हिमाचल HC ने रद्द की कुनिहार को नगर पंचायत बनाने वाली अधिसूचना, सरकार को दिए ये आदेश
हिमाचल हाईकोर्ट ने कुनिहार को नगर पंचायत बनाने वाली अधिसूचना को रद्द कर दिया है. साथ ही सरकार को पुनर्विचार करने के आदेश दिए हैं.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 23, 2025 at 6:00 PM IST
शिमला: एक बड़े घटनाक्रम के तहत हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सोलन जिला में कुनिहार को नगर पंचायत बनाने से जुड़े मामले में सरकारी अधिसूचना को रद्द कर दिया है. इस मामले में अदालत ने सरकार को पुनर्विचार करने के आदेश भी जारी किए हैं.
हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर व न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने कुनिहार को नगर पंचायत बनाने से जुड़ी अधिसूचना को रद्द किया है. खंडपीठ ने इस संदर्भ में कुनिहार विकास सभा व अन्यों की तरफ से दाखिल की गई याचिका को मंजूर करते हुए उक्त फैसला सुनाया. साथ ही सरकार को इस मामले पर पुनर्विचार करने की आदेश भी जारी किए.
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणियां की. खंडपीठ ने याचिका के जवाब को लेकर राज्य सरकार की ओर से लगाए गए 12.12.2025 के निर्देशों और दस्तावेजों का अवलोकन किया. सभी दस्तावेजों को देखने के बाद अदालत ने पाया कि असल में कुनिहार निवासियों और नगर पंचायत कुनिहार की आपत्तियों को प्रस्ताव के लिए तैयार किए गए चार्ट में तो दर्ज किया गया, लेकिन संबंधित सक्षम प्राधिकारी ने कोई तर्कसंगत और स्पष्ट आदेश पारित नहीं किया.
अदालत ने पाया कि तर्कसंगत व स्पष्ट आदेश पारित तो नहीं किया, बल्कि आपत्तियों को अन्य दस्तावेजों के साथ कैबिनेट के विचार के लिए प्रस्तुत किया. खंडपीठ ने कहा कि कैबिनेट के समक्ष रखे गए दस्तावेजों को देखने पर ऐसा लगता है कि संबंधित आपत्तियों पर अथॉरिटी ने विचार कर लिया है.
हाईकोर्ट ने प्रक्रिया को बताया गलत
अदालत ने कहा कि दस्तावेज देखकर ऐसा दर्शाने की कोशिश प्रतीत होती है कि सक्षम अथॉरिटी द्वारा आपत्तियों पर विचार कर लिया गया था और उसी जानकारी के आधार पर अंतिम नोटिफिकेशन का मामला कैबिनेट में रखा. यह भी लगता है कि उसी आधार पर कैबिनेट ने अंतिम अधिसूचना जारी करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी.
हाईकोर्ट ने कहा कि ये प्रक्रिया व कार्रवाई गलत और रिकॉर्ड के विपरीत थी. ऐसे में इस मामले पर सक्षम प्राधिकारी यानी सरकार के सचिव (शहरी विकास) को पुनर्विचार करने की आवश्यकता है. खंडपीठ ने शहरी विकास विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ता की आपत्तियों को लेकर कानून के अनुसार नए साल की 10 जनवरी की तारीख को या उससे पहले विचार करे.
व्यक्तिगत सुनवाई का आदेश
हाईकोर्ट ने साथ ही कहा कि याचिकाकर्ता को स्वयं या शहरी विकास निदेशक के माध्यम से व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने के बाद एक तर्कसंगत और स्पष्ट आदेश पारित किया जाए.
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