करुणामूलक नौकरी पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नियुक्ति के समय प्रार्थी बेटी की शादी वाली शर्त से जुड़ा है मामला
करुणामूलक नौकरी से जुड़े मामले में याचिकाकर्ता श्यामा कुमारी की याचिका पर हिमाचल हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : April 24, 2026 at 10:32 PM IST
शिमला: अनुकंपा आधार पर नियुक्ति यानी करूणामूलक नौकरी के मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. अदालत ने एक बेटी की अनुकंपा आधार पर नियुक्ति से जुड़े मामले में ये फैसला दिया है. हाईकोर्ट ने सरकार की उस नीति को अस्वीकार्य ठहरा दिया है, जिसमें ये शर्त लगाई गई थी कि यदि नियुक्ति के समय बेटी की शादी हो गई है तो उसे ज्वाइनिंग नहीं दी जाएगी.
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की इस शर्त को नामंजूर कर दिया है. इस सरकारी शर्त के संदर्भ में हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई बेटी अविवाहित रहते हुए करूणामूलक नियुक्ति के लिए आवेदन करती है तो उसकी स्थिति को पेशकश के समय अविवाहित बेटी ही माना जाएगा. हाईकोर्ट ने कहा कि चाहे बेटी की शादी हुई हो या न हुई हो.
यदि करूणामूलक नौकरी के लिए ऐसे उम्मीदवार के द्वारा वैवाहिक स्थिति (मेरिटल स्टेट्स) प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाना है, तो वह उस तिथि से संबंधित होगा. जब उसने पद के लिए आवेदन किया था. अदालत ने कहा कि उक्त प्रमाण पत्र आवेदन की तिथि से संबंधित होगा न कि उस समय से जब नियुक्ति की पेशकश की जा रही है.
इस संदर्भ में अदालत के समक्ष एक मुद्दा आया था. मुद्दा ये था कि क्या अनुकंपा आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदन करने वाली अविवाहित बेटी अपात्र हो जाएगी यदि वो नियुक्ति की पेशकश से पहले शादी कर लेती है? इस पर अदालत ने बेटी को तब तक अविवाहित ही माने जाने के आदेश दिए, जब तक उसे नियुक्ति की पेशकश नहीं की जाती. अदालत के अनुसार ऐसे केस में शर्त यही है कि आवेदन के समय बेटी अविवाहित होनी चाहिए.
यदि आवेदन के समय उसकी शादी नहीं हुई है और बाद में नियुक्ति की पेशकश के समय उसका विवाह हो चुका हो, फिर भी उसका स्टेट्स आवेदन के समय वाला ही होगा. यानी अविवाहित ही माना जाएगा. अदालत ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी पुत्री से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह अनुकंपा नियुक्ति के लिए अपने आवेदन पर सरकार द्वारा निर्णय लेने के लिए लंबे अरसे तक इंतजार करे और इस बीच विवाह न करे.
क्लास फोर की पोस्ट का मामला
मामले में याचिकाकर्ता श्यामा कुमारी है. उसकी याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश जारी किए कि वह श्यामा कुमारी को चार साल पहले यानी 31 अगस्त 2022 के नियुक्ति पत्र के आधार पर उसके सेवा में शामिल होने की तिथि से दैनिक वेतनभोगी चपरासी के रूप में एप्वाइंटिड माना जाए. साथ ही उसे सभी परिणामी लाभ दिए जाएं. इन बेनेफिट्स में मोनेटरी बेनेफिट्स और सीनियोरिटी शामिल है.
अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता को संबंधित विभाग ने परिस्थितियों का शिकार बनाया है. मामले के अनुसार याचिकाकर्ता श्यामा कुमारी ने पिता की मृत्यु के बाद जून 2021 में करूणामूलक नियुक्ति के लिए आवेदन किया था. श्यामा कुमारी ने 25 जुलाई 2021 को शादी कर ली. नियुक्ति की पेशकश किए जाने के बाद उसने 6 सितंबर 2022 को दैनिक वेतनभोगी चपरासी के पद पर अपनी ज्वाइनिंग दी. इसके बाद जब उसने मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया तो विभाग ने 19.09.2022 को उसकी नियुक्ति ही अस्वीकार कर दी.
विभाग ने कहा कि उसने ज्वाइनिंग के समय गलत जानकारी दी कि वह अविवाहित है. जबकि वह ज्वाइनिंग के समय शादीशुदा थी. वहीं, सरकार की तरफ से नियुक्ति की शर्त थी कि वह उस समय आवेदक अविवाहित होना चाहिए. मामला हाईकोर्ट में पहुंचा तो हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की नियुक्ति के समय शादी वाली शर्त को अस्वीकार्य ठहराया.
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