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हिम ऊर्जा के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी का तबादला HC ने किया रद्द, ठेकेदार की सिफारिश पर ट्रांसफर को ठहराया गलत

हिम ऊर्जा के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी के तबादले का आदेश हिमाचल हाईकोर्ट ने किया रद्द.

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट (FILE)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : December 19, 2025 at 8:02 PM IST

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शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिम ऊर्जा के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी रमेश कुमार ठाकुर के तबादले को रद्द करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी का तबादला नियमों के मुताबिक और जनहित या प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार हो. सरकारी कर्मचारी की तैनाती नियोक्ता का अधिकार, मगर इसमें मनमानी नहीं होनी चाहिए.

रमेश कुमार ठाकुर ने उनके तबादले को उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर चुनौती दी थी. इस पर जस्टिस संदीप शर्मा की सिंगल बेंच ने सुनवाई करते हुए तबादला रद्द करने का आदेश दिया है. अदालत ने अपने ऑर्डर में कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति की सिफारिश पर सरकारी कर्मचारी का तबादला नहीं किया जा सकता, जो किसी संवैधानिक पद पर न और जिसका विभाग से कोई लेना-देना न हो. अदालत ने कहा याचिकाकर्ता का तबादला नियमों के मुताबिक और जनहित या प्रशासनिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए किया जा सकता है.

याचिकाकर्ता का आरोप सरकारी ठेकेदार की सिफारिश पर किया गया तबादला

याचिकाकर्ता हिम ऊर्जा के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी रमेश कुमार ठाकुर ने अपने तबादले को चुनौती देते हुए हिमाचल उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. याचिका में रमेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि ज्वाइनिंग के लिए बिना समय दिए उनका तबादला हिम ऊर्जा (HIM URJA) कार्यालय धर्मशाला से चंबा कर दिया गया. याचिका में आरोप लगाया गया कि यह तबादला मुख्यमंत्री के कार्यालय से जारी यूओ के आधार पर किया गया. यह यूओ नोट सरकारी ठेकेदार मैसर्स हिमालयन टेक्नो के मालिक के कहने पर जारी किया गया. इस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की अदालत ने तबादले को अनुचित करार दिया है.

समय पर सोलर पावर परियोजनाएं पूरी न होने पर ठेकेदार को भेजे नोटिस तो करवा दिया ट्रांसफर

दरअसल, याचिकाकर्ता रमेश कुमार ठाकुर राज्य सरकार के उपक्रम, हिम ऊर्जा में वरिष्ठ परियोजना अधिकारी हैं. रमेश कुमार ठाकुर हिम ऊर्जा कांगड़ा के धर्मशाला कार्यालय में तैनात थे. उन्हें 15 नवंबर 2025 को उन्हें चंबा कार्यालय स्थानांतरित कर करने के आदेश जारी किए गए. याचिकाकर्ता का आरोप था कि यह तबादला एक निजी ठेकेदार के दबाव में किया गया. क्योंकि, उन्होंने समय पर सोलर पावर परियोजनाएं पूरी न होने पर संबंधित ठेकेदार को नोटिस भेजे थे.

कानून के तहत प्रशासनिक आवश्यकता और जनहित में हो सरकारी कर्मचारी का तबादला: कोर्ट

उच्च न्यायालय ने मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि व्यक्ति न तो संवैधानिक पदाधिकारी है, न जनप्रतिनिधि. इसके अलावा व्यक्ति विभाग से जुड़ा कोई अधिकारी नहीं है. इसके बावजूद उसकी सिफारिश पर तबादला किया जाना गंभीर मामला है. अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मचारी का तबादला विधि के अनुसार प्रशासनिक आवश्यकता और जनहित में किया जाना चाहिए.

न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया. अदालत ने कहा कि बाहरी दबाव, सिफारिश या राजनीतिक हस्तक्षेप के आधार पर तबादले की परंपरा पहले ही खारिज की जा चुकी है. हाईकोर्ट ने 15 नवंबर 2025 का तबादला आदेश रद्द करते हुए राज्य सरकार को यह छूट दी है कि यदि भविष्य में जरूरत हो, तो कानून और प्रशासनिक नियमों के तहत ही तबादला किया जाए.

सरकारी कर्मचारी की तैनाती नियोक्ता का अधिकार, मगर नहीं होनी चाहिए मनमानी: HC

अदालत ने अपने ऑर्डर में कहा कि सरकारी कर्मचारी की तैनाती नियोक्ता का अधिकार है. मगर, कार्रवाई में कोई मनमानी नहीं होनी चाहिए. तबादले का इस्तेमाल बिना किसी प्रशासनिक आवश्यकता के व्यक्ति को कहीं एक्साइटेड करने के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता अपने तबादले से आहत है. इसकी एकमात्र दलील यह है कि उसने स्वयं अपने तबादले के लिए प्रार्थना नहीं की थी. याचिकाकर्ता ने वर्तमान स्थान पर केवल दो वर्ष और कुछ महीने के लिए ही कार्य किया है. ऐसे में उच्च न्यायालय इस मामले में हस्तक्षेप करने के पक्ष में है.

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