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पात्र होने के बावजूद कर्मचारी को करियर प्रोग्रेशन स्कीम के तहत लाभ न देना गैरकानूनी और असंवैधानिक: HC

हिमाचल हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई में प्रतिवादी हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड को कर्मचारियों का बकाया चुकाने के निर्देश दिए.

हिमाचल हाईकोर्ट
हिमाचल हाईकोर्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : June 24, 2026 at 10:55 PM IST

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शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के एसीपीएस के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सुनिश्चित करियर प्रगति योजना यानि एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम (ACPS) के तहत मिलने वाले लाभ का असर कर्मचारियों पर हर महीने पड़ता है. इसलिए केवल देरी से दावा करने के आधार पर उन्हें इस लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता.

हिमाचल हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस जिया लाल भारद्वाज ने इस मामले में याचिकाओं को स्वीकार करते हुए प्रतिवादी हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड को कर्मचारियों का बकाया चुकाने के निर्देश दिए हैं. अदालत ने निर्देश दिए हैं कि बैंक चार साल की सेवा पूरी होने के बाद से याचिकाकर्ताओं को एसीपीएस से जुड़े सभी वित्तीय लाभ प्रदान करें. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को बकाया राशि वर्तमान याचिका दायर करने की तिथि से तीन वर्ष पूर्व की अवधि से दी जाएगी. साथ ही बैंक अगर तीन महीने के भीतर यह भुगतान नहीं करता है तो उसे वास्तविक भुगतान होने तक बकाया राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.

जस्टिस जिया लाल भारद्वाज की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि एसीपीएस का लाभ न मिलने से कर्मचारियों को हर महीने के वेतन में वित्तीय नुकसान होता है. ऐसे में यह कोई एक बार उत्पन्न होने वाला विवाद नहीं बल्कि लगातार जारी रहने वाला कारण है. अदालत ने माना कि कर्मचारियों को केवल इस वजह से वित्तीय लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता कि उन्होंने कुछ समय बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया है.

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें बैंक ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने अपने अधिकार की मांग करने में देरी की. कोर्ट ने यह भी माना कि पात्र होने के बावजूद एसीपीएस का लाभ न देना गैर-कानूनी, मनमाना व भेदभावपूर्ण है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में दिए गए समानता और समान अवसर के अधिकार का भी उल्लंघन करता है. अदालत ने कहा कि अगर किसी कर्मचारी को निर्धारित समय के भीतर पदोन्नति नहीं मिलती है तो उसे इस योजना के अनुसार लाभ मिलना चाहिए.

याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति सितंबर और अक्टूबर 2017 में प्रतिवादी बैंक में जूनियर क्लर्क के रूप में हुई थी. बाद में उन्हें साल 2023 में एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट के पद पर पदोन्नत किया गया. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने सितंबर और अक्टूबर 2021 तक बिना किसी पदोन्नति के चार वर्ष की सेवा पूरी कर ली थी, इसलिए वे नई एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम के तहत लाभ पाने के हकदार थे. यह योजना 09 अगस्त 2012 के निर्देशों के अनुसार बैंक कर्मचारियों पर लागू की गई थी. योजना में प्रावधान है कि किसी कैडर में चार वर्ष की सेवा पूरी कर लेने और आठ वर्ष से कम सेवा होने की स्थिति में, यदि कर्मचारी को पदोन्नति नहीं मिली है तो उसे अगले ग्रेड पे और उच्च वेतनमान का लाभ दिया जाएगा.

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बैंक ने अन्य कर्मचारियों को यह लाभ दिया, लेकिन उन्हें इससे वंचित रखा गया. इसी को चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उनके पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है.

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