जानिए अपना परिवार सुखी परिवार योजना के 10 मानदंड, इतने से अधिक इनकम तो मनरेगा में एक दिन का कार्य भी नहीं आएगा काम
योजना में ऐसे परिवारों को शामिल करने पर जोर है, जो सामान्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह गए हैं.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 29, 2026 at 12:54 PM IST
|Updated : August 29, 2026 at 1:47 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में अति निर्धन परिवारों को आर्थिक सहारा देने के लिए 2 अक्टूबर से शुरू की जा रही मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना में पात्रता को लेकर सरकार ने तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है. योजना में सिर्फ गरीबी या आर्थिक तंगी को आधार नहीं बनाया गया है. इसमें पहले तय चयन मानदंड के आधार पर परिवारों का एक पूल तैयार किया गया है और इसके बाद बहिष्करण मानदंड लागू कर अंतिम पात्र परिवारों का चयन किया जाएगा. यानी किसी परिवार का पहले चरण में पात्रता के दायरे में आना ही योजना का लाभ मिलने की गारंटी नहीं है. अंतिम चयन से पहले उसकी आय, जमीन, नौकरी और अन्य स्थितियों की भी जांच होगी.
सरकार द्वारा तय मानदंडों के अनुसार योजना में ऐसे अति निर्धन परिवारों को शामिल करने पर जोर है, जो सामान्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह गए हैं. खास बात यह है कि 27 से 59 वर्ष की आयु के वयस्क सदस्य का न होना, महिला मुखिया वाले परिवार, दिव्यांग मुखिया, मनरेगा में न्यूनतम काम करने वाले परिवार और गंभीर बीमारी अथवा स्थायी रूप से बिस्तर पर पड़े कमाऊ सदस्य वाले परिवार समावेशन की श्रेणी (Inclusion Criteria) में रखे गए हैं.

पहले इन परिवारों का बना है पूल
योजना के मानदंड में छह श्रेणियां निर्धारित की गई हैं. इनमें ऐसे परिवार जिनमें 27 वर्ष से कम आयु के अनाथ बच्चे ही सदस्य हों, अथवा जिनमें केवल 59 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजन सदस्य हों और 27 से 59 वर्ष की आयु का कोई वयस्क सदस्य न हो. ऐसे परिवार जिनकी मुखिया महिला हो और जिनमें 27 से 59 वर्ष की आयु का कोई वयस्क सदस्य न हो. इसमें विधवा, अविवाहित, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाएं शामिल होंगी. ऐसे परिवार जिनके मुखिया में 40 प्रतिशत दिव्यांगता हो. ऐसे परिवार जिनके सभी वयस्क सदस्यों ने पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत कम से कम एक दिन काम किया हो.
ऐसे परिवार जिनके कमाने वाले सदस्य कैंसर, अल्जाइमर, पार्किंसंस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया या किसी अन्य बीमारी से पीड़ित होने के कारण स्थायी रूप से अक्षम हो गए हों. ऐसे परिवार जिनका कमाने वाला सदस्य किसी दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के कारण स्थायी रूप से दिव्यांग अथवा बिस्तर पर पड़े (Bedridden) हो गया हो को अपना परिवार सुखी परिवार योजना में शामिल किया जाएगा.

असली पेंच यहां, पूल में आने पर भी हो सकता है बाहर
प्रदेश सरकार ने योजना में अंतिम पात्र परिवारों के चयन के लिए बाहर रखने के मानदंड भी तय किए हैं. यानी चयन मानदंड श्रेणी में आने के बाद भी यदि परिवार पर इनमें से कोई शर्त लागू होती है तो उसे योजना से बाहर कर दिया जाएगा. बहिष्करण (Exclusions) के तहत जिस परिवार का कोई भी सदस्य आयकर देता हो, उसे योजना का लाभ नहीं मिलेगा. इसी तरह परिवार की समस्त स्रोतों से वार्षिक आय 75,000 रुपये से अधिक होने पर परिवार बाहर हो जाएगा. जिन परिवारों के पास एक हेक्टेयर से अधिक भूमि है, वे पात्र नहीं होंगे. वहीं, जिस परिवार का कोई सदस्य सरकारी, अर्धसरकारी या निजी नौकरी में है, उसे भी योजना से बाहर रखा जाएगा.
75 हजार की आय सीमा सबसे अहम
दस्तावेज में दिए उदाहरण के अनुसार, यदि किसी परिवार के सभी वयस्क सदस्यों ने पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा में कम से कम एक दिन काम किया है तो वह मानदंड पूरा करता है और पात्र परिवारों के पूल में आ सकता है. लेकिन, यदि इस परिवार की वार्षिक आय 75,000 रुपये से अधिक पाई जाती है तो उसे योजना से बाहर कर दिया जाएगा. वहीं, यदि वार्षिक आय 75,000 रुपये या उससे कम है और परिवार पर कोई दूसरा बाहर रखने के मानदंड लागू नहीं होता, तो उसे योजना के लिए अंतिम पात्र परिवार माना जाएगा.
सरल शब्दों में समझें तो सरकार की प्रक्रिया दो चरणों में चलेगी. पहले चयन के मानदंड से संभावित पात्र परिवारों का पूल बनेगा और फिर बहिष्करण मानदंड लगाकर इसी पूल में से अंतिम पात्र परिवारों का चयन किया जाएगा. ऐसे में व्यवस्था का उद्येश्य साफ़ है कि 'मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना' में सिर्फ गरीबी की स्थिति पर्याप्त नहीं होगी, सरकार द्वारा तय सभी पात्रता शर्तों पर खरा उतरना जरूरी होगा.
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