हिमाचल में खुलने वाला है 2183 सड़कों का भाग्य, हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सरकार की बड़ी तैयारी
हिमाचल सरकार वन भूमि हस्तांतरण को लेकर मास्टर प्लान तैयारी कर रही है. ताकि दूरदराज इलाकों को सड़कों से जोड़ने का रास्ता साफ हो सके.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : June 19, 2026 at 8:38 PM IST
शिमला: हिमाचल में वर्षों से कानूनी और प्रशासनिक पेचीदगियों में उलझी हजारों ग्रामीण सड़कों के भविष्य को लेकर अब एक बड़ा फैसला आकार लेता दिखाई दे रहा है. प्रदेश के दूरदराज इलाकों को जोड़ने वाली 2183 ऐसी सड़कें, जिनका निर्माण वन संरक्षण अधिनियम की औपचारिक स्वीकृति के बिना हुआ था, अब एक व्यापक प्रक्रिया के दायरे में लाई जाएंगी. इस संबंध में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वन विभाग को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं.
जिन सड़कों को लेकर अब सरकार व्यापक योजना तैयार करने जा रही है, उनमें अधिकांश का निर्माण वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) 2006 लागू होने से पहले किया गया था. बावजूद इसके, कानूनी प्रक्रियाओं और मंजूरियों के अभाव में ये सड़कें वर्षों तक फाइलों में उलझी रहीं. वर्ष 2016 से 2026 के बीच केवल 150 मामलों को ही स्वीकृति मिल पाई, जबकि बाकी हजारों सड़कें अनिश्चितता के साए में रहीं. इसी मुद्दे को लेकर उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका के बाद न्यायालय ने विभाग को एफआरए के प्रावधानों के तहत सभी मामलों की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे.
वन भूमि हस्तांतरण की व्यापक और व्यवस्थित योजना की जाए तैयार
शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वन विभाग की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. इस दौरान सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 तथा हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप 2183 सड़कों के लिए वन भूमि हस्तांतरण (डायवर्जन) की व्यापक और व्यवस्थित योजना तैयार की जाए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण संपर्क व्यवस्था को मजबूत बनाने और दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. इन सड़कों ने वर्षों से दुर्गम बस्तियों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया है और विशेष रूप से आपदा संभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों के दौरान इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है. सरकार का प्रयास है कि कानूनी औपचारिकताओं को पूरा कर इन सड़कों को स्थायी वैधानिक दर्जा दिलाया जाए, ताकि भविष्य में विकास कार्य किसी बाधा का सामना न करें.
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