सुप्रीम कोर्ट में कर्मचारी एक्ट खारिज होने के बाद हिमाचल सरकार का बड़ा कदम, फील्ड ऑफिसर नहीं, प्रशासनिक स्तर पर होंगे फैसले
न्यायिक फैसलों के आधार पर जुड़े मामलों की जांच और अदालती फैसलों से उपजी स्थितियों के मध्यनजर अगामी निर्णय प्रशासनिक स्तर पर ही होंगे.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 19, 2026 at 4:20 PM IST
|Updated : August 19, 2026 at 5:15 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में कर्मचारी एक्ट खारिज होने से उपजी परिस्थिति में सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने अहम निर्देश जारी किए हैं. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के ताज मोहम्मद मामले और उससे जुड़े अन्य मामलों में आए फैसलों के बाद प्रदेश सरकार ने सभी विभागों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं.
सुक्खू सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन न्यायिक फैसलों के आधार पर जुड़े मामलों की जांच और अदालती फैसलों से उपजी स्थितियों के मध्य नजर सभी आगामी निर्णय संबंधित विभाग के प्रशासनिक स्तर पर ही होंगे. फील्ड स्तर का कोई भी अधिकारी प्रशासनिक विभाग की मंजूरी के बिना ऐसे मामलों में फैसला नहीं ले सकेगा. सरकार की ओर कार्मिक विभाग की प्रधान सचिव सुधा देवी ने आदेश जारी किए हैं. कार्मिक विभाग से जारी निर्देश में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश रिक्रूटमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस ऑफ गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एक्ट, 2024 को हाईकोर्ट ने 25 अप्रैल 2026 के फैसले में रद्द कर दिया था. यह फैसला CWP No. 3361 of 2025, देविंदर कुमार एवं अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार एवं अन्य तथा इससे जुड़े मामलों में सुनाया गया था. हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील भी की गई थी. वह अपील भी 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो गई थी.
सरकार के निर्देश के मुताबिक देविंदर कुमार मामले का संबंध हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के लेख राम मामले (O.A. No. 3337 of 2016) से है. इसके बाद मामला हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच के ताज मोहम्मद मामले (CWP No. 2004 of 2017) से भी जुड़ा है. हाईकोर्ट के फैसलों में अनुबंध आधार पर नियुक्त कर्मचारियों के सेवा लाभ, नियमितीकरण और अनुबंध अवधि को सेवा लाभों के लिए गिने जाने जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण व्यवस्था दी गई है. अब सरकार ने कहा है कि ताज मोहम्मद मामले और इससे जुड़े अन्य मामलों में पारित फैसलों और उनसे जुड़े आकस्मिक मामलों को संबंधित विभागों में प्रशासनिक विभाग के स्तर पर जांचा और तय किया जाएगा. कोई भी फील्ड स्तर का अधिकारी प्रशासनिक विभाग की मंजूरी के बिना इस तरह के मामलों में निर्णय नहीं लेगा.
सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों, विभागों और विशेष रूप से ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर्स (DDOs) को इन निर्देशों की जानकारी देने और इनका कड़ाई से पालन करने को कहा है. हाईकोर्ट ने 25 अप्रैल के अपने फैसले में संबंधित सरकारी कर्मचारी अधिनियम को रद्द करते हुए उसके आधार पर की गई कार्रवाई को भी अवैध घोषित किया था. वहीं, कर्मचारी एक्ट में सरकार सुप्रीम कोर्ट में भी हार गई है. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कर्मचारियों के वित्तीय वो अन्य लाभ चार माह में जारी करने के निर्देश दिए हैं.

