफर पर कड़ी नाराजगी जताते हुए बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने इस संदर्भ में राज्य सरकार को सख्त निर्देश जारी किए हैं. हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई क्लास वन अधिकारी है तो इसका अर्थ ये नहीं कि विभाग उस अफसर के निरंतर व बिना किसी कारण के तबादला करता रहे. इस टिप्पणी के साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को सख्त नसीहत दी है कि वह क्लास-वन अफसरों के लिए न्यूनतम कार्यकाल तय करे, ताकि ट्रांसफर में निष्पक्षता बनी रहे. ये फैसला न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की अदालत ने सुनाया है.
मामले के अनुसार बबनेश चड्ढा नामक व्यक्ति ने एक एक सिविल रिट याचिका दाखिल की थी. उसी की सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है. साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता बबनेश के तबादला आदेश को भी रद्द कर दिया है. याचिकाकर्ता बबनेश चड्ढा मंडी जिले के विकास खंड बाली चौकी में कार्यरत थे. संबंधित विभाग ने 1 जुलाई 2026 को एक आदेश जारी कर उनका तबादला वहां से अन्यत्र कर दिया था. इस आदेश के खिलाफ उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था और एक सिविल रिट याचिका दाखिल की.
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के संज्ञान में यह बात आई कि याचिकाकर्ता को बाली चौकी में सेवाएं देते हुए अभी मात्र 1 वर्ष और 11 महीने ही हुए थे. इससे पहले भी उन्हें 1 जुलाई 2020 से 16 सितंबर 2021 तक करसोग जिला मंडी और फिर 6 सितंबर 2021 से 6 अप्रैल 2023 तक आनी जिला कुल्लू में लगातार कम समय में ट्रांसफर का सामना करना पड़ा था.
अदालत ने माना कि अधिकारी को उसके वर्तमान तैनाती स्थल पर एक सम्मानजनक और उचित कार्यकाल पूरा करने की अनुमति दिए बिना ट्रांसफर करने का कोई तार्किक आधार नहीं है. अदालत ने कहा कि सिर्फ प्रथम श्रेणी का अधिकारी होने से विभाग को बार-बार ट्रांसफर करने का अधिकार नहीं मिल जाता. ऐसे अधिकारी भी एक निश्चित स्थान पर तय समय तक काम करने के हकदार हैं. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कहा कि वह क्लास-1 अधिकारियों के लिए भी न्यूनतम कार्यकाल और वस्तुनिष्ठ दिशा-निर्देश तय करे, ताकि पारदर्शिता बनी रहे.
साथ ही विभाग को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता को वर्तमान स्टेशन (बाली चौकी) पर कम से कम ढाई से तीन साल का कार्यकाल पूरा करने दिया जाए. इसके बाद ही विभाग प्रशासनिक अनिवार्यताओं के आधार पर उनकी ट्रांसफर कर सकेगा.

